मोदी और केजरी स्टाइल का ‘आदर्श’ मीडिया… जो पक्ष में लिखे-बोले वही सच्चा पत्रकार!

: मीडिया समझ ले, सत्ता ही है पूर्ण लोकतंत्र और पूर्ण स्वराज! : मौजूदा दौर में मीडिया हर धंधे का सिरमौर है। चाहे वह धंधा सियासत ही क्यों न हो। सत्ता जब जनता के भरोसे पर चूकने लगे तो उसे भरोसा प्रचार के भोंपू तंत्र पर होता है। प्रचार का भोंपू तंत्र कभी एक राह नहीं देखता। वह ललचाता है। डराता है। साथ खड़े होने को कहता है। साथ खड़े होकर सहलाता है और सिय़ासत की उन तमाम चालों को भी चलता है, जिससे समाज में यह संदेश जाये कि जनता तो हर पांच बरस के बाद सत्ता बदल सकती है। लेकिन मीडिया को कौन बदलेगा? तो अगर मीडिया की इतनी ही साख है तो वह भी चुनाव लड़ ले… राजनीतिक सत्ता से जनता के बीच दो-दो हाथ कर ले… जो जीतेगा, उसी की जनता मानेगी!

भूमि अधिग्रहण पर मोदी सरकार का पीछे हटना किसानों की जीत

: समग्र भूमि व किसान नीति बनने तक संघर्ष अपरिहार्य : प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने रविवार 29 अगस्त को आकाशवाणी के कार्यक्रम ‘मन की बात’ में यह घोषणा की कि भूमि अधिग्रहण संशोधन अध्यादेश को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा तथा वह किसानों का हर सुझाव मानने को तैयार हैं। यह घोषणा देश भर के किसानों और जनता के प्रतिरोध की जीत है, जिसकी वजह से ही मोदी सरकार को अपने पांव पीछे खींचने पर मजबूर होना पड़ा है। नहीं तो चंद रोज पहले तक श्रीमान मोदी, उनकी पार्टी भाजपा और उनके रणनीतिकार जिस तरह से इसे किसानों और देश के हित में बताकर शोर मचा रहे थे और इसे हर हाल में लागू करने के लिए ताल ठोंक रहे थे, यह बात किसी से छिपी नहीं है। भाजपा-विरोधी शासकवर्गीय पार्टियां इसका श्रेय लेने का चाहे जितना ढिंढोरा पीटें लेकिन आज जब मोदी सरकार ने अध्यादेश को आगे न बढ़ाने का फैसला ले लिया है तब एक राजनीतिक मुद्दा, जिसके नाम पर वे अपनी खोयी जमीन को वापस पाने के प्रयास में थे, उनके हाथ से चला गया है।

हिंदी सम्मेलन और भोपाल के अखबारों का मोदीकरण शर्मनाक है : ओम थानवी

Om Thanvi : भोपाल पहुँच कर देखा – हवाई अड्डे से शहर तक चप्पे-चप्पे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तसवीरों वाले विशाल पोस्टर लगे हैं, खम्भों पर भी मोदीजी के पोस्टर हैं। इनकी तादाद सैकड़ों में होगी। यह विश्व हिंदी सम्मलेन हो रहा है या भाजपा का कोई अधिवेशन? अधिकांश पोस्टर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से हैं – शहर में मोदीजी के स्वागत वाले। अनेक में चौहान की अपनी छवि भी अंकित है।

पत्रकार वेद प्रताप वैदिक भी धुर मोदी विरोधी हो गए… पढ़िए उनका ताजा लेख

देश में मोहभंग का वातावरण जितनी तेज़ी से अब बढ़ता जा रहा है, उतनी तेज़ी से कभी नहीं बढ़ा। इंदिरा गाँधी से मोहभंग होने में जनता को 8-9 साल लगे,राजीव गाँधी के बोफोर्स का पिटारा ढाई साल बाद खुला और मनमोहन सिंह को इस बिंदु तक पहुँचने में 6-7 साल लगे लेकिन हमारे “प्रधान–सेवक” का क्या हाल है? प्रचंड बहुमत से जीतनेवाले जन—नायक का क्या हाल है? उसका नशा तो दिल्ली की हार ने एक झटके में ही उतार दिया था,और अब वसुंधरा राजे की रोचक कथाओं और सुषमा स्वराज की भूल ने सम्पूर्ण भाजपा नेतृत्व और संघ परिवार को भी कटघरे में ला खड़ा किया है।

