दिवाली की पूर्व संध्या पर विदर्भ के छह किसानों ने आत्महत्या की.. कहां है नेशनल मीडिया.. किधर हैं राष्ट्रीय नेता…

विदर्भ (महाराष्ट्र) में किसानों की आत्महत्याओं का दौर जारी है. कांग्रेस की सरकार से विदर्भ के लोग नाराज थे क्योंकि वह किसानों के राहत के लिए कुछ नहीं कर रही थी और ऋण जाल में फंसकर किसान लगातार आत्महत्याएं करते जा रहे थे. लोगों ने बड़ी उम्मीद से बीजेपी और नरेंद्र मोदी को वोट दिया था. लेकिन किसानों की समस्या जस की तस है. भाजपा और नरेंद्र मोदी को अभी बड़े-बड़े मुद्दों और बड़ी-बड़ी बातों से फुरसत नहीं है कि वे किसानों की तरफ झांकें. काटन और सोयाबनी की खेती-किसानी से जुड़े छह किसानों ने दिवाली की पूर्व संध्या पर खुदकुशी की है. कार्पोरेट मीडिया को नमो नमो करने से फुरसत नहीं है कि वह आम जन और आम किसान की खबरें दिखाए. किसी इलाके में खेती के संकट के कारण छह किसानों की आत्महत्या बड़ी खबर है और देश को हिलाने वाली है. लेकिन कोई मीडिया हाउस इन किसानों के घरों तक नहीं पहुंचा और न ही इनकी दिक्कतों पर खबरें दिखाईं. जिन घरों के मुखियाओं ने दिवाली से ठीक पहले आत्महत्या कर ली हो, उन घरों में दिवाली कैसी रही होगी, इसकी बस कल्पना की जा सकती है. विदर्भ खबर नामक एक ब्लाग पर विदर्भ जन आंदोलन समिति के अध्यक्ष किशोर तिवारी ने किसान आत्महत्याओं के बारे में विस्तार से लिखा है. इसे पढ़िए और सोचिए कि नेता जो बोलता है, मीडिया जो दिखाता है, क्या उतना ही देश है, क्या उतनी ही खबरें हैं, या बातें-खबरें और भी हैं जिन्हें लगातार दबाया, छुपाया, टरकाया जा रहा है.

-यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया

बंगलूरू के टीवी पत्रकार ने फांसी लगा कर जान दी

बंगलूरू। एक चैनल के पत्रकार संजय, 29 वर्ष, ने शुक्रवार की रात घर में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। वे चैनल में कापी एडिटर थे।

हम दोनों बेहद अकेले हैं, जीने का कोई मकसद नज़र नहीं आता, ऐसे में हम पति-पत्नी अपनी मर्जी से जान दे रहे हैं!

( File Photo Sanjay Sinha )

Sanjay Sinha : आप घर से निकलिए। लोगों से मिलिए। लोगों से बातें कीजिए। यहां फेसबुक पर आइए। अपने दिल की बात कहिए। जो दिल में आए वो कीिजए। यूं ही किसी को गले लगा लीजिए। किसी के घर यूं ही पहुंच जाइए कि आज आपकी चाय पीनी है। किसी को घर बुला लाइए कि चलो आज चाय पीते हैं, साथ बैठ कर। किसी से मुहब्बत कर बैठिए। किसी को मुहब्बत के लिए उकसाइए। कुछ भी कीजिए। लेकिन खुद को यूं तन्हा मत छोड़िए। खुद को यूं गुमसुम मत रखिए। खुद में ऊब मत पैदा होने दीजिए। कुछ न सूझे तो किसी अनजान नंबर पर फोन करके यूं ही बातें करने लगिए, लेकिन करिए जरूर।

खालिक भाई, आप यूं खुदकुशी करने वाले तो नहीं थे

Vivek Bajpai : अभी-अभी इटावा से एक हमारे मित्र ने एक दुखद समाचार सुनाया है, उसने बताया है कि इटावा से एबीपी न्यूज संवाददाता मो. खालिक ने पारिवारिक कलह से तंग आकर आत्महत्या कर ली हैं, अगर ये सच है (मेरा दिल अभी भी मनाने को तैयार नहीं हैं) तो खालिक की मौत से इटावा ने एक निर्भीक पत्रकार खो दिया हैं. मुझे पता है कि खालिक भाई आप जहां गए है वहां से कभी कोई नहीं वापस आता है, हमेशा दूसरों से सख्त सवाल पूछने वाले मो. खालिक आज मैं तुमसे आखिरी सवाल पूछ रहा हूं, क्यों किया ऐसा जघन्य अपराध. क्योंकि तुम ऐसे तो नहीं थे.  Mohd Khaliq BHAI REST IN PEACE.

इटावा में एबीपी न्यूज के संवाददाता ने ट्रेन से कटकर दी जान

इटावा से खबर है कि एबीपी न्यूज के संवाददाता मोहम्मद खालिक ने रविवार को नीलांचल एक्सप्रेस के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली. तलाशी लिए जाने पर उनकी जेब से एक सुसाइड नोट भी मिला है जिसको लेकर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. बताया जाता है कि मोहम्मद खालिक करियर और परिवार को लेकर तनाव में चल रहे थे. 44 वर्षीय मोहम्मद खालिक इटावा के मोहल्ला साबितगंज कोतवाली सदर निवासी थे. वे एबीपी न्यूज के संवाददाता थे. वे रविवार को इटावा रेलवे स्टेशन पर अपराह्न करीब साढ़े तीन बजे पहुंचे. वहां कई लोगों से बातचीत करने के बाद वह प्लेटफार्म एक से पश्चिमी की ओर चले गए.