राजस्थान में हफ्ते भर में चौथे किसान ने आत्महत्या की

भूकंप के बाद तबाह हुए नेपाल में भारत ने जो सक्रियता दिखाई है, वह तारीफ के काबिल है. लेकिन अगर अपने देश में देखें तो किसान खुदकुशी का मामला किसी तबाही से कम नहीं है. हर रोज जाने कितने किसान मर रहे हैं. लेकिन केंद्र और राज्य सरकारें पूरी बेशर्मी से इन मौतों को नकार रही हैं. ये सरकारें साफ-साफ किसान विरोधी दिख रही हैं. जिस देश की आबादी की बहुत बड़ी संख्या खेती पर निर्भर हो, उस देश में जब खेती तबाह हो जाए और किसान कर्ज के बोझ तले दबकर आत्महत्या कर रहा हो तो इससे बड़ा संकट क्या होगा.

किसान खुदकुशी मामले में आईएएस सूर्य प्रताप सिंह ने बाराबंकी के डीएम के बयान को गैर-जिम्मेदाराना करार दिया

Surya Pratap Singh : बाराबंकी में सत्ता की चौखट पर आशाराम ने फ़ासी लगाई. बैंकों और सूदखोरों के तगादे से त्रस्त किसान आशाराम ने शनिवार देर रात बाराबंकी में डीएम आवास के सामने पेड़ से फांसी लगाकर जान दे दी. रविवार सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों व एडीएम पीपी पॉल ने पुलिस को सूचना दी. आशाराम ने डीएम के नाम संबोधित दो पेज के सूइसाइड नोट में सूदखोरों के दबाव की बात लिखने के साथ ही सीएम से अपने अंतिम संस्कार में शामिल होने का आग्रह भी किया है.

खराब फसल से परेशान किसान ने डीएम ऑफिस के बाहर लगाई फांसी

बाराबंकी : दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘आप’ की रैली के दौरान किसान गजेंद्र सिंह की मौत का मामला अभी शांत भी नहीं हो पाया था कि उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया है। रविवार को सुबह बाराबंकी में डीएम आवास के सामने किसान का शव लटका मिला। इसके बाद यहां ‌हड़कंप मच गया।

 

रविवार को बाराबंकी में डीएम ऑफिस के सामने पेड़ से झूलता आसाराम का शव

गजेंद्र की मौत : खुदकुशी कैसे?

दिल्ली के सीएम केजरीवाल का यह कहना है- ‘‘रैली बंद न करके भूल की।’’ और आशुतोष के पहले के कथन – ‘‘अब कभी होगा, तो केजरीवाल को पेड़ पर चढ़ने को कहेंगे।’’ इन दोनों में कतई अपराध बोध नहीं झलकता, बल्कि सियासत के पुट स्पष्टतः दिखाई देते हैं। 

किसान सुसाइड के बहाने न्यूज चैनलों की पड़ताल और भारत में खेती-किसानी का भविष्य

Ramprakash Anant : NDTV के पत्रकार ने अभी अभी तीन बातें रखीं कि मरने वाले किसान की सत्रह बीघा फसल बर्बाद हो गई है। रैली में आने से पहले उसने जिन रिश्तेदारों से बात की उससे यही पता चलता है कि वह अपने क्षेत्र के किसानों की स्थिति की ओर इस रैली का ध्यान आकर्षित करना चाहता था। गजेन्द्र के भाई भी आजकल पर यही बात कह रहे हैं। बीजेपी के सिद्धार्थ नाथ कह रहे हैं कि वह पीड़ित किसान नहीं था. वह आप का कार्यकर्ता था।

शाबास टीवी चैनलों! पूरी बहस ‘आप’ बनाम पुलिस पर फोकस रखा, वसुंधरा और मोदीजी का नाम तक न आने दिया