विदेश दौरों में खोए प्रधानमंत्री मोदी के नाम एक भारत वासी की चिट्ठी

सेवा में आदरणीय नरेंद्र मोदी जी,

प्रधान सेवक / चौकीदार / चीफ ट्रस्टी

भारत सरकार, नई दिल्ली,

विषय :- भारत के नागरिकों की समस्याओं के समाधान के बावत ।

महोदय,  

आप दुनिया के जिस भी देश में जाते हैं वहां कुछ न कुछ भारत के खजाने से देते हैं जो कि हम भारतीयों की खून पसीने की कमाई से इकठ्ठा  किया गया धन है, आप उसे इस तरह बाँट रहे हैं जैसे आपको ये धन पारिवारिक बंटवारे में मिला हो । आपने चुनाव के समय कहा था मुझे एक मौका दीजिये मैं भारत की संपत्ति दुनिया के लुटने नहीं दूंगा और उसकी चौकीदारी करूँगा,पर ये क्या आपको मौका मिलते ही अरबों खरबों डालर ऐसे बाँट डाले जैसे भारत को अब इस धन की जरूरत ही नहीं है। आपने तो सत्ता मिलते ही कहा था कि पूर्ववर्ती सरकार ने देश का खज़ाना खाली कर दिया है फिर इतना पैसा जो आपने भूटान नेपाल श्रीलंका मंगोलिया सहित दर्जन भर देशों को दिया है ये कहाँ से आया या आपने रातों रात कमा लिए।

पंजाब केसरी के मालिक का हाल देखिए, मोदी के सामने हाथ बांधे डरते कांपते खड़े हैं!

ये हैं बीजेपी के सांसद और पंजाब केसरी अखबार के मालिक. क्या हाल है बिकी हुई मीडिया का, खुद ही देखिये.  जब अख़बारों / चैनलों के मालिक / संपादक लोग अपनी पूरी उर्जा लोकसभा / राज्यसभा की सीट और पद्मभूषण आदि के लिये खर्च करते हुए इस चित्र में दिखाई मुद्रा में जा पहुंचें हों तब मीडिया को लोकतंत्र का चौथा खम्भा कैसे माना जा सकता है? ये तो सत्ता के चारणों की मुद्रा है.

महंगाई के मोर्चे पर मोदी का झूठ उन्हें दीमक की तरह खत्म कर देगा

Dayanand Pandey : एक बात तो है कि मोदी विरोधियों का विरोध अब पूरी तरह मिमियाहट में बदल गया है। ऐसे जैसे विरोधियों के पास मुंह ही नहीं रह गया हो। रस्मी रायता की भी आख़िर एक मियाद होती है । एक बात और मोदी यह कतई गलत नहीं कह रहे कि कुछ लोगों के लिए बुरे दिन आ गए हैं। घोटाले में आकंठ डूबी कांग्रेस से अब सेक्यूलरिज्म की लफ्फाज़ी वाली कागज़ी तलवार भी कहीं गुम हो गई है। बाक़ी तो सब ठीक है पर मंहगाई के मोर्चे पर मोदी का झूठ उन्हें दीमक की तरह खत्म कर देगा, यह मोदी को अपनी तमाम बाजीगिरी के बावजूद जान ही लेना चाहिए।

मोदी और केजरी : आइए, दो नए नेताओं के शीघ्र पतन पर मातम मनाएं…

Yashwant Singh : यथास्थितिवाद और कदाचार से उबी जनता ने दो नए लोगों को गद्दी पर बिठाया, मोदी को देश दिया और केजरीवाल को दिल्ली राज्य. दोनों ने निराश किया. दोनों बेहद बौने साबित हुए. दोनों परम अहंकारी निकले. पूंजीपति यानि देश के असल शासक जो पर्दे के पीछे से राज करते हैं, टटोलते रहते हैं ऐसे लोग जिनमें छिछोरी नारेबाजी और अवसरवादी किस्म की क्रांतिकारिता भरी बसी हो, उन्हें प्रोजेक्ट करते हैं, उन्हें जनता के गुस्से को शांत कराने के लिए बतौर समाधान पेश करते हैं. लेकिन होता वही है जो वे चाहते हैं.

