विदेश दौरों में खोए प्रधानमंत्री मोदी के नाम एक भारत वासी की चिट्ठी

सेवा में आदरणीय नरेंद्र मोदी जी,

प्रधान सेवक / चौकीदार / चीफ ट्रस्टी

भारत सरकार, नई दिल्ली,

विषय :- भारत के नागरिकों की समस्याओं के समाधान के बावत ।

महोदय,  

आप दुनिया के जिस भी देश में जाते हैं वहां कुछ न कुछ भारत के खजाने से देते हैं जो कि हम भारतीयों की खून पसीने की कमाई से इकठ्ठा  किया गया धन है, आप उसे इस तरह बाँट रहे हैं जैसे आपको ये धन पारिवारिक बंटवारे में मिला हो । आपने चुनाव के समय कहा था मुझे एक मौका दीजिये मैं भारत की संपत्ति दुनिया के लुटने नहीं दूंगा और उसकी चौकीदारी करूँगा,पर ये क्या आपको मौका मिलते ही अरबों खरबों डालर ऐसे बाँट डाले जैसे भारत को अब इस धन की जरूरत ही नहीं है। आपने तो सत्ता मिलते ही कहा था कि पूर्ववर्ती सरकार ने देश का खज़ाना खाली कर दिया है फिर इतना पैसा जो आपने भूटान नेपाल श्रीलंका मंगोलिया सहित दर्जन भर देशों को दिया है ये कहाँ से आया या आपने रातों रात कमा लिए।

अर्जियों से लेकर अनशन में बीत गए सत्रह साल, विकलांग अध्यापक को नहीं मिली स्थायी नियुक्ति

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रविन्द्रपुरी स्थित सांसद/प्रधानमंत्री कार्यालय में पत्रक सौंपते डॉ. केशव ओझा

वाराणसी। 17 साल के कड़वे अनुभवों को परे रखकर विकालांग अध्यापक डॉ. केशव ओझा ने बीते 8 सितंबर को जब प्रधानमंत्री मोदी के रविन्द्रपुरी कार्यालय पहुंच अपने अच्छे दिनों के लिए दस्तक देते हुए अर्जी दी थी तो शायद उन्हें नहीं मालूम था, कि सत्ता की सूरत भले ही बदल गयी हो पर सीरत नहीं बदली, महीना भर बीत जाने के बाद भी डॉ. ओझा का प्रार्थना प्रत्र सत्ता की अंधी गलियों में कही गुम हो कर रह गया है और डॉ. ओझा का संघर्ष वहीं का वहीं खड़ा है।