Sandhya Navodita : मौत के मुक़दमे की घंटों लम्बी बहस में महारानी वसुंधरा, मोदीजी और कांग्रेस का नाम तक नहीं आ पाया. यह बड़ी उपलब्धि है. साँच को आँच नहीं आई. यह साबित हुआ कि केजरीवाल और उनकी पार्टी ही मौत के लिए ज़िम्मेदार है. थोड़ी देर में यह भी साबित किया जा सकता है कि देश में अब तक जो तीन लाख किसानों ने आत्महत्या की है उसके ज़िम्मेदार भी केजरीवाल हैं. यह बड़ी बात है टीवी चैनलों ने किसान की बदहाली के मुद्दे पर एक शब्द भी चर्चा न होने देने में सफलता हासिल की, और पूरी बहस में आप पार्टी और पुलिस के बीच ही मामला बनाये रखा. जिसे बाद में रेफरी भाजपा ने आकर हल किया. आप के मुजरिमों के बहुत रोने गाने के बाद भाजपा का दिल पसीजा. उन्होंने कहा कि वैसे तो ज़िम्मेदार केजरीवाल एंड पार्टी ही हैं पर अगर कोई पुलिस वाला भी दोषी पाया गया, जिसकी कोई संभावना नहीं है, तो उसे भी बख्शा नहीं जाएगा.

इसी तरह गुजरात में ‘सीएम नरेंद्र मोदी’ को खत लिखकर एक और किसान ने की थी आत्महत्या

दौसा के किसान गजेन्द्र की आत्महत्या पर सभी दल अब अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकने लगे हैं लेकिन ऐसे कई गजेन्द्र गुजरात में भी हैं. गुजरात के जामनगर जिले के कल्य़ाणपुरा तालुका के छिजवड़ गांव के अनिरुद्ध सिंह जाड़ेजा  ने भी ठीक गजेन्द्र की ही तरह 4 अक्टूबर 2012 को नरेन्द्र मोदी के नाम पत्र लिखकर आत्महत्या कर ली थी. उस समय नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे. 

देखिये एक मोदी समर्थक इस किसान की मौत को कैसे विश्लेषित करता है…

Ajit Singh : मैं हमेशा से ये लिखता कहता आया हूँ कि ये जो किसान के नाम पे फ़र्ज़ी आत्महत्या दिखाई जा रही है और ये जो फ़र्ज़ी किसान दिखाए जा रहे हैं ये फर्जीवाड़ा बंद होना चाहिए। आज तक जितनी भी किसान आत्म ह्त्या हुई हैं उनकी वृहद् जांच होनी चाहिए। उससे पता चलेगा कि कितनी ही natural deaths को किसान द्वारा आत्म ह्त्या बता दिया जाता है। न जाने कितने लोग depression के मरीज हो के और बाकी अन्य निजी कारणों से आत्मह्त्या करते हैं। उन्हें किसान द्वारा आत्महत्या नहीं माना जा सकता। मैं हमेशा कहता हूँ की प्रत्येक किसान आत्महत्या को कायदे से study कर एक श्वेत पत्र लाया जाए जिस से समस्या की जड़ तक पहुंचा जा सके।

गजेन्द्र चुनाव लड़ चुका था, सैकड़ों वीआईपियों को साफा बांध चुका था, आत्महत्या की कोई वजह नहीं थी…

दिनेशराय द्विवेदी : मेरे ही प्रान्त राजस्थान के एक किसान ने आज दिल्ली में अपनी जान दे दी, तब आआपा की रैली चल रही थी। उस के पास मिले पर्चे से जिसे हर कोई सुसाइड नोट कह रहा है वह सुसाइड नोट नहीं लगता। उस में वह अपनी व्यथा कहता है, लेकिन उस नें घर वापसी का रास्ता पूछ रहा है। जो घर वापस लौटना चाहता है वह सुसाइड क्यों करेगा? जिस तरह के चित्र मीडिया में आए हैं उस से तो लगता है कि वह सिर्फ ध्यानाकर्षण का प्रयत्न कर रहा था। उस ने हाथों से पैर से भी कोशिश की कि वह बच जाए। पर शायद दांव उल्टा पड़ गया था। वह अपनीा कोशिश में कामयाब नहीं हो सका। हो सकता है उसे उम्मीद रही हो कि इतनी भीड़ में उसे बचा लिया जाएगा। पर उस की यह उम्मीद पूरी नहीं हो सकी।

‘आप’ की प्री-प्लांड स्क्रिप्ट थी गजेंद्र का पेड़ पर चढ़ना और फंदे से लटकना!

