डीएवीपी की नीतियों के कारण ‘तरुणमित्र’ अखबार में छंटनी, 20 से ज्यादा हुए बेरोजगार

लखनऊ से प्रकाशित हिन्दी दैनिक तरुणमित्र ने आर्थिक दबाव के कारण 20 से अधिक मीडिया कर्मियों को नमस्ते कह दिया है. डीएवीपी ने फाइलों में छपने वाले समाचार पत्रों को हटाने के चक्कर में उन अखबारों को भी पैनल से हटा​ दिया है, जहां सैकड़ों मीडियाकर्मियों की रोजी रोटी जुड़ी हुई थी.

मोदी सरकार ने गिराई गाज : 269556 पत्र-पत्रिकाओं के टाइटिल निरस्त, 804 अखबार डीएवीपी विज्ञापन सूची से बाहर

नरेंद्र मोदी सरकार की सख्ती की गाज छोटे अखबारों और पत्रिकाओं पर पड़ी है. इससे दूर दराज की आवाज उठाने वाली पत्र-पत्रिकाओं का संचालन ठप पड़ गया है, साथ ही इससे जुड़े लाखों लोग बेरोजगार भी हो गए हैं. ऐसे दौर में जब बड़े मीडिया घराने पूरी तरह कारपोरेट के चंगुल में आ चुके हैं और असल मुद्दों को दरकिनार कर नकली खबरों को हाईलाइट करने में लगे हैं, मोदी सरकार उन छोटे अखबारों और पत्रिकाओं की गर्दन दबोचने में लगी है जो अपने साहस के बल पर असली खबरों को प्रकाशित कर भंडाफोड़ किया करते थे. हालांकि दूसरा पक्ष यह है कि उन हजारों लोगों की अकल ठिकाने आ गई है जो अखबारों पत्रिकाओं की आड़ में सिर्फ और सिर्फ सरकारी विज्ञापन हासिल करने की जुगत में लगे रहते थे और उनका पत्रकारिता से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं हुआ करता था. वो अखबार पत्रिका के जरिए ब्लैकमेलिंग और उगाही के धंधे में लिप्त थे.