सुनील छइयां की याद : मिलना था इत्तेफाक, बिछड़ना नसीब था

सुनील छइयां की तीन तस्वीरें, तीन मुद्राएं… अब यादें शेष!


 

-पारस अमरोही

सुनील छइयां से पहली मुलाकात कब हुई, अब याद नहीं। शायद अमरोहा के किसी
प्रोग्राम में। याद आते हैं सुनील के साथ बिताये दिन। दोनों साथ ही तो
अमर उजाला के मुरादाबाद संस्करण में रहे। सुनील एक पारखी छायाकार थे।
समर्पित। जुझारू। एक विश्वसनीय। इन्सान दोस्त। तब अमर उजाला की मुरादाबाद
ब्यूरो की कमान थी वरिष्ठ पत्रकार उमेश प्रसाद कैरे के हाथों में। अमर
उजाला का मुरादाबाद कार्यालय था-19 सिविल लाइंस यानी कैरे साहब का निवास।
सुनील की पहचान का दायरा मुरादाबाद में किसी भी लोकप्रिय माननीय से
ज्यादा था।