नसीबलाल, पेट्रोल मूल्यवृद्धि, विकसवा, काशी, संघ, शक्ति प्रदर्शन और जॉम (देखें वीडियो)

Yashwant Singh : पिछले दिनों मैं बनारस गया हुआ था तो दिल्ली वापसी के वास्ते ट्रेन पकड़ने के लिए एक मित्र की बाइक पर सवार होकर स्टेशन की तरफ जा रहा था. भेलूपुर और रथयात्रा चौराहे के बीच पहुंचा तो देखा कि अचानक सड़क पर जाम लगने लगा है. थोड़ा आगे बढ़ने पर पता चला कि तंग गलियों-पतली सड़कों के लिए कुख्यात बनारस की इस मुख्य सड़क के दाहिने हिस्से पर संघियों का कब्जा हो चुका था. यूं लंबा रेला था. लाठी कंधे पर रखे संघी कार्यकर्ता पथ संचलन या पद संचलन, जो भी होता हो, कर रहे थे. लंबी लाइन और यूं सड़क कब्जा कर शक्ति प्रदर्शन करते देखकर अचानक मेरे मुंह से निकल गया- वाह… क्या बात है, ग़ज़ब. अगर दिल्ली या किसी शहर में किसान मजूर अपनी बात रखने के लिए प्रदर्शन करने आते हैं और सड़क जाम हो जाता है तो यही संघी कहते फिरते हैं कि ऐसे जनजीवन ठप कर देना ठीक नहीं होता, कितनी परेशानी होती है सबको, कोई बीमार व्यक्ति जाम में फंस जाएगा तो क्या करेगा.. ब्ला ब्ला ब्ला.

यशवंत सिंह

फेकू मोदी का एक नया झूठ सोशल मीडिया पर हुआ वायरल…

पीएम नरेंद्र मोदी का एक नया झूठ सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. उन्होंने कहा हुआ है कि सीमेंट की एक बोरी 120 रुपये में मिल रही है. एबीपी न्यूज द्वारा चलाई गई ऐसी खबर का स्क्रीनशाट लगाकर लोग लिख रहे हैं कि अब मोदी जी ही बता दें कि वो दुकान कहां है जहां पर इतने सस्ते रेट पर सीमेंट की बोरी मिल रही है.

शॉल पर नमो नाम मामले में फ्रेंच कंपनी की सफाई के बाद पत्रकार सागरिका घोष ने माफी मांगी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पेरिस यात्रा के दौरान जिस शाल को ओढ़ा था उस पर उनका नाम प्रिंट है. चर्चा है कि यह शाल फ्रेंच की प्रसिद्ध कंपनी लुई वितां ने बनाया है. इसके पहले मोदी का सूट विवादों में आया था जिस पर उनका नाम लिखा था. उन्होंने वह सूट अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा के दौरान पहना था. सोशल मीडिया पर नरेन्द्र मोदी के नाम लिखी शाल को लेकर चर्चा छिड़ी हुई है. मीडिया ने भी शाल के मुद्दे को प्रमुखता के साथ उछालना शुरू कर दिया है.

मोदी जी, आम आदमी के साथ इत्ता बड़ा “ब्लंडर” तो AAP वालों ने भी नही किया था जैसे आप कर रहे हो..

परम आदरणीय मोदी जी..

प्रणाम

ये आपको क्या हो गया है…

चुनाव के पहले और चुनाव के बाद आपकी स्थिति तो सस्ते अखबार में आने वाले
“शादी के पहले और शादी के बाद”
वाले विज्ञापन जैसी हो गयी है..

केजरीवाल पर संपादक ओम थानवी और नरेंद्र मोदी पर पत्रकार दयानंद पांडेय भड़के

Om Thanvi : लोकपाल को वह क्या नाम दिया था अरविन्द केजरीवाल ने? जी, जी – जोकपाल! और जोकपाल पैदा नहीं होते, अपने ही हाथों बना दिए जाते हैं। मुबारक बंधु, आपके सबसे बड़े अभियान की यह सबसे टुच्ची सफलता। अगर आपसी अविश्वास इतने भीतर मैल की तरह जम गया है तो मेल-जोल की कोई राह निकल आएगी यह सोचना मुझ जैसे सठियाते खैरख्वाहों की अब खुशफहमी भर रह गई है। ‘साले’, ‘कमीने’ और पिछवाड़े की ‘लात’ के पात्र पार्टी के संस्थापक लोग ही? प्रो आनंद कुमार तक? षड्यंत्र के आरोपों में सच्चाई कितनी है, मुझे नहीं पता – पर यह रवैया केजरीवाल को धैर्यहीन और आत्मकेंद्रित जाहिर करता है, कुछ कान का कच्चा भी।

