इंटरनेशनल मीडिया फाउंडेशन की आड़ में चल रहा वेश्यावृत्ति का धंधा!

पत्रकार और पत्रकारिता दोनों ही शब्द विश्वसनीयता का प्रतीक हैं मगर कुछ फर्जी संस्थान इसकी आड़ में गन्दा खेल चला रहे हैं। सोशल नेटवर्किंग साइट में इंटरनेशनल मीडिया फाउंडेशन नामक संगठन की आड़ लेकर कुछ लोग लड़कियों-महिलाओं को फंसाने का कुकृत्य कर रहे हैं। एक युवती ने इस बाबत शिकायत की है और सबूत सहित बताया है कि इंटरनेशन मीडिया फाउंडेशन नामक संस्था, जो कि शायद ग्रेटर नोएडा से संचालित होता है, की आड़ लेकर उसे एक शख्स ने प्ले ब्वॉय से दोस्ती कराने का आफर दिया। उस संवाद के सभी सबूत नीचे दिए जा रहे हैं। संवाद के कुछ अंश इस देखिए…

युवती ..hi

इंटरनेशन मीडिया फाउंडेशन :हेल्लो कैसे हो

युवती.. हम अच्छे हैं और आप?

इंटरनेशन मीडिया फाउंडेशन.. क्या नाम है आपका।

युवती …(नाम गुप्त रखा गया हैं।)

इंटरनेशन मीडिया फाउंडेशन: क्या करते हो आप और कहा रहते हो?

युवती …थोड़ी बहुत समाज सेवा और दिल्ली रहती हूँ।

इंटरनेशन मीडिया फाउंडेशन:गुड वर्क. हम प्लेब्वाय सर्विस चलाते हैं महिलाओं के लिए।

युवती …क्या.. समझी नहीं मैं?

इंटरनेशन मीडिया फाउंडेशन.. हमारा नाम केशव है, ग्रेटर नोएडा से हूँ. हम लोग तलाकशुदा और विधवाओं की मदद करते हैं।

युवती ..क्या आप शादी कराते हैं उनकी?

इंटरनेशन मीडिया फाउंडेशन…नहीं महिलाओं की पुरुषों से दोस्ती कराते हैं फिर उनकी डेटिंग का भी जुगाड़ करते हैं।

ये था बातचीत के कुछ अंश. पत्रकारिता और मीडिया जैसे पवित्र शब्द को गन्दा कर रहे इंटरनेशनल मीडिया फाउंडेशन जैसे संगठनों का समाज से बहिष्कार करना पड़ेगा वरना यह पूरे देश में पत्रकारिता शब्द को गन्दा कर देंगे।

लेखक नवीन द्विवेदी शिप्रा दर्पण अखबार के संपादक हैं. उनसे संपर्क naveendwivedi.pimr@gmail.com के जरिए किया जा सकता है.

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दैनिक जागरण आफिस में भड़ास4मीडिया डॉट कॉम पढ़ना मना है!

अभिव्यक्ति की आजादी का झूठा ढिंढोरा पीटता है दैनिक जागरण… मीडिया वालों की खबर देने वाले पोर्टल भड़ास4मीडिया पर लगा रखा है प्रतिबंध… बड़े-बड़े लेखों और मंचों के जरिए दैनिक जागरण के संपादक-मालिक लोग हमेशा से आवाज उठाते रहते हैं कि अभिव्यक्ति की आजादी पर कोई पाबंदी नहीं होनी चाहिए. ये लोग अपने मीडिया कर्मचारियों को भी नसीहत देते हैं कि तथ्य के साथ बातों को रखा जाए, लोकतंत्र में हर खंभे को सम्मान दिया जाए. लेकिन वास्तविकता कुछ और भी है. आज उस समय बहुत बुरा फील हुआ जब पत्रकारिता जगत की खबर देने वाले पोर्टल भड़ास4मीडिया के बारे में पता चला कि इस पर दैनिक जागरण के राष्ट्रीय ऑफिस में पूर्णत प्रतिबंधित लगाया हुआ है.

पत्रकारों के सुख-दुख की खबरों को देने वाले और मीडियाकर्मियों के हित की आवाज उठाने वाले भड़ास4मीडिया की आवाज को कुचलने का प्रयास अखबार मालिक हमेशा से करते आये हैं मगर अखबार मालिक ये क्यों नही जानते कि सभी पत्रकारों के पास आज कल टच स्क्रीन वाला मल्टी मीडिया फोन है, स्मार्ट फोन है, घर में लैपटाप है. आपने ऑफिस में भले ही भड़ास पर पाबंदी लगा दी है लेकिन पढ़ने वाला तो अपने मोबाइल में भी पढ़ लेगा.

लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ से जुड़े सभी लोगों को हर पहलू पर अपनी बात कहने का अधिकार होता है. स्वस्थ वातावरण का निर्माण तभी सम्भव है जब सबकी बात सुनी जाए. अगर बात संवैधानिक रूप से रखी जा रही है तो उसे सबको सुनना चाहिए. मगर यह पूर्णत: गलत है कि आप समाज में नारा तो लगाओ कि सभी को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है लेकिन सामने वाले की आवाज को चुपचाप कुचल दो.. शायद इसे ही बोलते हैं मुंह में राम बगल में छूरी…. भड़ास4मीडिया पर से दैनिक जागरण प्रबंधन को पाबंदी हटानी चाहिए और उसे कोशिश करनी चाहिए कि वह अपने मीडियाकर्मियों को सभी कानूनी लाभ दे.

लेखक नवीन द्विवेदी गाजियाबाद के अखबार शिप्रा दर्पण के संपादक हैं. उनसे संपर्क 9910091121 या naveendwivedi.pimr@gmail.com के जरिए किया जा सकता है.

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