एक श्रद्धा पुष्प जगेंद्र के नाम

कुछ क्रूर भेड़िए सफेदपोश का लबादा ओढ़े समाज में छिपे बैठे हैं उन्हें चेतावनी ? तुम सुधर जाओ हमारी कलम कब तक तोड़ोगे एक जुगेन्द्र को जिंदा जला कर मार डाला चुनौती तुम्हारे गुनाहों पर पर्दा नहीं डाल सकेगा हम सभी खबरनबीसों को शूली पर चढ़ा दो तब भी कितनी मांओं की कोख से और …

दिल्‍ली जैसे निर्मम शहर में भी दस घंटे चली कविता 16 मई के बाद

दिल्ली : अभिषेक श्रीवास्तव लिखते हैं – ‘कविता : 16 मई के बाद’ का आयोजन कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। पहला तो इसलिए कि जितने लोगों ने फेसबुक ईवेन्‍ट पर आने की पुष्टि की थी तकरीबन उतने लोग एक मौके पर वास्‍तव में मौजूद थे। दस घंटे तक चले कार्यक्रम में तकरीबन शाम छह बजे तक 90 लोग मौजूद रहे, जो दिल्‍ली जैसे निर्मम शहर में मुश्किल होता है।