‘तितली’ के बहाने आभासी दुनिया के मित्र पंकज सोनी से वास्तविक मुलाकात हुई

तितली : फ़ायदे की उड़ान… सिवनी, मप्र। इंसान का मन तितली की तरह चंचल होता है। और यह पुरूष का हो तो कई बार तितली के पंख कुंठित यौनेच्छाओं से लिपटे होते हैं और बार-बार फ्रायड के कथन को बगैर जरूरत साबित करने पर आमादा होते हैं। पुरुष को किसी लड़की के चरित्रहीन होने में दिलचस्पी सिर्फ इस बात पर होती है कि चरित्र के सन्देह का लाभ उसके अपने खाते में जाए। इससे ज्यादा चरित्रहीनता वह अफोर्ड नहीं कर सकता और लाभांश नहीं मिलने पर वह थोपे गए आरोपों के मूलधन में किसी काईंयाँ बनिए की तरह सूद पर सूद लगाता जाता है। वैसे परिवार में वह भला-मानुस बना रहता है और मौका लग जाए तो नजर बचाकर थोड़ी-बहुत “फ्री-लान्सिंग” भी कर लेता है।

प्रेमचन्द जंयती पर ‘लक्ष्य कला मंच’ ने किया ‘सवा सेर गेहूं’ का मंचन

वाराणसी (भाष्कर गुहा नियोगी) :  तो क्या आज भी दौलत और ताकत के आगे इंसान से लेकर भगवान तक विवश हैं? मुंशी प्रेमचंद  की जयंती पर उनके ठीहे लम्ही में लक्ष्य नाट्य मंच के कलकारों ने सवा सेर गेहूं की प्रस्तुति कर इस सवाल को उठाया। भूमिहीन शंकर जब महाजन पाण्डेय महाराज से कहता है, हम तो आनाज दे देंगे सरकार, पर याद रखियेगा, एक भगवान का घर भी है…… तो महाजन जवाब देते हैं, वहां की चिंता तू कर, वहां हमे कुछ नहीं होगा, वहां, सुर, असुर, देवी- देवता, महात्मा सब ब्राहम्ण ही तो हैं, जो कुछ होगा, हम संभाल लेंगे। 

प्रेमचंद जयंती पर लमही में सवा सेर गेहूं का मंचन करते वाराणसी के कलाकार