रिपोर्टर ‘रिपब्लिक’ का हो या ‘पांचजन्य’ का, ‘वायर’ का हो या ‘एक्सप्रेस’ का, उसे रहने का हक़ है

Panini Anand : कल संघ या भाजपा का कोई व्यक्ति अगर किसी पत्रकार को उसके चैनल या पब्लिकेशन की पहचान की वजह से भगाएगा तो हम उसे सही मानें या ग़लत. रिपोर्टर रिपब्लिक का हो या पांचजन्य का, वायर का हो या एक्सप्रेस का, उसे रहने का हक़ है. यह बात सारे सार्वजनिक जीवन वाले लोग समझ लें. नहीं समझेंगे तो हम इसका विरोध करेंगे, चाहे आप किसी भी विचारधारा के हों. याद रखिए, अन्याय के विरुद्ध लड़ते हुए अन्याय करना खुद अन्यायी बन जाना है.

आजतक ऑनलाइन के फ़ीचर सेक्शन में युवा पत्रकारों के लिए गुंजाइश

Panini Anand : आजतक ऑनलाइन के फ़ीचर सेक्शन में काम करने के इच्छुक नवोदितों, ताज़े कर्रे युवा पत्रकारों के लिए अपने पास कुछ गुंजाइश है. पैमाना यह है कि ख़बर को सूंघना आता हो, सिनेमा पर पकड़ हो या कम से कम समझ तो हो. सबसे अहम बात, वर्तनी सही हो और ख़बर लिखना आता हो. आवेदन के लिए सीवी भेजिए- panini.anand@intoday.com पर ध्यान से पढ़कर मेल करें—

किसान की खुदकुशी पर पाणिनी आनंद की कविता…

Panini Anand : यह नीरो की राजधानी है. एक नहीं, कई नीरो. सबके सब साक्षी हैं, देख रहे हैं, सबके घरों में पुलाव पक रहा है. सत्ता की महक में मौत कहाँ दिखती है. पर मरता हर कोई है. नीरो भी मरा था, ये भूलना नहीं चाहिए.