अजमेर ‘पत्रिका’ में अहंकारी संपादक का आतंक, दुखद रवैये से स्टॉफ परेशान

राजस्थान पत्रिका अजमेर में जब से उपेंद्र शर्मा को संपादक बनाया गया है, स्टाफ पर मुसीबत टूट पड़ी है। जूनियर रिपोर्टर से सीधे संपादक की कुर्सी पर बैठे उपेंद्र शर्मा किसी को कुछ नहीं समझ रहे। उनसे पहले यहां ज्ञानेश उपाध्याय जैसे धीर-गंभीर और विद्वान संपादक थे। उपाध्याय ने अपने छोटे से कार्यकाल में सभी को मान-सम्मान दिया। लेकिन उपेंद्र शर्मा तानाशाह की तरह काम कर रहे हैं। 

गोविंद ठाकरे जबलपुर पात्रिका के संपादक बने

रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पत्रिका में कार्यरत सिटी चीफ गोविंद ठाकरे को जबलपुर पत्रिका का स्थानीय संपादक नियुक्त किया गया है। वे पत्रिका में पिछले पांच सालों से कार्यरत हैं। 

पत्रिका के पत्रकारों के साथ और अधिक कठोर हुए गुलाब कोठारी

राजस्थान पत्रिका के मालिक गुलाब कोठारी का रवैया अपने ही स्टॉफ के प्रति दिनोदिन और अधिक कठोर होता जा रहा है। अपने खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में अवमानना के छह मामलों का सामना करने के बावजूद उनके रुख में मामूली सा भी बदलाव आने की बजाए मजीठिया मामले पर अवाज उठाने वालों के साथ उनकी सख्ती बढ़ती …

राजस्थान पत्रिका के भ्रामक और भड़काऊ संपादकीय के खिलाफ सामाजिक संगठन HRD ने की पुलिस में रिपोर्ट

जयपुर। राजस्थान पत्रिका के 30 मर्इ, 2015 के जयपुर संस्करण के सम्पादकीय में आरक्षण के बारे में भ्रामक और भड़ाकाने वाला सम्पादकीय लिखकर प्रकाशित करने पर हक रक्षक दल (HRD) सामाजिक संगठन के राष्ट्रीय प्रमुख डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ने राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रूपचन्द मीणा के साथ पुलिस थाना मोती डूंगरी, जयपुर में उपस्थित होकर लिखित रिपोर्ट पेश की है और राजस्थान पत्रिका के विरुद्ध आपराधिक और देशद्रोह का अभियोजन चलाने एवं राजस्थान पत्रिका के प्रकाशन पर प्रतिबन्ध लगाने की मांग की है।

पत्रिका के संपादकों और मैनेजरों में मजीठिया के लिए केस करने वालों को तोड़ने की होड़

खबर है कि राजस्थान पत्रिका उदयपुर के मैनेजर नायर ने मजीठिया वेज बोर्ड के लिए केस करने वाले पांच कर्मचारियो को तोड़ लिया है. अखबार मालिक निहार कोठारी अपने सभी मैनेजरों और संपादकों पर दबाव डाले हुए हैं कि वे मजीठिया के लिए केस करने वाले कर्मियों को किसी तरह समझाएं और पटाएं. संपादकीय प्रभारी राजेश कसेरा पर भी यही दबाव है. सूत्रों के मुताबिक कसेरा को तीन बार मुख्यालय बुलाकर मजीठिया की मांग करने वालों को अपने पाले में करने के लिए दबाव बनाया गया.