Abhai Srivastava : गजेंद्र की चिट्ठी की आख़िरी लाइन, ‘कोई मुझे बताओ, मैं घर कैसे जाऊंगा?’ जाहिर है कि ये सुसाइड नोट नहीं। मीडिया क्लिप में साफ सुनाई पड़ रहा है कि जब कुमार विश्वास भाषण दे रहा था तब आवाज़ आई, ‘लटक गया’, फिर विश्वास हाथ के इशारे जैसे कह रहा है कि ‘लटक गया है, स्क्रिप्ट के अनुसार नाटक पूरा हुआ’.  भाइयों AAP ने एक व्यक्ति की हत्या की है। ये भी ध्यान देने की बात है कि गजेंद्र के घर में 2 भतीजियों की आज शादी है, इसका मतलब उसके घर में ऐसा आर्थिक संकट नहीं जैसा प्रोजेक्ट हुआ है। भाई, ये बहुत बड़ी साज़िश है।

आशुतोष जैसा एक मीडियॉकर पत्रकार और बौनी संवेदना का आदमी ही इतनी विद्रूप बातें बोल सकता है!

Vishwa Deepak : गजेन्द्र नामक ‘किसान’ की आत्महत्या के बारे में आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष कहते हैं- ”यह अरविंद केजरीवाल की गलती है. उन्हें मंच से उतर जाना चाहिए था.उन्होंने गलती की. अगली बार मैं केजरीवाल को कहूंगा कि वो मंच से उतर पेड़ पर चढ़ें और लोगों को बचाएं.”

Live खुदकुशी फिल्माते मीडियाकर्मी, स्टेज पर खड़ा अहंकारी मुख्यमंत्री, पुलिस से गुहार लगाते शातिर नेता, अविचल मुस्काते पुलिसवाले…

Nadim S. Akhter : फिल्म ‘पीपली लाइव’ Anusha Rizvi ने बनाई थी और आज देश की राजधानी दिल्ली में ‘पीपली लाइव’ साकार हो कर जी उठा. सब कुछ वैसा ही. वही खुदकुशी की सनसनी, गर्म तवे पर रोटी सेंकने को आतुर मीडिया-नेता-प्रशासन की हड़बड़ी और दर्शकों-तमाशाइयों का वैसा ही मेला, वही हुजूम. सब कुछ जैसे एक लिखी स्क्रिप्ट की तरह आंखों के सामने होता रहा. एक पल को तो समझ ही नहीं आया कि मनगढंत फिल्म पीपली लाइव देख रहा हूं या फिर हकीकत में ऐसा कुछ हमारे देश की राजधानी दिल्ली के दिल यानी जंतर-मंतर पर हो रहा है !!!

किसान की खुदकुशी पर पाणिनी आनंद की कविता…

Panini Anand : यह नीरो की राजधानी है. एक नहीं, कई नीरो. सबके सब साक्षी हैं, देख रहे हैं, सबके घरों में पुलाव पक रहा है. सत्ता की महक में मौत कहाँ दिखती है. पर मरता हर कोई है. नीरो भी मरा था, ये भूलना नहीं चाहिए.

किसान की खुदकुशी और बाजारू मीडिया : कब तक जनता को भ्रमित करते रहोगे टीआरपीखोर चोट्टों….

(भड़ास के संपादक यशवंत सिंह)


उदात्त दिल दिमाग से सोचिए. इस एक किसान की खुदकुशी का मामला हो या हजारों किसानों के जान देने का… सिलसिला पुराना है… महाकरप्ट कांग्रेस से लेकर महापूंजीवादी भाजपा तक के हाथ खून से रंगे हैं…. अहंकारी केजरीवाल से लेकर बकबकिया कम्युनिस्ट तक इस खेल में शामिल हैं. कारपोरेट-करप्ट मीडिया से लेकर एलीट ब्यूरोक्रेशी और विकारों से ग्रस्त जुडिशिरी तक इस सिस्टमेटिक जनविरोधी किसानविरोधी खेल में खुले या छिपे तौर पर शामिल है… ताजा मामला दिल्ली में संसद के नजदीक जंतर मंतर पर केजरीवाल के सामने हुआ इसलिए सारी बंदूकें केजरीवाल की तरफ तनवा दी गई हैं क्योंकि इससे देश भर में किसानों को मरने देते रहने के लिए फौरी तौर पर जिम्मेदार महापूंजीवादी भाजपा, महाकारपोरेट परस्त मोदी और लुटेरी भाजपा-कांग्रेस समेत अन्य जातिवादी करप्ट क्षेत्रीय राज्य सरकारों के मुखियाओं के बच निकलने का सेफ पैसेज क्रिएट हो जाता है और भावुक जनता मीडिया के क्रिएट तमाशे में उलझ कर ‘आप’ ज्यादा दोषी या दिल्ली पुलिस ज्यादा दोषी के चक्कर में फंस कर रह जाती है.

