‘खबरें अभी तक’ के मीडिया कर्मियों ने संघर्ष तेज किया, मांगें पूरी होने तक मोर्चे पर अडिग

”खबरें अभी तक”  चैनल के मीडिया कर्मी अपने हक के लिए दो दिनों से संघर्ष कर रहे हैं लेकिन जिस संपादक पर चैनल कर्मियों का भरोसा होता है, उसने ही उन्हें रंग दिखा दिया है। एडिर-इन-चीफ उमेश जोशी अब अपने साथी कर्मियों का फोन भी नहीं उठा रहे हैं और साथ देने की जगह परिवारिक कार्यक्रम में मौज मस्ती ले रहे बताये गये हैं। कर्मचारियों को अंदेशा है कि वह बिजली के खोपचे के मालिक सुदेश अग्रवाल के साथ समझौता कर खिसक लिये हैं। छोटे कर्मी शोषण के खिलाफ रणनीति बनाकर रोजाना ऑफिस आ रहे हैं और प्रबंधन से अपने हक के लिए लड़ रहे हैं। 

लेबर कमिश्नर को अपनी समस्या सुनाने के बाद आगे की रणनीति पर विचार विमर्श करते ‘खबरें अभी तक’ के कर्मी

संदर्भ- आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर की सरकारी घेराबंदी : …नहीं तो शेर खा जाएगा!

बचपन में एक कहानी सुनी थी। हांलाकि कहानी तो कहानी ही यानि मनघड़ंत होती है…मगर उससे कुछ सीख मिल जाए तो क्या बुराई है! कहानी कुछ यूं थी कि एक जंगल में चार भैंसे रहते थे। आपस में बेहद प्यार और मिलजुल कर रहते थे। वहीं एक शेर भी रहता था। जिसका मन उनका शिकार करने को हमेशा बना रहता था। लेकिन उनकी एकता के आगे उसकी कभी न चली। जब भी शेर हमला करता चारों मिलकर उसको खदड़े देते। तभी एक लोमड़ी से शेर की वार्तालाप हुई। लोमड़ी को भी शेर के शिकार में अपने पेट भरने के आसार नज़र आए और उसने शेर से कुछ वादा किया।