वे चेहरे जो आजतक न्यूज चैनल चलाते हैं

Vikas Mishra :  गौर से देख लीजिए इन चेहरों को। यही हैं जो आजतक न्यूज चैनल चलाते हैं। सबसे किनारे मंद मंद मुस्कुरा रहे हैं हमारे मैनेजिंग एडिटर सुप्रिय प्रसाद। उनके बगल में हैं इनपुट हेड संजय ब्रागटा पीछे ठहाका मार रहे हैं हमारे आरसी भाई।

ऑफिसियल ट्रिप है, ऐश कीजिए कंपनी के खर्चे पर… कोई पत्रकारिता नहीं है यह सब…

Sanjaya Kumar Singh : भड़ास पर छपी ‘पुण्य प्रसून बाजपेयी, सुप्रिय प्रसाद, राहुल कंवल और दीपक शर्मा कल क्यों जा रहे हैं लखनऊ?‘ खबर को पढ़कर एक पुरानी घटना याद आ गई। जनसत्ता के लिए जब मेरा चुनाव हुआ उन्हीं दिनों जमशेदपुर से निकलने वाले एक अंग्रेजी अखबार के संवाददाता की हत्या हो गई थी। पत्रकारिता को पेशे के रूप में चुनने से पहले मुझे यह तय करना था कि कितना खतरनाक है यह पेशा। मैंने जमशेदपुर के एक बहुत ही ईमानदार पत्रकार से इस बाबत बात की। उनसे लगभग सीधे पूछा था कि जिस पत्रकार की हत्या हुई उसकी तो कोई खबर मुझे याद नहीं है। दूसरी ओर आप एक से बढ़कर एक खबरें लिखते हैं – क्या आपको डर नहीं लगता धमकी नहीं मिलती।