संदिग्ध पत्रकारों से मुख्यमंत्री अखिलेश की सुरक्षा को खतरा

उत्तर प्रदेश की अखिलेश यादव सरकार ने उन लोगों के लिए नए अवसरों के रास्ते खोल दिए हैं, जो एक साथ दो रोज़गार करना चाहते हैं। प्रदेश सरकार ने निर्धारित नियमों का अतिक्रमण करते हुए दर्जियों, निजि सचिवों, यात्रा एजेंटों, स्थावर संपदा (रियल एस्टेट) एजेंटों, सेवानिवृत्त सरकारी लिपिकों, फास्ट फूड बेचने वालों, फार्मेसिस्टों, शिक्षकों, राजनीतिज्ञों के पुत्रों और यहां तक कि हत्या के आरोपियों को भी पत्रकार के रूप मान्यता दे दी है। नियमानुसार पांच साल तक लगातार पत्रकारिता का अनुभव रखने वालों को ही मान्यता दी जा सकती है।

विधानसभा में उठा मुंबई की महिला पत्रकार की लूट का मामला, राज्यपाल को ज्ञापन

मुंबई : महिला कंपार्टमेंट में देर रात घुसकर ‘दोपहर सामना’ की पत्रकार मनीषा गुरव को लूटने का मामला विधानसभा में छाया रहा। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष दिलीप वलसे पाटील ने गुरव के साथ लूटपाट की घटना को स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से सदन में उठाया।