रवीश कुमार, ओम थानवी और वीरेंद्र यादव ने फेसबुक को अलविदा कहा!

Shambhunath Shukla : नया साल सोशल मीडिया के सबसे बड़े मंच फेस बुक के लिए लगता है अच्छा नहीं रहेगा। कई हस्तियां यहाँ से विदा ले रही हैं। दक्षिणपंथी उदारवादी पत्रकारों-लेखकों से लेकर वाम मार्गी बौद्धिकों तक। यह दुखद है। सत्ता पर जब कट्टर दक्षिणपंथी ताकतों की दखल बढ़ रही हो तब उदारवादी दक्षिणपंथियों और वामपंथियों का मिलकर सत्ता की कट्टर नीतियों से लड़ना जरूरी होता है। अगर ऐसे दिग्गज अपनी निजी व्यस्तताओं के चलते फेस बुक जैसे सहज उपलब्ध सामाजिक मंच से दूरी बनाने लगें तो मानना चाहिए कि या तो ये अपने सामाजिक सरोकारों से दूर हो रहे हैं अथवा कट्टरपंथियों से लड़ने की अपनी धार ये खो चुके हैं। इस सन्दर्भ में नए साल का आगाज़ अच्छा नहीं रहा। खैर 2015 में हमें फेस बुक में खूब सक्रिय साथियों- रवीश कुमार, ओम थानवी और वीरेंद्र यादव की कमी खलेगी।

दूरदर्शन ने फिर से ओम थानवी को बुलाना शुरू कर दिया

Om Thanvi : मुद्दत बाद आज दूरदर्शन के कार्यक्रम में गया। चुनाव के नतीजों पर चर्चा थी। बीच में पहले भी कई बार बुलावा आया, पर मना करता रहा। आज तो और चैनलों पर भी जाना था। फिर भी अधिक इसरार पर हो आया। जाकर कहा तो वही जो सोचता हूँ! बहरहाल, पता चला कि कोई सरकारी निर्णय बुलाने न-बुलाने को लेकर नहीं रहा, कोई अधिकारी समाचार प्रभाग में आईं जो अपने किसी लाभ के लिए नई सरकार को इस तरह खुश करने की जुगत में थीं कि भाजपा या नरेंद्र मोदी के आलोचकों को वहां न फटकने दें!

ओम थानवी ने रायपुर साहित्‍य महोत्‍सव में कुछ लेखकों के जाने को डिफेंड किया!

Abhishek Srivastava : {”जो बुद्धिजीवी रायपुर में लेखकों के जाने भर को मुद्दा बना रहे हैं, क्या वे बुद्धिजगत में एक किस्म का खापवाद प्रतिपादित नहीं कर रहे?” – Om Thanvi} …आइए, ज़रा जांचते हैं कि साहित्‍य में खाप कैसे बनता है। आज ओम थानवी ने रायपुर साहित्‍य महोत्‍सव में कुछ लेखकों के जाने को डिफेंड करते हुए एक स्‍टेटस लिखा। इसे Maitreyi Pushpa और Purushottam Agrawal समेत कुछ लोगों ने साझा किया। यह मोर्चे की पहली पोजीशन है। मोर्चे की दूसरी सीमा पर डटे Vineet Kumar और Prabhat Ranjan ने महोत्‍सव की तस्‍वीर और भाषण पोस्‍ट किए। यह प्रचार मूल्‍य है। मोर्चे की तीसरी पोजीशन जनसत्‍ता में खोली गई जहां Ashok Vajpeyi ने महोत्‍सव में लेखकों को मिली आज़ादी पर एक निरपेक्ष सी दिखने वाली टिप्‍पणी ‘कभी-कभार’ में की। यह नेतृत्‍व की पोजीशन है, बिलकुल निरपेक्ष और धवलकेशी।

गैंग रेप के आरोपी निहालचंद को मोदी ने मंत्रिपद पर कायम रखकर क्या संदेश दिया है?