पलटीमार मोदी सरकार : करप्शन घपले घोटाले की गुमनाम शिकायतों की जांच नहीं की जाएगी

ये लीजिए…. मोदी सरकार की एक और पलटी. दरअसल, पलटी तो महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने मारी है, लेकिन अगर तकनीकी तौर पर मुखिया यानी मुख्यमंत्री को साइड कर दें तो सरकार एक तरह से मोदी की ही है और उन्हीं के नाम पर चुन कर आई है. उन्हीं का चेहरा देखकर राज्य के लोगों ने भाजपा को वोट दिया था. इसलिए इस पलटी को मोदी की पलटी कहना गलत नहीं होगा. मोदी ने लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान चीख-चीख कर कहा था कि उनकी सरकार आई, तो भ्रष्टाचार की गुमनाम शिकायतों पर भी कार्रवाई की जाएगी.

भारत को अपना 21वीं सदी का सबसे बड़ा झुट्ठा और सबसे बड़ा झूठ मिल गया है!

Yashwant Singh :  भारत को अपना 21वीं सदी का सबसे बड़ा झुट्ठा मिल गया है. वह हैं माननीय नरेंद्र मोदी. जाहिर है, जब झुट्ठा मिल गया तो सबसे बड़ा झूठ भी खोज निकाला गया है. वह है- ‘अच्छे दिन आएंगे’ का नारा. नरेंद्र आम बजट में चंदा देने वाले खास लोगों को दी गयी 5% टैक्स की छूट… इसकी भरपाई वोट देने वाले आम लोगों से 2% सर्विस टैक्स बढा कर की जाएगी.. मोदी सरकार पर यूं ही नहीं लग रहा गरीब विरोधी और कारपोरेट परस्त होने के आरोप. खुद मोदी के कुकर्मों ने यह साबित किया है कि उनकी दशा-दिशा क्या है. इन तुलनात्मक आंकड़ों को कैसे झूठा करार दोगे भक्तों… अगर अब भी मोदी भक्ति से मोहभंग न हुआ तो समझ लो तुम्हारा एंटीना गड़बड़ है और तुम फिजूल के हिंदू मुस्लिम के चक्कर में मोदी भक्त बने हुए हो. तुम्हारी ये धर्मांधता जब तुम्हारे ही घर के चूल्हे एक दिन बुझा देगी शायद तब तुम्हें समझ में आए. कांग्रेस की मनमोहन सरकार से भी गई गुजरी मोदी सरकार के खिलाफ हल्ला बोलने का वक्त आ गया है… असल में संघ और भाजपा असल में हिंदुत्व की आड़ में धनिकों प्रभुओं एलीटों पूंजीपतियों कार्पोरेट्स कंपनियों मुनाफाखोरों की ही पार्टी है। धर्म से इनका इतना भर मतलब है कि जनता को अल्पसंख्यक बहुसंख्यक में बाँट कर इलेक्शन में बहुमत भर सीट्स हासिल कर सकें। दवा से लेकर मोबाइल इंटरनेट घर यात्रा तक महंगा कर देना कहाँ के अच्छे दिन हैं मोदी जी। कुछ तो अपने भासड़ों वादों का लिहाज करो मोदी जी। आप तो मनमोहन सोनिया राहुल से भी चिरकुट निकले मोदी जी।

प्रधानमंत्री मोदी भूमि अधिग्रहण मामले में रणनीतिक चूक के शिकार हुए

भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने आते ही जिस तरह भूमि अधिग्रहण को लेकर एक अध्यादेश प्रस्तुत कर स्वयं को विवादों में डाल दिया है, वह बात चौंकाने वाली है। यहां तक कि भाजपा और संघ परिवार के तमाम संगठन भी इस बात को समझ पाने में असफल हैं कि जिस कानून को लम्बी चर्चा और विवादों के बाद सबकी सहमति से 2013 में पास किया गया, उस पर बिना किसी संवाद के एक नया अध्यादेश और फिर कानून लाने की जरूरत क्या थी? इस पूरे प्रसंग में साफ दिखता है कि केन्द्र सरकार के अलावा कोई भी पक्ष इस विधेयक के साथ नहीं है।

