भाषा के प्रति दूसरों को सचेत करनेवालों को स्वयं की त्रुटियों पर भी ध्यान देना चाहिए

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विकास मिश्रा जी ने हिंदी भाषा की वर्तनी संबन्धी त्रुटियाँ बताईं- ”पत्रकारिता में हिंदी का नरक युग” नामक लेख में। हिंदी भाषा की शुद्धता पर ध्यान देने के लिए निश्चत रूप से मिश्राजी धन्यवाद के पात्र हैं। मेरे विचार से हिंदी भाषा में की जाने वाली कुछ त्रुटियाँ ऐसी हैं, जो चलन में हैं और उनसे भाषा की बड़ी क्षति भी नहीं है। जिस तरह उन्होंने बताया कि नरक को नर्क लिखना। हाँ, कुछ त्रुटियाँ ऐसी की जाती हैं, जो वास्तव में भाषा समझने वाले पाठक को दु:खी करती हैं, असहनीय हैं और भाषा के विकास के लिए हानिप्रद हैं।