खंडवा में पत्रिका के खिलाफ एकजुट पत्रकारों के संघर्ष का बिगुल बजा, सीएम के नाम एसडीएम को ज्ञापन

खंडवा में मई दिवस पर एसडीएम को मजीठिया वेतनमान से संबंधित ज्ञापन देते पत्रकार

खंडवा : पत्रिका अखबार के जो कर्ता-धर्ता अपने आप को जनता का तथाकथित हितैषी बताकर नई-नई मुहिम चलवाते हैं और मुद्दे उठवाते हैं उसकी सच्चाई आप भी जान लीजिए। पत्रकारों के हक में लागू मजीठिया वेज बोर्ड के मुताबिक प्रमुख समाचारपत्रों को एक निर्धारित राशि से वेतनमान देने के आदेश दिए गए हैं। इसके खिलाफ पत्रिका सहित कुछ अखबार वाले कोर्ट गए। बाद में कोर्ट ने पत्रकारों के हक में फैसला दे दिया। फिर क्या था। पत्रिका अखबार ने अपनी मनमानी शुरू कर दी। पत्रकारों से एक फॉर्मेट पर साइन करवाए गए कि हमें मजीठिया के मुताबिक सैलरी नहीं चाहिए। जिन पत्रकारों ने फॉर्मेट पर हस्ताक्षर कर दिए, उन्हें तो बख्श दिया बाकी को एन-केन-प्रकारेण प्रताड़ित कर बाहर करने की साजिशें रची गईं। यहां-वहां ट्रांसफर किए गए।

मजीठिया वेतनमान : भास्कर और राजस्थान पत्रिका ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए झूठे जवाब

दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट में देश भर के पत्रकारों के भविष्य से जुड़े मजीठिया वेज बोर्ड के मामले  महत्वपूर्ण सुनवाई की तिथि अब चार-पांच दिन दूर है। इसके साथ ही मीडिया मालिकों ने पेशबंदी तेज कर दी है। पत्रकारों का हक मारने के लिए वे कानूनी स्तर पर तरह तरह की कागजी फरेब में लगे हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक गत दिनो सुप्रीम कोर्ट में दैनिक भास्कर और राजस्थान पत्रिका ने अपने झूठे जवाब दाखिल करते हुए अदालत को बताया है कि उन्होंने अप्रैल 2014 से अपने यहां मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें लागू कर दी हैं। उन्होंने यह भी सफेद झूठ बयान किया है कि मजीठिया की धारा 20-जी के अनुसार उनके संस्थान के सभी मीडिया कर्मियों ने प्रबंधन को लिख कर दे दिया है कि वे पुराने वेतनमान से संतुष्ट हैं। इसके पीछे मंशा ये साबित करने की है कि जो मीडिया कर्मी कोर्ट नहीं गए हैं, उन्हें मजीठिया वेतनमान नहीं मिलेगा। बाकी कर्मचारियों का काम प्रबंधकीय प्रकृति का है, इसलिए वे मजीठिया वेतनमान के हकदार नहीं हैं।

पत्रिका वाले कोठारी बाप-बेटा का कारनामा : हक के लिए कोर्ट जाने पर रामकुमार सिंह और राकेश वर्मा को निकाला

राजस्थान पत्रिका समूह से खबर है कि इस अखबार के मालिक पिता पुत्र इन दिनों पूरी तरह क्रूर हो चुके हैं. मजीठिया वेज बोर्ड के पैमाने पर सेलरी देने की मांग को लेकर जो-जो भी पत्रकार या गैर-पत्रकार सुप्रीम कोर्ट या किसी अन्य कोर्ट / उपक्रम में गए हैं, उन्हें बिना किसी नियम कानून की परवाह किए हुए संस्थान से बाहर निकाले जाने की कार्रवाई हो रही है.

पत्रिका में 12 का टर्मिनेशन और 40 का आउट ऑफ स्टेट ट्रांसफर

: सुब्रत राय की तरह पत्रिका के कोठारीज को भी भेजा जाए जेल : पत्रकारों के लिए मजीठिया की लड़ाई स्वतंत्रता संग्राम की तरह हो गई है। जिस तरह अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाने वालों का दमन कर दिया जाता है, वैसे ही राजस्थान पत्रिका मैनेजमेंट के खिलाफ कोर्ट में जाने वालों के खिलाफ पत्रिका ने दमनकारी नीति शुरू कर दी है। 28 अप्रैल से पहले पत्रिका ने मजीठिया आंदोलन को पुरजोर तरीके से दबाने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। मजीठिया आंदोलन लीड कर रहे पत्रकारों को पत्रिका प्रशासन ने रातों-रात टर्मिनेट करना शुरू कर दिया ताकि आंदोलन की कमर तोड़ सके।