मोदी राज का सच : अडाणी का मुनाफा छह गुना और वोडाफोन पर सरकारी खजाने का 3000 करोड़ रुपये उड़ा

Navin Kumar : इस तिमाही में अडाणी का मुनाफा छह गुना हो जाना, वोडाफोन पर सरकारी खजाने का 3 हजार करोड़ रुपया उड़ा दिया जाना और परधान जी के नौलखे कोट के बीच क्या कोई रिश्ता है? गौर कीजिएगा जेटली जी ने कहा है कि हमने भारत की गरीब जनता के 3 हजार करोड़ से जो वोडाफोन की आरती उतारी है उससे ‘निवेश’ का माहौल बेहतर होगा.. पूछना चाहता हूं कि नौलखा ‘कोट’ को निवेश मान सकते हैं कि नहीं?

जानिए, उन वजहों को जिसके कारण दिल्ली में किरण बेदी फैक्टर अरविंद केजरीवाल को बहुमत दिला रहा है

Yashwant Singh : भाजपाई दिल्ली में गड़बड़ा गए हैं. जैसे भांग खाए लोगों की हालत होती है, वही हो चुकी है. समझ नहीं पा रहे कि ऐसा करें क्या जिससे केजरीवाल का टेंपो पंचर हो जाए, हवा निकल जाए… रही सही कसर किरण बेदी को लाकर पूरा कर दिया.. बेचारी बेदी जितना बोल कह रही हैं, उतना भाजपा के उलटे जा रहा है… आखिरकार आलाकमान ने कह दिया है कि बेदी जी, गला खराब का बहाना करके चुनाव भर तक चुप्पी साध लो वरना आप तो नाश कर दोगी…

जशोदा बेन की खबर दिखाने वाले डीडी अफसर को मिली ‘कालापानी’ की सजा, अंडमान द्वीप हुआ तबादला

इस देश में प्रेस आजाद है, शर्त बस यह है कि आप दूरदर्शन में काम न करते हों. और हां, खबर जशोदा बेन के बारे में न हो. अगर ये दोनों संयोग मिल जाएं तो फिर कोई गारंटी नहीं है. आपको पलक झपकते ‘कालापानी’ भेज दिया जाए तो भी कोई बड़ी बात नहीं. अहमदाबाद में तैनात दूरदर्शन अधिकारियों ने यही बात समझने में थोड़ी देर कर दी. जशोदा बेन की खबर दिखाने का नतीजा एक डीडी अधिकारी के तत्काल तबादले के रूप में सामने आ गया. बाकी अधिकारी भी सफाई देने में जुटे हैं.

एक दूसरे के लिए “सरकार” हैं मोदी और भागवत!

संघ परिवार से जो गलती वाजपेयी सरकार के दौर में हुई, वह गलती मोदी सरकार के दौर में नहीं होगी। जिन आर्थिक नीतियो को लेकर वाजपेयी सरकार को कठघरे में खड़ा किया गया, उनसे कई कदम आगे मोदी सरकार बढ़ रही है लेकिन उसे कठघरे में खड़ा नहीं किया जायेगा। लेकिन मोदी सरकार का विरोध होगा। नीतियां राष्ट्रीय स्तर पर नहीं राज्य दर राज्य के तौर पर लागू होंगी। यानी सरकार और संघ परिवार के विरोधाभास को नियंत्रण करना ही आरएसएस का काम होगा। तो क्या मोदी सरकार के लिये संघ परिवार खुद को बदल रहा है। यह सवाल संघ के भीतर ही नहीं बीजेपी के भीतर के उन कार्यकर्ताओ का भी है, जिन्हें अभी तक लगता रहा कि आगे बढने का नियम सभी के लिये एक सरीखा होता है। एक तरफ संघ की विचारधारा दूसरी तरफ बीजेपी की राजनीतिक जीत और दोनों के बीच खड़े प्रधानमंत्री मोदी। और सवाल सिर्फ इतना कि राजनीतिक जीत जहां थमी वहां बीजेपी के भीतर के उबाल को थामेगा कौन। और जहां आर्थिक नीतियों ने संघ के संगठनों का जनाधार खत्म करना शुरु किया, वहां संघ की फिलासफी यानी “रबर को इतना मत खींचो की वह टूट जाये”, यह समझेगा कौन।

