मध्यप्रदेश की राजनीति में भी किसी केजरीवाल की तलाश

एक तरफ सांपनाथ तो दूसरी तरफ नागनाथ… सालों से जनता यह कहते हुए हर चुनाव में अल्टा-पल्टी के साथ कांग्रेस और भाजपा को जीताती या हराती आई है। दरअसल अभी तक देश की राजनीति में कोई सशक्त विकल्प जनता को मिला ही नहीं। कुछ राज्यों में सपा, बसपा या तृणमूल कांग्रेस जैसी पार्टियों ने सरकारें तो बनाईं, मगर ये दल भी कांग्रेस और भाजपा की फोटो कॉपी कुछ ही अर्से में बन गए। अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने देश में एक नई उम्मीद इसलिए जगाई है क्योंकि इसके नेता पेशेवर और घाघ राजनीतिज्ञ नहीं हैं। नई दिल्ली के चुनाव में जिस तरह केजरीवाल ने आम आदमी के सड़क, बिजली, पानी, महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को फोकस में रखकर चुनाव लड़ा और बखूबी जीता, उसने तथाकथित विकास पर नए सिरे से बहस की गुंजाइश भी शुरू की है। मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों में जनता को किसी केजरीवाल की बड़ी बेसब्री से तलाश है, क्योंकि हरल्ली कांग्रेस से कोई उम्मीद इसलिए नहीं है क्योंकि वह जनता के मुद्दे उठाने में पूरी तरह से नाकामयाब रही है, जिसके चलते लगातार चुनाव जीतने वाली भाजपा के मुगालते आसमान पर पहुंच गए हैं। यह बात अलग है कि नई दिल्ली में सरकार चला रहे अरविंद केजरीवाल के खिलाफ कांग्रेस और उससे अधिक भाजपा द्वारा नित नए षड्यंत्र भी रचे जा रहे हैं।