मजीठिया वेज बोर्ड : सुप्रीम कोर्ट में आज की सुनवाई, भविष्य की रणनीति और लड़ने का आखिरी मौका… (देखें वीडियो)

Yashwant Singh : सुप्रीम कोर्ट से अभी लौटा हूं. जीवन में पहली दफे सुप्रीम कोर्ट के अंदर जाने का मौका मिला. गेट पर वकील के मुहर लगा फार्म भरना पड़ा जिसमें अपना परिचय, केस नंबर आदि लिखने के बाद अपने फोटो आईडी की फोटोकापी को नत्थीकर रिसेप्शन पर दिया. वहां रिसेप्शन वाली लड़की ने मेरा फोटो खींचकर व कुछ बातें पूछ कर एक फोटो इंट्री पास बनाया. पास पर एक होलोग्राम चिपकाने के बाद मुझे दिया. जब तक कोर्ट नंबर आठ पहुंचता, केस की सुनवाई समाप्त होने को थी.

दिल्ली से हिंदी की मासिक पत्रिका ‘द्वंद्व’ का प्रथम संस्करण लांच

दिल्ली : यहां से विगत पंद्रह मार्च को लांच हुई हिंदी की सुपठनीय मासिक पत्रिका ‘द्वंद्व’ का प्रथम संस्करण बाजार में आ चुका है। पत्रिका की सीएमडी हैं सुजाता सिंह और दस वर्षों तक न्यूज चैनल में काम कर चुके दिनेश कुमार इसके संपादक हैं। 

हिंदी की मासिक पत्रिका ‘द्वंद्व’ के प्रथम संस्करण का मुखपृष्ठ

मजीठिया वेज बोर्ड संघर्ष : पत्रिका और भास्कर ने उत्पीड़न तेज किया, बर्खास्तगी और इस्तीफे का दौर

हिंदी पट्टी के दो बड़े अखबारों राजस्थान पत्रिका और दैनिक भास्कर से खबर है कि यहां मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी मांगने वालों का प्रबंधन ने उत्पीड़न तेज कर दिया है. भास्कर प्रबंधन तो बौखलाहट में ऐसे ऐसे कदम उठा रहा है जिसे देख सुनकर सभी लोग दांतो तले उंगलियां दबा रहे हैं. पत्रिका प्रबंधन ने मजीठिया मांगने वाले एक मीडियाकर्मी को बर्खास्त कर दिया है. उन्हें जो पत्र भेजा गया है उसमें लिखा गया है कि– ”आपको कंपनी के क्लाज 3 के अनुसार तीन महीने का एडवांस नोटिस व एडवांस वेतन देकर सेवा से मुक्त किया जाता है. आपकी सेवाओं की अब कंपनी को जरूरत नहीं है. आप 27 फरवरी से खुद को सेवा से मुक्त समझें.”

राजस्थान पत्रिका में मजीठिया वेज बोर्ड के साइड इफेक्ट : डीए सालाना कर दिया, सेलरी स्लिप देना बंद

कोठारी साहब जी, मन तो करता है पूरे परिवार को लेकर केसरगढ़ के सामने आकर आत्‍महत्‍या कर लूं

जब से मजीठिया वेज बोर्ड ने कर्मचारियों की तनख्‍वाह बढ़ाने का कहा व सुप्रीम कोर्ट ने उस पर मोहर लगा दी तब से मीडिया में कार्य रहे कर्मचा‍रियों की मुश्किलें बढ रही हैं. इसी कड़ी में राजस्‍थान पत्रिका की बात बताता हूं। पहले हर तीन माह में डीए के प्‍वाइंट जोड़ता था लेकिन लगभग दो तीन वर्षों से इसे सालाना कर दिया गया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए तनख्‍वा बढ़ी तो जहां 100 प्रतिशत की बढ़ोतरी होनी थी तो मजीठिया लगने के बाद कर्मचारियों की तनख्‍वाह में मात्र 1000 रुपए का ही फर्क आया। किसी किसी के 200 से 300 रुपये की बढ़ोतरी।

