मीडियाकर्मियों का हक मारने को झूठ बोल रहा सहारा, अकेले मार्च महीने में ही विज्ञापनों से 5.71 करोड़ की कमाई

अपने संस्थान के मीडिया कर्मियों की सैलरी में वृद्धि और समय से भुगतान को लेकर राष्ट्रीय सहारा प्रबंधन की नीयत में खोट है। लोगों की आंखों में धूल झोकने के लिए वह सरकार से लेकर अपने कर्मचारियों के बीच तक घड़ियाली आंसू बहाता घूम रहा है। इसके ढोंग का कुछ प्रामाणिक सूचनाओं से चौंकाने वाला ताजा खुलासा हुआ है। सहारा प्रबंधन कह रहा है कि अखबार घाटे में है, जबकि सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक उसके एक माह यानी मार्च में ही 5 करोड़ 71 लाख रुपए की शुद्ध कमाई सिर्फ विज्ञापनों से हुई है। प्रसार आदि मदों से होने वाली मासिक आय इसके अतिरिक्त बताई गई है।

 

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: लेकिन हरिद्वार छोड़ते ही वे एकदम हार्डकोर बिजनेसमैन बन जाते हैं : देश की सबसे ज्यादा कमाऊ मीडिया कंपनी है – बैनेट, कोलमैन एंड कंपनी। यह कंपनी टाइम्स ऑफ इंडिया, इकॉनोमिक्स टाइम्स, महाराष्ट्र टाइम्स, नवभारत टाइम्स, फेमिना, फिल्मफेयर जैसे अनेक प्रकाशनों के अलावा भी कई धंधों में है। टाइम्स ऑफ इंडिया जो काम करता है, उसी की नकल देश के दूसरे प्रमुख प्रकाशन समूह भी करते है। यह कंपनी अनेक भाषाओं के दैनिक अखबार छापना शुरू करती है, तो दूसरे अखबार मालिक भी नकल शुरू कर देते है। दैनिक भास्कर समूह, दैनिक जागरण समूह, अमर उजाला समूह, राजस्थान पत्रिका समूह जैसे ग्रुप ‘फॉलो द लीडर’ फॉर्मूले के तहत चलते है। टाइम्स ने मुंबई टाइम्स शुरू किया, भास्कर ने सिटी भास्कर चालू कर दिया।