हिंदी संस्थान : त्रैवार्षिक हिंदीसेवी अवार्ड घोषित, विश्वनाथ प्रसाद तिवारी को राहुल सांकृत्यायन अवार्ड

आगरा : केंद्रीय हिंदी संस्थान के हिंदी सेवी सम्मानों के नामों का ऐलान हो चुका है। केंद्रीय हिंदी संस्थान द्वारा 3 वर्ष के हिंदी सेवी अवार्ड से सम्मानित होने वालों व्यक्तियों के नामों की घोषणा की है। यह पुरस्कार वर्ष 2012, 2013 तथा 2014 के लिए चयन हुए हिंदी सेवियों की लिस्ट में केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के उपाध्यक्ष डॉ. कमलकिशोर गोयनका की अध्यक्षता में संस्थान के डायरेक्टर प्रो. मोहन ने पेश किया है।

इनमें साहित्य एकेडमी के अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी को 2013 के राहुल सांकृत्यायन अवार्ड और राजीव कटारा को इसी वर्ष के गणेश शंकर विद्यार्थी अवार्ड के लिए चयन किया गया है। प्रो. मोहन ने बताया है कि सभी को राष्ट्रपति भवन में एक कार्यक्रम में राष्ट्रपति के हाथों यह अवार्ड दिया जायेगा।

उन्होंने यह भी बताया है कि, हिंदी राष्ट्रीय एकता-समन्वय की अहम कड़ी है। राजभाषा, राष्ट्रभाषा, संपर्कभाषा के रूप में कई भारतीय भाषाओं में आपसी संवाद को बढ़ावा देते हुए भारत की समावेशी संस्कृति के विकास की जिम्मेदारी संस्थान को ही रही है।

हिंदी सेवी सम्मान स्कीम में सात अवार्ड श्रेणियों के अन्तर्गत कई क्षेत्रों में हिंदी के लिए उल्लेख काम करने वाले 14 विद्वानों को हर साल नवाजा जायेगा। अवार्ड के लिए चुने गए साहित्यकारों-विद्वानों में, महेश दर्पण, डॉ. सुषम बेदी (2012); बालेंदु शर्मा दाधीच (2013); नरेंद्र कोहली, प्रो. श्योराज सिंह बेचैन, डॉ, सुरेश  गौतम, बलदेव वंशी और सुधा ओम ढींगरा (2014) भी इनमें शामिल हैं।   

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आज़म खान जौहर शोध संस्थान पीआईएल : यूपी सरकार से जवाब तलब

लखनऊ : अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आज़म खान द्वारा बिना किसी नियम, शर्त और प्रक्रिया के राज्य सरकार के अल्प संख्यक विभाग के मौलाना जौहर अली शोध संस्थान रामपुर की बेशकीमती भूमि और भवन को स्वयं की निजी संस्था मौलाना जौहर अली ट्रस्ट को मात्र 100 रुपये वार्षिक लीज पर दिए जाने के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर की पीआईएल में इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार से 2 सप्ताह में जवाब माँगा है.

जस्टिस एस एन शुक्ला और जस्टिस राजन रॉय की बेंच ने कहा कि प्रकरण काफी गंभीर है और इसमें स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है. पीआईएल में कहा गया है कि आज़म खान ने निजी लोगों को सरकारी भूमि दिए जाने के सम्बन्ध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सौरभ गांगुली, सुभाष घई और कुशाभाई ठाकरे ट्रस्ट मामलों में प्रतिपादित सिद्धांतों को तार-तार करते हुए बीच शहर में करीब 1500 वर्गगज जमीन और उस पर 9.83 करोड़ में बने सरकारी भवन को अपनी निजी संस्था के नाम मात्र सौ रुपये वार्षिक लीज पर तीस सालों के लिए दिए जाने का फैसला करा लिया गया है जो पद का सीधा दुरुपयोग है.

डॉ ठाकुर ने कहा है कि तत्कालीन प्रमुख सचिव डॉ देवेश चतुर्वेदी ने इसे हितों का टकराव बताते हुए यह सरकारी भूमि और भवन विभागीय मंत्री की निजी संस्था को देने का विरोध किया था जिसके बाद उन्हें विभाग से हटा दिया गया और सरकारी मशीनरी पर दवाब डाल कर यह विधिविरुद्ध फैसला कराया गया. अतः उन्होंने याचिका में इस आवंटन को निरस्त करने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही किये जाने की मांग की है.

समाचार अंग्रेजी में पढ़ें – 

Azam Khan Jauhar Shodh Sansthan PIL: HC seeks reply  

In the PIL filed by social activist Dr Nutan Thakur against Minorities welfare minister Azam Khan getting allotted government land and building of Maulana Jauhar Ali Shodh Sansthan at Rampur to his private Maulana Jauhar Ali Trust at abnormally low annual lease rent of Rs. 100, in blatant disregard to the rules and regulations, Lucknow bench of Allahabad High Court has sought reply from the State government in 2 weeks. The case shall be listed thereafter.

The bench consisting of Justice S N Shukla and Justice Rajan Roy said that it is a very serious matter and facts must be explained before the Court.

The PIL says that Azam Khan pressurized the government authorities to grant 1500 sq yard government land and building built at the cost of Rs. 9.83 crores to his private trust for 30 years lease for a nominal annual rent of Rs. 100, while completely ignoring the law formulated by the Supreme Court in identical matters of land allotment to Sourav Ganguli, Subhash Ghai and Kushabhai Thakare memorial Trust.

Dr Thakur said that the then Principal Secretary Dr Devesh Chaturvedi had strongly opposed this move calling it a case of direct conflict of interest after which he was removed from the post and the government machinery was forced to get this illegal order passed.

Hence, in the petition she has sought quashing of the allotment order, along with action against guilty officials.

सामाजिक कार्यकर्ता डॉ.नूतन ठाकुर सं संपर्क : 94155-34525

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