Snapdeal जैसी कंपनियां कैसे ठग रही हैं भारतीयों को, सुनिए एक पीड़ित पत्रकार की जुबानी

देश में कॉरपोरेट अंधेरगर्दी के जरिए अरबों का धन्धा ग्राहक से अपना पता, पहचान और चेहरा छिपा कर किया जा रहा है!

क्या आपको पता है देश में ई-बिजनैस की दिग्गज कंपनी स्नैपडील अपना पता, पहचान और चेहरा छिपाते हुए सालाना अरबों रुपए का कारोबार कैसे कर रही है? कमाल तो यह कि इसके व्यापार में सहयोगी कंपनियों का भी यही हाल है। कॉरपोरेट क्षेत्र में (खास तौर पर स्नैपडील में) इन दिनों एक अजीब गोरखधंधा चल रहा है जिसकी जानकारी केवल भुक्तभोगी को ही हो सकती है, लेकिन उसके पास इसका कोई इलाज नहीं है।

संवेदनशून्य हो चुकी राजनैतिक व्यवस्था का नमूना है देहरादून में प्रस्तावित एक नया विधानसभा भवन!

उत्तराखण्ड विधानसभा हेतु एक नया भवन देहरादून के रायपुर में बनाने के लिए एन.बी.सी.सी. द्वारा जारी टेंडर से स्पष्ट है कि प्रदेश सरकार का इरादा गैरसेंण को राजधानी बनाने का नहीं हैऔर वह देहरादून से राजधानी को अन्यत्र नहीं ले जाना चाहती। उसने न केवल रायपुर में विधानसभा भवन, बल्कि सचिवालय भवन बनाने के लिए भी टेंडर भी जारी कर दिया है। देहरादून में पहले से ही विधानसभा भवन और सचिवालय भवन होते हुए भी दोबारा देहरादून में ही विधानसभा भवन और सचिवालय भवन निर्माण के टेंडर जारी करने से स्पष्ट है कि प्रदेश सरकार का पक्का इरादा देहरादून को ही प्रदेश की स्थायी राजधानी बनाने का है। सरकार का यह फ़ैसला पर्वतीय क्षेत्र के विकास हेतु आमजन की गैरसेंण को राजधानी बनाने की इच्छा के खिलाफ़ है।