डाक्टर पति के ‘गे’ होने, 5 साल तक फिजिकल रिलेशन न बनने और टार्चर से परेशान एम्स की महिला डाक्टर ने जान दी

दिल्ली के एम्स अस्पताल के एनस्थीसिया विभाग में कार्यरत सीनियर रेजीडेंट 31 वर्षीय महिला डॉक्टर प्रिया वेदी ने हाथ की नस काटकर आत्महत्या कर ली. प्रियका का शव दिल्ली पुलिस ने रविवार की सुबह पहाडगंज के होटल प्रेसीडेंसी से बरामद किया. प्रिया का शव बेड पर पड़ा हुआ था और हाथ की नस कटी हुई थी. पुलिस को शव के पास ही एक सुसाइड नोट मिला.

मेरी इस सुंदर-सी फेसबुक दोस्त ने कल आधी रात के बाद सुसाइड कर लिया और मैं अनजान रहा…

Yashwant Singh : मेरी इस सुंदर-सी फेसबुक दोस्त ने कल आधी रात के बाद सुसाइड कर लिया और मैं अनजान रहा… अपने फेसबुक फ्रेंड और प्रतिभाशाली युवा लिक्खाड़ नितिन ठाकुर की पोस्ट पढ़कर ठिठक गया. दुबारा-तिबारा पढ़ा. अंशु सचदेवा ने खुदकुशी कर ली. उन्होंने यह जानकारी देते हुए अंशु का फरवरी महीने का एक स्टेटस शेयर किया जिसमें अंशु सचदेवा ने लिखा है: ”वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना ना हो मुमकिन, उसे एक खूबसूरत मोड़ दे के छोड़ना अच्छा”. यह सब पढ़ के सोचा कि देखूं, कहीं अंशु सचदेवा मेरी फ्रेंड लिस्ट में तो नहीं. देखा तो ऐसा ही निकला. अंशु सचदेवा मेरी फेसबुक फ्रेंड हैं. 16 अप्रैल तक उन्होंने अपना स्टेटस अपडेट किया हुआ है. उनकी वॉल और उनकी पोस्ट्स और उनकी तस्वीरें देखकर कोई अंदाजा नहीं लगा सकता कि यह खूबसूरत संगीतमय लड़की अचानक सुसाइड कर लेगी.

सहारा में अब उठने लगे विरोध के स्वर, कई यूनिटों में भगदड़ के हालात

सहारा में सैलरी न मिलने का असर दिखने लगा है। वाराणसी और देहरादून समेत कई यूनिटों में कर्मचारियों में भगदड़ मचने की सूचनाएं हैं। वाराणसी में थोक में लोग लंबे अवकाश पर जाने लगे हैं। तेज प्रताप सिंह, विवेक सिंह, त्रिपुरेश राय, दीपक राय, बाबू राम, राहुल सिंह, राकेश यादव, अशोक चौबे, सुद्दोधन आदि बिना बताये अवकाश पर चले गए हैं। देहरादून से निधि सिंह, सुधीर सिंह, ममता सिंह, सरिता नेगी, शक्ति सिंह लंबे समय से अवकाश पर हैं। वाराणसी में स्टाफ की कमी से संस्करण मर्ज किये जा रहे हैं।

सहारा की जो आज स्थिति है उसमें प्रदीप मंडल का आत्महत्या करना शुरुआत भर है…

Pradeep Srivastav : सहारा इंडिया के कर्मचारियों, वर्करों, अधिकारियों की स्थिति को लेकर मेरे जैसे ढेर सारे लोग चिंतित हैं। चार माह से वेतन न मिलने कारण आर्थिक तंगी में जीवन काट रहे लखनऊ में सहारा इंडिया के वरिष्ठ अधिकारी प्रदीप मंडल द्वारा आज आत्महत्या करने से मन बहुत दुखी है। सहारा में प्रदीप मंडल जैसे ढेर सारे अधिकारी ऐसे हैं जिन्हें चार-पांच माह से वेतन नहीं मिला है।