राजस्थान पत्रिका के दस मीडियाकर्मियों ने सभी निदेशकों को भेजा लीगल नोटिस

राजस्थान पत्रिका से खबर है कि यहां के दस मीडियाकर्मियों ने सुप्रीम कोर्ट के एक वकील से संपर्क साधकर मालिकों को लीगल नोटिस भिजवाया है. लीगल नोटिस भिजवाने की पहल की है राजस्थान पत्रिका, उदयपुर के ललित जैन ने. ललित जैन 13 वर्षों से पत्रिका में जूनियर मेंटनेंस आफिसर के पद पर कार्यरत हैं. जैन के नेतृत्व में दस मीडियाकर्मियों ने पत्रिका जो लीगल नोटिस भिजवाया, उसे पत्रिका समूह मुख्यालय की तरफ से रिसीव भी कर लिया गया है.

7 फरवरी के बाद मजीठिया के लिए सुप्रीम कोर्ट नहीं जा सकेंगे, भड़ास आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार

जी हां. ये सच है. जो लोग चुप्पी साध कर बैठे हैं वे जान लें कि सात फरवरी के बाद आप मजीठिया के लिए अपने प्रबंधन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट नहीं जा पाएंगे. सात फरवरी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के एक साल पूरे हो जाएंगे और एक साल के भीतर पीड़ित पक्ष आदेश के अनुपालन को लेकर याचिका दायर कर सकता है. उसके बाद नहीं. इसलिए दोस्तों अब तैयार होइए. भड़ास4मीडिया ने मजीठिया को लेकर आर-पार की लड़ाई के लिए कमर कस ली है. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील उमेश शर्मा की सेवाएं भड़ास ने ली है.

( File Photo Umesh Sharma Advocate )

पत्रिका ग्रुप ने अपने कई पत्रकारों को सम्मानित किया

जयपुर। प्रतिवर्ष होने वाली पंडित झाबरमल्ल स्मृति व्याख्यानमाला का आयोजन रविवार सुबह 10.30 बजे राजस्थान पत्रिका के के सरगढ़ कार्यालय में किया गया। इस अवसर पर पत्रिका की ओर से सृजनात्मक साहित्य व पत्रकारिता पुरस्कार दिया गया। इस अवसर पर पत्रिका समूह के प्रधान संपाधक गुलाब कोठारी ने लोकतंत्र में मीडिया के घटते प्रभाव पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल चुनावों के समय मीडिया को सिर-आंखों पर चढ़ा लेते हैं लेकिन इसके बाद वह उन्हें बोझ लगने लगता है। जनता के लिए बना लोकतंत्र अब सरकार के लिए हो गया है। सरकारें मीडिया को दबंगई दिखाने लगी हैं।

राजस्थान पत्रिका के इंप्लाई रहे सुमित ने मालिकों-संपादकों को पत्र लिखकर मजीठिया वेजबोर्ड के हिसाब से भुगतान मांगा

नैतिकता और नीतियों की दुहाई दे देकर खुद का घर भरने वाले अखबारों के मालिकों की चमड़ी इतनी मोटी हो गई है कि इन्हें अब किसी से भय नहीं लगता. राजनीति, नौकरशाही और न्यायपालिका को अपनी मुट्ठी में कर चुके ये लोग अब सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को भी रद्दी की टोकरी में डाल देते हैं. पर इनकी अकूत ताकत से हार न मानते हुए कुछ ऐसे वीर सामने आ जाते हैं जो इन्हें खुली चुनौती दे डालते हैं. ऐसे ही एक वीर का नाम सुमित कुमार शर्मा (मोबाइल- 07568886000) है.

 

पत्रिका के कार्यक्रम ‘हमराह’ को लेकर नवज्योति के मालिक दीनबंधु चौधरी का इगो टकरा गया!

