यशवंत सिंह परमार के पासंग भी नहीं उत्तराखण्ड के पाखंडी नेता

पूरे पाँच वर्ष लोकसभा सदस्य और उससे पूर्व इतने ही साल विधायक रहते प्रदीप टम्टा ने गैरसैंण को उत्तराखण्ड की राजधानी बनाने के लिए कभी कुछ नहीं किया, परन्तु अब इन्हें उत्तराखण्ड की आत्मा के गैरसैंण में बसने के सपने आ रहे हैं। आजकल ये कहते हैं कि ‘राजधानी गैरसैंण में स्थापित किये बगैर प्रदेश के समग्र विकास व प्रदेश गठन की जनाकांक्षाओं को साकार नहीं किया जा सकता। उत्तराखण्ड की तमाम समस्याओं का समाधान प्रदेश की राजधानी गैरसैंण में बनाकर ही किया जा सकता है।’ जबकि इन्हीं महाशय की कारगुजारियों के कारण भाजपा ने वर्ष 2000 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित पूरा हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र ‘उत्तरांचल’ में मिला कर इसके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया था।