यूपी में किसान आत्महत्याओं का दौर और हरामी के पिल्लों द्वारा महान लोकतंत्र का जयगान

Yashwant Singh : कौन इनकी मौत को मुद्दा बनाएगा। ये ना पूंजीपति हैं। ये ना टीआरपी हैं। ये ना शहरी हैं। ये ना संगठित हैं। हम सब अपने अपने खेल में उलझे हैं और हम सबकी निहित स्वार्थी खेलकूद से उपजे अभावों की जेल में ये आम किसान कैद हैं। इस कैद की नियति है मौत। शायद तभी इनकी मुक्ति है। सिलसिला जारी है।  मनमोहन रहा हो या मोदी, माया रही हो या मुलायम। सबने पूंजी के खिलाडियों को सर माथे बिठाया। किसानों को सबने मरने के लिए छोड़ दिया। ये मरते थे। मर रहे हैं। मरेंगे। कभी बुंदेलखंड में। कभी विदर्भ में। जहाँ कहीं ये पाये जाते हैं वहीँ मौत का फंदा तैयार पड़ा है। कब कौन कहाँ लटक रहा है, हम सब नपुंसक की भाति चुपचाप इसका इंतज़ार कर रहे हैं। महान लोकतंत्र और अदभुत राष्ट्र की जयगान करने वाले हरामी के पिल्लों पर थूकता हूँ।

जाने-माने भोजपुरी गायक पवन सिंह की पत्नी ने खुदकुशी कर ली

Vinayak Vijeta : जाने-माने भोजपुरी गायक पवन सिंह की पत्नी ने मुंबई स्थित अपने आवास पर खुदकुशी कर ली है। हालांकि अभी तक इस बात का खुलासा नहीं हो पाया है कि आखिर उन्होंने ऐसा क्यों किया। पवन सिंह का विवाह पिछले दिसम्बर माह में बिहार के भोजपुर जिला मुख्यालय आरा में उनके बड़े भाई की साली से काफी धूमधाम से हुआ था। इस विवाह में कई राजनीतिक फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी हस्तियां सम्मिलित हुई थीं।

पन्ना के कलेक्टर पर केंद्रीय विद्यालय प्राचार्या ने यौन शोषण का आरोप लगा आत्महत्या की कोशिश की

(कलक्टर और प्राचार्या की फाइल फोटो. पीड़िता की पहचान छुपाने के लिए उनके चेहरे को फोटोशॉप के जरिए ब्लर कर दिया गया है.)

पन्ना : केंद्रीय विद्यालय के प्राचार्या ने पन्ना जिले के प्रशासनिक मुखिया कलेक्टर आर.के. मिश्र पर दो बार जबरदस्ती शारीरिक सम्बन्ध बनाने का गंभीर आरोप लगाया है. इससे पन्ना के साथ-साथ पूरे प्रदेश के प्रशासनिक हलके में सनसनी फ़ैल गई है. शनिवार की सुबह लगभग 9 बजे केंद्रीय विद्यालय की प्राचार्या ने मानसिक प्रताड़ना के चलते फिनायल पी कर आत्महत्या करने की कोशिश की. विद्यालय के स्टाफ ने गंभीर हालत में प्राचार्या को जिला चिकित्सालय में भरती कराया है जहां उनका इलाज चल रहा है.

काम के दबाव के कारण दबंग दुनिया अखबार के खंडवा मार्केटिंग इंचार्ज शैलेंद्र ने आत्महत्या की

दबंग दुनिया अखबार के मार्केटिंग विभाग में कार्यरत शैलेंद्र शर्मा के बारे में एक दुखद सूचना आ रही है कि उन्होंने दो दिन पहले खंडवा के एक होटल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. चर्चा है कि उन्होंने यह कदम काम के अत्यधिक दबाव के कारण उठाया. आरोप है कि दबंग दुनिया के सीईओ द्वारा उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था. वे खंडवा में दबंग दुनिया के मार्केटिंग एवं सर्क्यूलेशन इंचार्ज थे.