एनडीटीवी प्राइम टाइम में Ravish Kumar और अभय दुबे ने भाजपा प्रवक्ता नलिन कोहली को पूरी तरह घेर लिया

Shambhunath Shukla : एक अच्छा पत्रकार वही है जो नेता को अपने बोल-बचन से घेर ले। बेचारा नेता तर्क ही न दे पाए और हताशा में अंट-शंट बकने लगे। खासकर टीवी पत्रकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। बीस जनवरी को एनडीटीवी पर प्राइम टाइम में Ravish Kumar और अभय दुबे ने भाजपा प्रवक्ता नलिन कोहली को ऐसा घेरा कि उन्हें जवाब तक नहीं सूझ सका। अकेले कोहली ही नहीं कांग्रेस के प्रवक्ता जय प्रकाश अग्रवाल भी लडख़ड़ा गए। नौसिखुआ पत्रकारों को इन दिग्गजों से सीखना चाहिए कि कैसे टीवी पत्रकारिता की जाए और कैसे डिबेट में शामिल वरिष्ठ पत्रकार संचालन कर रहे पत्रकार के साथ सही और तार्किक मुद्दे पर एकजुटता दिखाएं। पत्रकार इसी समाज का हिस्सा है। राजनीति, अर्थनीति और समाजनीति उसे भी प्रभावित करेगी। निष्पक्ष तो कोई बेजान चीज ही हो सकती है। मगर एक चेतन प्राणी को पक्षकार तो बनना ही पड़ेगा। अब देखना यह है कि यह पक्षधरता किसके साथ है। जो पत्रकार जनता के साथ हैं, वे निश्चय ही सम्मान के काबिल हैं।

किसान मर रहे हैं, मोदी सपने दिखाते जा रहे हैं, मीडिया के पास सत्ता की दलाली से फुर्सत नहीं

Deepak Singh :  प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री बनने के बाद कौन सुध लेता हैं किसानों की? महाराष्ट्र में और केंद्र में दोनों जगह भाजपा की सरकार पर हालत जस के तस। यह हाल तब हैं जब नरेंद्र मोदी को किसानों का मसीहा बता कर प्रचार किया गया। आखिर क्यों नई सरकार जो दावा कर रही हैं की दुनिया में देश का डंका बज रहा हैं पर उस डंके की गूंज गाँव में बैठे और कर्ज के तले दबे गरीब और हताश किसान तक नहीं पहुँच पाई? क्यों यह किसान आत्महत्या करने से पहले अपनी राज्य सरकार और केंद्र सरकार पर भरोसा नहीं कर पाया की सरकार आगे आएगी और कुछ मदद करेगी?

मोदी रैली : दिल्ली में भाजपा को 22 से 24 सीटें मिल जाएं तो बहुत है

Anil Singh : झूठ में पीएचडी तुम्हारी तो नसीहत किसको! महामना मोदी जी ने रामलीला मैदान की रैली में कहा कि वे देश में पहली बार बिजली में सर्विस प्रोवाइडर चुनने का विकल्प देने जा रहे हैं। लेकिन प्रधानमंत्री जी, यह सुविधा तो मुंबई में पिछले कई सालों से उपलब्ध हैं। खुद मैंने उसी फ्लैट में रहते हुए रिलायंस इंफ्रा को छोड़कर सवा साल पहले टाटा पावर की सेवा ली है। आपने कहा कि जनधन योजना में पहली बार गरीबों के बैंक खाते खोले गए। महोदय, आपको इतना तो पता ही होगा कि वर्तमान राष्ट्रपति और तब के वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने 10 फरवरी 2011 को स्वाभिमान योजना के तहत वित्तीय समावेशन कार्यक्रम की घोषणा की थी, जिसका नाम अब आपने बदलकर जनधन योजना कर दिया है।

