National School of Drama : 26 रंगकर्मियों पर हर साल जनता का 80 करोड़ क्यों खर्चा जाए?

रानावि अपने 26 छात्रों पर जितना पैसा खर्च करता है उसका एक हिस्सा भी वे सारी जिंदगी नहीं कमा पाते… भारत रंग महोत्सव 2017 : यह किसका ‘भारंगम’ है?  राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय का भारत रंग महोत्सव (भारंगम) अब जवान हो चुका है। जब 1999 मे तब के विजनरी निर्देशक राम गोपाल बजाज ने भारंगम की शुरुआत की तो इसका चौतरफा विरोध इस आधार पर हुआ कि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय का काम महोत्सव करना नहीं है। पिछले 19 सालों मे काफी कुछ बदला है। अमाल अल्लाना और अनुराधा कपूर की टीम ने तो इसका नाम तक बदल डाला और इसे थिएटर उत्सव कहा जाने लगा। राम गोपाल बजाज के बाद देवेंद्र राज अंकुर के समय तक तो यह भारत रंग महोत्सव बना रहा पर धीरे- धीरे इसे राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय महोत्सव में बदल दिया गया।

‘जनता पागल हो गई है’ और ‘खोल दो’ का मंचन

सामाजिक जड़ता के विरुद्ध हिन्दी रंगमंच की बड़ी भूमिका

दिल्ली।  हिन्दू कालेज की हिन्दी नाट्य संस्था ‘अभिरंग’ द्वारा कालेज पार्लियामेंट के वार्षिक समारोह ‘मुशायरा’ के अन्तर्गत दो नाटकों का मंचन किया गया। भारत विभाजन के प्रसंग में सआदत हसन मंटो की प्रसिद्ध कहानी ‘खोल दो’ तथा शिवराम के चर्चित नाटक ‘जनता पागल हो गई है’ का मंचन हिन्दू कालेज के खचाखच भरे प्रेक्षागृह में हुआ। राजसत्ता और पूँजीवादी लालची ताकतों के जान विरोधी गठजोड़ के खिलाफ लिखे गए नाटक ‘जनता पागल हो गई है’ में शर्मा ने नेता, आशुतोष ने पागल, पीयूष ने जनता, पूजा ने पूंजीपति, स्नेहदीप ने इन्स्पेक्टर की मुख्या भूमिकाएं निभाईं।