अस्सी हजार रुपये में बिक गई यशवंत की अल्टो कार, अब हुए पूरी तरह पैदल

Yashwant Singh : अस्सी हजार रुपये में बिक गई मेरी दस साल पुरानी अल्टो कार. आजादी थोड़ी सी और बढ़ गई. घुमक्कड़ी में अब आएगा ज्यादा आनंद. दिल्ली का भड़ास आफिस बंद करना और अब कार बेचना… दोनों काम खुद ब खुद हो गए… लेकिन ये दोनों काम और इन दोनों के कम हो जाने के बाद खुद को ज्यादा मुक्त व उदात्त महसूस कर रहा हूं. अगर कार रखने की जगह न हो, एकल परिवार में कोई दूसरा कार चलाने वाला न हो और आफिस वाफिस जाने का कोई झंझट न हो तो कार असल में हाथी की माफिक हो जाया करती है. उस पर भी दिल्ली में केजरीलाल ने आड इवन करके बे-कार जीने के रास्ते जबरन चला दिया था. केजरी भाई साहब के उस प्रयोग से मुझे बड़ा फायदा ये हुआ कि लगातार बस मेट्रो आदि की यात्राएं करने से कार के प्रति मोह आस्था यथास्थितिवाद खत्म हो गया.