गुजरात मॉडल : करो जितना भी, नगाड़ा बजाओ जमकर

Anil Singh : यूपी व बंगाल में भी गुजरात मॉडल! गुजरात मॉडल का ‘चमत्कार’ दूसरे राज्यों की सरकारों को भी समझ में आ गया है तो वे भी इसे अपनाने लगी है। खासकर हाल में ही पश्चिम बंगाल की ममता सरकार और अब उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार ने इसे अपना लिया है। असल में कुछ दिनों पहले गुजरात सरकार के एक रसूखदार आला अफसर से मुंबई में मुलाकात हो गई तो कई घंटे की अंतरंग बातचीत से पता चला कि गुजरात का मॉडल यह है कि करो जितना भी, नगाड़ा बजाओ जमकर।

मोदी जी, आप देश के प्रधानमंत्री हैं, दिल्ली के लिए कोई और देखिए

Sanjaya Kumar Singh : दिल्ली में सत्ता पाने के लिए भारतीय जनता पार्टी 24 घंटे बिजली, गरीबों को घर, झुग्गी-झोपड़ी खत्म करना, अवैध कॉलोनी को नियमित करने जैसी सुविधाओं का चारा फेंक रही है। दिल्ली में वैसे भी प्रति व्यक्ति आय देश के कई शहरों के मुकाबले ज्यादा है। स्कूल, अस्पताल, गैस कनेक्शन जैसी सुविधाएं तो हैं ही।

पेट्रोल खोर मोदी : पेट्रो प्रोडेक्ट्स प्राइस के मामले में जनता को बुरी तरह ठग रही है केंद्र सरकार

नरेंद्र मोदी : कब तक टोपी पहनाएंगे जनता को?


कच्चे तेल की कीमत ने जिस तरह से 50 डॉलर तक गोता लगाया है, उसके बाद तो अपने देश में पेट्रोल की कीमत बहुत कम यानी ज्यादा से ज्यादा 25 रुपए सभी करों सहित होनी चाहिए, लेकिन केंद्र सरकार ऐसा न करके जनता को ठगने का काम कर रही है। आज कच्चे तेल की कीमत उस स्तर पर पहुंच गई है जहां छह साल पहले थी। हम याद करें केंद्र में मोदी सरकार के आने से पहले का वह वक्त जब देश में पेट्र्रोल की कीमत 78 रुपए के आस-पास थी। उस समय कच्चे तेल की कीमत 165 डालर प्रति बैरल थी।

मोदी नाखुश, सुषमा कैंप पर आरोप- मीडिया तक पहुंचाया नये विदेश सचिव की नियुक्ति का मामला !!!

भारत की सत्ता के साउथ ब्लाक में कानाफूसी है कि मोदी अपनी विदेश मंत्री सुषमा से नाराज़ है. उनकी नाराजगी नये विदेश सचिव की नियुक्ति पर उठे सवालों को मीडिया तक पहुंचाने पर है. मोदी और उनके सलाहकार चाहते हैं कि विदेश सचिव के पद पर सुब्रहमण्यम जयशंकर को नियुक्त किया जाये.

पूंजीपतियों की पक्षधरता के मामले में कांग्रेसी ममो के बाप निकले भाजपाई नमो!

: इसीलिए संघ और सरकार ने मिलजुल कर खेला है आक्रामक धर्म और कड़े आर्थिक सुधार का खेल : जनविरोधी और पूंजीपतियों की पक्षधर आर्थिक नीतियों को तेजी से लागू कराने के लिए धर्म पर बहस को केंद्रित कराने की रणनीति ताकि जनता इसी में उलझ कर रह जाए : सुधार की रफ्तार मनमोहन सरकार से कही ज्यादा तेज है। संघ के तेवर वाजपेयी सरकार के दौर से कहीं ज्यादा तीखे है । तो क्या मोदी सरकार के दौर में दोनों रास्ते एक दूसरे को साध रहे हैं या फिर पूर्ण सत्ता का सुख एक दूसरे को इसका एहसास करा रहा है कि पहले उसका विस्तार हो जाये फिर एक दूसरे को देख लेंगे।

ABP न्यूज ने ‘तर्क’ से जिताया मोदी को

पाठकों की राय को दरकिनार कर ABP न्यूज ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को साल 2014 का व्यक्ति विशेष बना डाला। ABP न्यूज ने अपनी वेबसाइट ABP live पर साल 2014 के व्यक्ति विशेष का पोल करवाया। इस पोल में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुरी तरह पछाड़ दिया। मगर, ABP न्यूज ने निम्न तर्क देते हुए अरविंद केजरीवाल को हरा दिया।