Om Thanvi : नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल फैलाव में स्वागतयोग्य बातें हैं: पर्रीकर और सुरेश प्रभु जैसे काबिल लोग शामिल किए गए हैं। बीरेंद्र सिंह, जयप्रकाश नड्डा, राजीवप्रताप रूडी और राज्यवर्धन सिंह भी अच्छे नाम हैं। सदानंद गौड़ा से रेलगाड़ी छीनकर उचित ही सुरेश प्रभु को दे दी गई है। लेकिन स्मृति ईरानी का विभाग उनके पास कायम है। गैंग रेप के आरोपी निहालचंद भी मंत्रिपद पर काबिज हैं। अल्पसंख्यकों को लेकर प्रधानमंत्री की गाँठ कुछ खुली है, मगर मामूली; मुख़्तार अब्बास नक़वी को महज राज्यमंत्री बनाया है। वे वाजपेयी मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री रह चुके हैं, जैसे रूडी भी।

मरने के बाद कोई किसी को नहीं पूछता, सब ताकत के पुजारी हैं, यही जग की रीत है

Vimal Kumar : जब अर्जुन सिंह जिन्दा थे तो लेखक और पत्रकार उनके आगे पीछे घूमा करते थे लेकिन उनके मरने के बाद उनके नाम पर शुरू पुरस्कार समारोह में अब कोई नहीं झांकता. पिछले साल भी इस समारोह में कम लोग थे. इस बार तो और कम लोग. अज्ञेय जी के निधन के बाद में यही हुआ. अज्ञेय जी जब जीवित थे तो उनका जलवा था. लेकिन मरने के बाद सब भूल गए.

कैग का कहना है कि कांग्रेस सरकार की मदद से वाड्रा ने एक झटके में 44 करोड़ कूट लिए

Om Thanvi : देश के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) का कहना है कि कांग्रेस सरकार की मदद से रॉबर्ट वाड्रा ने एक झटके में ४४ करोड़ कूट लिए। गौर करें कि मोदी और भाजपा तो खुद वाड्रा के खिलाफ अभियान चलाते आए हैं। फिर भी कुछ होता क्यों नहीं?

बीएचयू में संघ की शाखा और मुसलमानों के प्रति नफरत के बीज

Om Thanvi : प्रो. तुलसीराम की आत्मकथा के दूसरे भाग ‘मणिकर्णिका’ की बात मैंने परसों की थी। उस किताब में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के दिनों का एक प्रसंग इस तरह हैः

अर्णब गोस्वामी ने रॉबर्ट वाड्रा की खाट खड़ी कर दी : ओम थानवी

Om Thanvi : अर्णब गोस्वामी ने रॉबर्ट वाड्रा की खाट खड़ी कर दी। भले ही अपने खड़काऊ अंदाज में। पहले भी खेमका के मामले को टाइम्स नाउ ने पर्याप्त अहमियत दी थी। लेकिन बाकी चैनल क्या कर रहे हैं? चलताऊ खबर की तरह चलाया और छोड़ दिया। अब तो सोनिया (के सिंह) का राज भी नहीं? और नरेंद्र मोदी को भी रॉबर्ट वाड्रा का मुद्दा उठाते हुए कुछ संकोच करना चाहिए।

मोदी की अदभुत चतुराई, ताकि जनता भूल जाए महंगाई

Om Thanvi :  छोड़िए। मैं मोदीजी पर कुछ नहीं बोल रहा। एनडीटीवी के संजीदा पत्रकार Umashankar Singh की एक अहम जानकारी वाली पोस्ट महज साझा कर रहा हूँ। इसका संपादित अंश जनसत्ता अखबार में प्रकाशित है। जनसत्ता अखबार के संपादक ओम थानवी के फेसबुक वॉल से.

वाशिंगटन पहुंचकर अपनी मूर्खता का प्रदर्शन करने में जुट गए हैं भारतीय चैनल

Om Thanvi : कई दिन बाद बरबस टीवी खोला। भारतीय चैनल वाशिंगटन जा पहुंचे हैं और मजेदार ‘रिपोर्टिंग’ हो रही है। देखा कि एक प्रमुख हिंदी चैनल के संवाददाता ने भारतीय मूल के मुसलिम रईस को पकड़ रखा है। वह अंग्रेजी बोल रहा है, संवाददाता हिंदी। रईस कहता है, मि. मोदी ने यह कहकर मेरा दिल जीत लिया कि भारत के मुसलमान देश के लिए जीने-मरने को तैयार हैं।

कुछ उत्साही पत्रकार विदेश मंत्रालय के तालमेल के बगैर, अपने चैनल के खर्च पर, जापान पहुँच गए हैं

Om Thanvi : एक टीवी चैनल पर अभी लिखा पढ़ा: “मोदी बनाएंगे भारत को जापान”। अब तक तो बस वह खबर थी कि काशी को क्योतो की सीख से आधुनिक ‘स्मार्ट सिटी’ बनाया जाएगा। मोदी ने चुनाव में सौ ऐसे ‘स्मार्ट’ नगर बनाने का वादा किया था। क्योतो से सिलसिला शुरू हुआ और साथ ही हो गया पूरे भारत के जापान बनने का आगाज? इससे हास्यास्पद कल्पना क्या हो सकती है!

अलविदा बिपिन चन्द्रा, अलविदा बलराज पुरी.

Samar Anarya : अलविदा बिपिन चन्द्रा, अलविदा बलराज पुरी. अब भी याद है कि इलाहाबाद में साइकोलॉजी में एमए पूरा कर लेने के बाद सामने मौजूद दो विकल्पों में से एक चुनना कितना मुश्किल था. एक तो क्लिनिकल साइकोलॉजी जो इलाहाबाद शहर के बाद अपनी दूसरी माशूक थी तो एक तरफ वो इंकलाबी जज्बा जिसे क्रान्ति हुई ही दिखती थी.

मोदी राज आने के बाद ओम थानवी को परिचर्चा के लिए नहीं बुलाता दूरदर्शन

ओम थानवी प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक जनसत्ता के संपादक हैं. बेहद तार्किक और जनपक्षधर पत्रकार माने जाते हैं. सत्ता की भाषा के खिलाफ जनता की भाषा कहने बताने लिखने के लिए जाने जाते हैं. वे अक्सर कई टीवी चैनलों पर परिचर्चाओं में दिख जाते हैं. उनके विरोधी भी उनकी तार्किकता और तथ्यपरकता के कायल हैं. पर जबसे मोदी सरकार केंद्र में आई है तभी से ओम थानवी को सरकारी टीवी चैनल दूरदर्शन ने ब्लैकलिस्टेड कर दिया है. ओम थानवी ने खुद इसका खुलासा अपने फेसबुक वॉल पर किया है. पढ़िए, वे क्या लिखते हैं…

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लालकिले से कई अच्छी बातें करने-कहने वाले नरेंद्र मोदी रोजमर्रा की महंगाई की मार क्यों भुला गए : ओम थानवी

Om Thanvi : प्रधानमंत्री ने भाषण पढ़ा नहीं, नोट्स के आधार पर सीधे बोले यह अच्छा लगा। गोली-निरोधक शीशे की आड़ भी हटा दी, बच्चों से भी जाकर मिले। बेटियों के प्रति संवेदनशील नजरिया, गाँव-किसान, गरीबी, सफाई, सुशासन की बातें भी मुझे अच्छी लगीं। यह भी अच्छा किया कि राममंदिर निर्माण की बात नहीं की, न विवादग्रस्त अनुच्छेद 370 या समान नागरिक संहिताका राग छेड़ा। पाकिस्तान को भी नहीं ललकारा।