राजस्थान पत्रिका और दैनिक नवज्योति की लड़ाई इतवार 14 दिसंबर की सुबह अजमेर की सड़कों पर नजर आई। पत्रिका का कार्यक्रम और नवज्योति के मालिक दीनबंधु चौधरी का इगो टकरा गया। पत्रिका ने पिछले कुछ दिनों से एक कार्यक्रम शुरू किया है, ‘हमराह’, इसके लिए इतवार की एक सुबह के लिए एक ऐसी सड़क का कुछ मीटर हिस्सा तय किया जाता है जहां दो घंटे सुबह 7 से 9 बजे तक शहर के लोग आकर बेलौस अंदाज में अपनी गतिविधियों, प्रतिभाओं का प्रदर्शन कर सकें।

पत्रिका में उठापटक का दौर : ज्ञानेश उपाध्याय, उपेंद्र शर्मा, संतोष खाचरियवास, अमित वाजपेयी के बारे में सूचनाएं

राजस्थान पत्रिका में इन दिनों जोरदार उठापटक का दौर है। दौलत सिंह चौहान को पत्रिका जयपुर का संपादक बनाए जाने के ठीक पहले के ये हालात हैं। करीब आठ महीने पहले ही अजमेर के स्थानीय संपादक बनकर आए बिहार मूल के ज्ञानेश उपाध्याय यहां अपने पैर जमा भी नहीं पाए थे कि उन्हें जोधपुर का स्थानीय संपादक बनाकर भेज दिया गया। उनकी जगह जयपुर से भीलवाड़ा मूल के उपेन्द्र शर्मा को अजमेर का स्थानीय संपादक बनाया गया है।

पत्रिका समूह में तबादलों की बयार, कई संपादक इधर उधर हुए

खबर है कि राजस्थान पत्रिका ने कई संपादकों को इधर उधर किया है. तबादले के दायरे में आए कुछ संपादकों को छह से नौ महीने पहले ही तैनात किया गया था. आखिर इतने कम महीनों में ही क्यों हटाना पड़ा है, यह सवाल चर्चा में है. नौ महीने पहले लगाए गए कोटा में अमित वाजपेयी, जोधपुर में राजेश नैन, उदयपुर में रमेश शर्मा को हटा दिया गया है. अमित वाजपेयी और राजेश नैन को जयपुर मुख्यालय में तलब किया गया है.

राजस्थान पत्रिका, जोधपुर में भ्रष्टाचार और जातिवाद चरम पर, गुलाब और नीहार कोठारी को भेजा गया गोपनीय पत्र

यशवंत जी, यह पत्र दो सप्ताह पहले राजस्थान पत्रिका के प्रमुख गुलाब कोठारी और नीहार कोठोरी को भेजा गया था… इस आशा के साथ कि यह पत्र मिलने के बाद कोई ठोस कार्यवाही होगी… लेकिन जैसे खबरें दबाई जाती हैं, वैसे ही इस पत्र को दबा दिया गया… आखिर में यह पत्र आपको भेजा जा रहा है… व्हिसल ब्लोअर का नाम उजागर नहीं करना पत्रकारिता का धर्म है और बात रही सत्यता की एक भी बात असत्य नहीं है… हर कर्मचारी पीड़ित है…

राजस्थान पत्रिका ने दीपावली पर गिफ्ट नहीं दिया कर्मचारियों को, बोनस में हजार रुपये कटौती

जयपुर से खबर है कि राजस्थान पत्रिका ने इस बार दीपावली लक्ष्मी पूजन के बाद अपने अखबार के कर्मचारियों को कोई गिफ्ट नहीं दिया. इस कारण से सभी कर्मचारियों को निराश होकर लौटना पड़ा. दरअसल पत्रिका समूह अपने कर्मचारियों को मिलने वाले लाभों में से लगातार कटौती कर रहा है. पिछले कई दिनों का सीसीएल काफी महीनों बाद जमा करवाया गया.

पत्रिका, इंदौर में उठापटक जारी

पत्रिका इंदौर का संपादक विजय चौधरी को बनाने के बाद उठापटक जारी है. ताजी सूचना है कि सतना से शिशिर मिश्र को बुलाया गया है. इन्हें सिटी में दो सीनियर रिपोर्टर के ऊपर बैठा दिया गया है. संपादक के रूप में विजय चौधरी के आते ही पहले 3 महीने में 6 रिपोर्टर पत्रिका छोड़ चुके हैं.