हिंदुस्तान अखबार में ‘पेड एडिटोरियल’ : कथित अच्छे दिनों में पत्रकारिता के भयंकर बुरे दिन!

 

आज के दैनिक हिन्दुस्तान में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने एक लेख लिखा है। हिन्दी में उनके नाम के साथ छपा है। इस सूचना के साथ कि ये उनके अपने विचार हैं। एडिट पेज पर प्रकाशित इस लेख के साथ अमित शाह की जो फोटो लगी है वह छोटी है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भी फोटो लगाई गई है जो लेखक की फोटो से बड़ी है। वैसे ही जैसे मैं नैनीताल पर कुछ लिखूं तो मेरी फोटो रहे ना रहे, नैनी झील की फोटो बड़ी सी जरूर लगेगी। अगर मेरी तुलना गलत नहीं है तो फोटो छपना और उसका बड़ा छोटा होना भी गलत नहीं है।

मीडिया में एक बड़े आंदोलन की जरूरत : अब न्यूज ही पेड नहीं हैं, अखबार और चैनल भी पेड हैं

ओम प्रकाश सिंह


मीडिया जिस मुकाम पर है, उसमें अब धमचक भी है, और आंतरिक विस्फोट भी जल्द होने वाले हैं। एक बड़े आंदोलन की जरूरत उठ खड़ी हुई है। जनसत्ता में पत्रकार रहे और अब एक बड़े लेखक श्री दयानंद पांडेय कहते हैं – मीडिया को कारपोरेट स्वार्थों, और भांड़ों और भड़ैतों ने घेर लिया है। जी हां, केवल भांड़ों और भड़ैतों ने ही नहीं, मिरासियों और बाई जी लोगों ने भी। जैसे नृत्य, संगीत आदि एक निश्चित किस्म के लोगों से घिर गये थे, वैसी ही हालत मीडिया की भी हो रही है।