वो चार कारण जिसके चलते हिंदी वेब मीडिया अपनी चमक खो रहा है…

हिंदी न्यूज वेब मीडिया का बिजनेस जिस एनर्जी के साथ आगे बढ़ रहा था, वह फिलहाल मुझे कम होता दिख रहा है। इस इंडस्ट्री में मेरी शुरुआत 2012 के जनवरी में हुई थी और 2015 के मार्च में मैंने इंडस्ट्री छोड़ दी। इन तीन सालों में कभी ऐसा नहीं लगा कि हिंदी न्यूज वेब का बिजनेस मंदा होगा। ऐसा लग रहा था कि इसमें ही पत्रकारिता और पत्रकारों का भविष्य है। लेकिन 2015 के आखिरी महीनों में मामला उल्टा नजर आ रहा है। मैंने यह जानने की कोशिश की आखिर क्यों मुझे लग रहा है कि हिंदी वेब मीडिया अपनी चमक खो रहा है। कुछ वजह नजर आए –

टाइम्स आफ इंडिया में खबर दब सकती है लेकिन फेसबुक पर नही : दीपक शर्मा

Deepak Sharma : टाइम्स ऑफ़ इंडिया देश का सबसे रसूखदार अख़बार है. इसके मालिक की हैसियत मोदी जैसी नही तो मोदी से कम भी नही. टाइम्स के देश में 7.20 करोड़ पाठक है. टाइम्स की एक प्रति का दिल्ली में मूल्य 4.50 रूपए है. एक पाठक के तौर पर आपकी हैसियत टाइम्स में वैसी ही है जो किसी दूकान से कोई सामान खरीदते वक़्त किसी की होती है. यानी आप एक ग्राहक है.