इंदौर में ‘हैलो हिंदुस्तान’ का प्रकाशन पिछले तीन माह से बंद

इंदौर : यहां से निकलने वाली हिन्दी समाचार पत्रिका ‘हैलो हिंदुस्तान’ पिछले करीब तीन माह से प्रकाशित नहीं हो पा रही है। इतना ही नहीं इसके कर्ता-धर्ता प्रवीण शर्मा, जो सांध्य दैनिक अखबार भी निकाल रहे थे, कई माह से अपने कर्मचारियों को तनख्वाह तक नहीं बांट पाए हैं। इस बारे में जब कर्मचारी सवाल …

मैं जर्मन भाषा और साहित्य से गत 44 वर्षों से जुड़ा हूं… मैं अंदर की कुछ जानकारी रखता हूं…

: हिंदी समेत भारतीय भाषाओँ को दबा कर कुछ जर्मनभाषी सांस्कृतिक दूत अंग्रेजी को भारत की मुख्य भाषा बनाने में जुटे : मित्रों, मैं जर्मन भाषा और साहित्य से गत 44 वर्षों से जुड़ा हूँ. पंजाब यूनिवेर्सिटी में, इंग्लिश एंड फोरेन लैंगुएज यूनीवर्सिटी में जर्मन भाषा, साहित्य तथा अनुवाद विज्ञानं तथा अनुवाद की शिक्षा 32 वर्ष दी है. भारत में हिंदी को नुकसान पहुँचाने तथा अंग्रेज़ी तथा अन्य कई भाषाओँ का वर्चस्व स्थापित करने की जो तैयारियां कुछ वर्षों से चल रही थीं, उसके बारे में अंदर की कुछ जानकारी रखता हूँ. भारत के संविधान को धता बताने में हम केवल जर्मनों को ही दोष नहीं दे सकते, उनको उकसाने वाले आपराधिक प्रवृति के कुछ भारतीय हैं. यह एक संतोष का विषय है कि अब हमारे पास एक ऐसी सरकार है, जो किसी भी दबाव के आगे घुटने नहीं टेकती, लेकिन यह आवश्यक है कि हम अपने कुछ अंग्रेजीदां बुद्धिजीवियों के प्रति भी सतर्क रहें, ताकि ऐसी स्थिति फिर न बने. पृष्ठभूमि का कुछ थोड़ा सा विवरण इस प्रकार है: