मजीठिया वेज बोर्ड : महज 20j ही नहीं और भी हैं खतरे

मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर 19 जुलाई को माननीय सुप्रीम कोर्ट का जो आदेश आया है, उसमें पांच राज्यों के बैच को विस्तृत सुनवाई के लिए चुना गया है। इनमें उत्तर प्रदेश, हिमाचल, उत्तराखंड, नागालैंड और मणिपुर राज्य शामिल हैं। यहां असमंजस की स्थिति यह है कि इस आदेश में माननीय न्यायालय ने सिर्फ 20j को बहस का मुद्दा घोषित किया है। हालांकि अधितर बड़े अखबारों ने इसी 20j के सहारे अपने कर्मचारियों से जबरन हस्ताक्षर करवा कर मजीठिया वेज बोर्ड लागू करने से बचने की नाकाम कोशिश की है। वहीं कई अखबारों ने इसके अलावा भी कई तरह के हथकंडे अपनाए हैं।

अमर उजाला ने हिमाचल हाईकोर्ट में दाखिल कर दिया अपना जवाब

आखिर अमर उजाला ने सात महीनों से अपनाए जा रहे टालमटोल रवैये के बीच हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट की सख्ती के चलते मजीठिया वेज बोर्ड से संबंधित मामले में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। रविंद्र अग्रवाल की याचिका पर 11 मार्च को कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान हालांकि अमर उजाला की रिप्लाई की फाइल आन रिकार्ड नहीं आ पाई थी, मगर अमर उजाला के वकील ने कोर्ट को बताया कि जवाब दाखिल कर दिया गया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने रविंद्र के वकील को रिज्वाइंडर फाइल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। अगली तारीख एक अप्रैल को रखी गई है।