किसान मर रहे हैं, मोदी सपने दिखाते जा रहे हैं, मीडिया के पास सत्ता की दलाली से फुर्सत नहीं

Deepak Singh :  प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री बनने के बाद कौन सुध लेता हैं किसानों की? महाराष्ट्र में और केंद्र में दोनों जगह भाजपा की सरकार पर हालत जस के तस। यह हाल तब हैं जब नरेंद्र मोदी को किसानों का मसीहा बता कर प्रचार किया गया। आखिर क्यों नई सरकार जो दावा कर रही हैं की दुनिया में देश का डंका बज रहा हैं पर उस डंके की गूंज गाँव में बैठे और कर्ज के तले दबे गरीब और हताश किसान तक नहीं पहुँच पाई? क्यों यह किसान आत्महत्या करने से पहले अपनी राज्य सरकार और केंद्र सरकार पर भरोसा नहीं कर पाया की सरकार आगे आएगी और कुछ मदद करेगी?

सिरसा के युवा, प्रतिभाशाली और हंसमुख पत्रकार धीरज बजाज ने क्यों की आत्महत्या?

हरियाणा के सिरसा जिले के युवा पत्रकार धीरज बजाज का आत्महत्या कर लेना पत्रकारों में चर्चा का विषय है. सभी यही आपस में बात कर रहे हैं कि आखिर सुसाइड के पीछे कारण क्या रहा. कहते हैं कि धीरज बजाज ने मानसिक परेशानियों से तंग आकर आत्महत्या कर लिया. धीरज के ऐसा कदम उठाने से उनके परिवार और उन्हें चाहने वाले स्तब्ध हैं. धीरज इन दिनों ‘सच कहूं’ समाचार पत्र के ब्यूरो चीफ थे. साथ ही स्थानीय समाचार-पत्र ‘थर्ड वे’ के संपादक भी थे धीरज बजाज.

धीरज बजाज

सेलरी न मिलने से पाकिस्तानी पत्रकार के आत्महत्या करने पर दुख जताया

The Delhi Union of Journalists (DUJ) is concerned over the reported suicide of a Pakistani journalist a few days back owing to financial problems following non-payment of his salary for four months by the Royal TV management. The DUJ also expresses support and solidarity with the Pakistan Federal Union of Journalists (PFUJ) which held countrywide protests today.

डीआईजी गोरखपुर डा. संजीव गुप्ता और एसपी पीलीभीत सोनिया सिंह को जेल भेजा जाए : सुबोध यादव

: मृतक सिपाहियो के परिजनों को 50-50 लाख का मुआवजा मिले : इटावा। उत्तर प्रदेश पुलिस एसोषियेषन के अध्यक्ष सुबोध यादव ने आत्महत्या करने वाले दो पुलिस कर्मियों के परिजनों को 50-50 लाख रूपये मुआवजा व डीआईजी गोरखपुर डा0 संजीव गुप्ता व एसएसपी पीलीभीत सोनिया सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की मांग की है। उन्होंने इस सम्बन्ध मे मुख्यमंत्री को पत्र भी भेजा है।

डीआईजी गोरखपुर के लखनऊ स्थित घर पर कांस्टेबल सुसाइड मामले का सच क्या है…

हमने डीआईजी गोरखपुर के लखनऊ स्थित गोमतीनगर आवास पर कांस्टेबल अरुण कुमार की आत्महत्या के सम्बन्ध में अरुण कुमार के मामा बलराम चौधरी से बात की. उन्होंने हमें बताया कि वे पिछले करीब डेढ़ माह से लखनऊ में डीआईजी गोरखपुर के मकान पर रह रहे थे जिनसे वे अपने तीन मोबाइल नंबर 098076-89970, 091258-66210, तथा 073983-47607 से लगभग रोज बात करते थे. आरआई, गोरखपुर देवी दयाल ने बताया कि वे डीआईजी गोरखपुर कार्यालय से सम्बद्ध थे और दिनांक 23 नवम्बर को डाक लेकर लखनऊ गए थे. वहीँ इस बारे में डीआईजी रेंज कार्यालय ने बताया कि अक्टूबर 2014 में उनकी उस कार्यालय से सम्बद्धता समाप्त हो गयी थी.

