पत्रकारिता के सिद्धांत, नैतिक मूल्य और उनकी सच्चाई

एक दिन मैं विश्वविद्यालय से घर के लिए निकल रहा था। थोड़ी ही दूर पहुंचा तो देखा कि जाम लगा था। मैंने अपनी गाड़ी को सड़क किनारे लगाया और पास ही बनी चाय की दुकान पर चाय पीने लगा। ट्रैफिक जाम ज्यादा बड़ा तो नहीं था लेकिन सबको जल्दी थी इसलिए साफ नहीं हो रहा था। मैं चाय पी ही रहा था कि अचानक से एक एंबुलेंस बहुत तेजी में आई। उसे देखकर समझ आ गया कि कोई इमरजेंसी है। लेकिन लोग उस एंबुलेंस को निकलने ही नहीं दे रहे थे।