कला के नाम पर मनमानी, चप्पल पर तिरंगा !

कहते हैं कला को सीमाओं में नहीं बांधना चाहिए. लेकिन एक तय सीमा से परे स्वतंत्र कला कभी-कभी मजा किरकिरा भी कर देती है. चप्पल पर तिरंगे को उभारना कला के अतिरेक को ही दर्शाता है.