चिटफंड घोटाले में फंसे पत्रकार कुणाल घोष की फोटो लेते वक्त मीडिया कर्मियों पर लाठी चार्ज

शारदा चिटफंड घोटाले में फंसे सांसद कुणाल घोष की फोटो ले रहे मीडिया पर कोलकाता पुलिस ने लाठी चार्ज कर दिया। पुलिस ने मीडिया कर्मियों पर उस समय पर लाठी चार्ज कर दिया जब वह कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल के बाहर मीडियाकर्मियों पर लाठी चार्ज किया। दरअसल, पुलिस की ओऱ से अस्पताल में भर्ती कुणाल घोष की फोटो लेने से मना कर रही थी। सांसद कुणाल घोष ने गुरुवार को जेल में आत्महत्या का प्रयास किया था। सांसद घोष सारधा चिटफंड घोटाले के आरोपी हैं और आत्महत्या के समय वह जेल में थे।

दो परम चिटफंडियों सुब्रत राय और कुणाल घोष के दिन और मुश्किल हुए

: कुणाल घोष ने आत्महत्या की कोशिश की तो सुब्रत रॉय के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज हुआ : कोलकाता से खबर है कि तृणमूल कांग्रेस के निलंबित सांसद एवं सारदा घोटाला मामले में आरोपी कुणाल घोष ने शुक्रवार को प्रेसीडेन्सी सुधार गृह (जेल) में नींद की गोलियां खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की. घटना के बाद जेल अधीक्षक, डॉक्टर और ड्यूटी पर मौजूद एक कर्मचारी को निलंबित कर दिया गया और पूरे प्रकरण की जांच के लिए गृह सचिव बासुदेव बनर्जी के नेतृत्व में समिति गठित की गयी है. साथ ही घोष के खिलाफ आत्महत्या की कोशिश करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है. पश्चिम बंगाल के सुधारगृह सेवा मंत्री एच ए सफवी ने कहा कि घोष ने दावा किया था कि उन्होंने नींद की गोलियों खा ली है. उन्हें सरकारी एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है. उन्हें पिछले साल गिरफ्तार किया गया था और उसके बाद से वह जेल में हैं.

दिवाली की पूर्व संध्या पर विदर्भ के छह किसानों ने आत्महत्या की.. कहां है नेशनल मीडिया.. किधर हैं राष्ट्रीय नेता…

विदर्भ (महाराष्ट्र) में किसानों की आत्महत्याओं का दौर जारी है. कांग्रेस की सरकार से विदर्भ के लोग नाराज थे क्योंकि वह किसानों के राहत के लिए कुछ नहीं कर रही थी और ऋण जाल में फंसकर किसान लगातार आत्महत्याएं करते जा रहे थे. लोगों ने बड़ी उम्मीद से बीजेपी और नरेंद्र मोदी को वोट दिया था. लेकिन किसानों की समस्या जस की तस है. भाजपा और नरेंद्र मोदी को अभी बड़े-बड़े मुद्दों और बड़ी-बड़ी बातों से फुरसत नहीं है कि वे किसानों की तरफ झांकें. काटन और सोयाबनी की खेती-किसानी से जुड़े छह किसानों ने दिवाली की पूर्व संध्या पर खुदकुशी की है. कार्पोरेट मीडिया को नमो नमो करने से फुरसत नहीं है कि वह आम जन और आम किसान की खबरें दिखाए. किसी इलाके में खेती के संकट के कारण छह किसानों की आत्महत्या बड़ी खबर है और देश को हिलाने वाली है. लेकिन कोई मीडिया हाउस इन किसानों के घरों तक नहीं पहुंचा और न ही इनकी दिक्कतों पर खबरें दिखाईं. जिन घरों के मुखियाओं ने दिवाली से ठीक पहले आत्महत्या कर ली हो, उन घरों में दिवाली कैसी रही होगी, इसकी बस कल्पना की जा सकती है. विदर्भ खबर नामक एक ब्लाग पर विदर्भ जन आंदोलन समिति के अध्यक्ष किशोर तिवारी ने किसान आत्महत्याओं के बारे में विस्तार से लिखा है. इसे पढ़िए और सोचिए कि नेता जो बोलता है, मीडिया जो दिखाता है, क्या उतना ही देश है, क्या उतनी ही खबरें हैं, या बातें-खबरें और भी हैं जिन्हें लगातार दबाया, छुपाया, टरकाया जा रहा है.

-यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया