मीडिया में एक बड़े आंदोलन की जरूरत : अब न्यूज ही पेड नहीं हैं, अखबार और चैनल भी पेड हैं

ओम प्रकाश सिंह


मीडिया जिस मुकाम पर है, उसमें अब धमचक भी है, और आंतरिक विस्फोट भी जल्द होने वाले हैं। एक बड़े आंदोलन की जरूरत उठ खड़ी हुई है। जनसत्ता में पत्रकार रहे और अब एक बड़े लेखक श्री दयानंद पांडेय कहते हैं – मीडिया को कारपोरेट स्वार्थों, और भांड़ों और भड़ैतों ने घेर लिया है। जी हां, केवल भांड़ों और भड़ैतों ने ही नहीं, मिरासियों और बाई जी लोगों ने भी। जैसे नृत्य, संगीत आदि एक निश्चित किस्म के लोगों से घिर गये थे, वैसी ही हालत मीडिया की भी हो रही है।