भोजपुरी में नए सिनेमा के दरवाजे खोलती एक फिल्म ‘नया पता’

वाराणसी : अक्सर यही होता है, बड़े शहरों, महानगरों में काम के बहाने टिके रहने के बाद जब हम अपने घर, अपनी जमीन पर अपने होने का एहसास तलाशने के लिए लौटते हैं, तो मिलने वाले हर एक के जुबान पर यही सवाल होता है, कब जायेका बा। इसी दर्द को बयां करती है, मेरी फिल्म ‘नया पता’।