वरिष्ठ टीवी पत्रकार के साथ रेलवे ने किया बड़ा धोखा… देखें ये वीडियो…

Girijesh Kumar : भारतीय रेल की सवारी लगातार महँगी होती जा रही है, रेलवे को इंटरनैशनल बना देने के बड़े बड़े दावे किए जा रहे हैं. इन सबके बीच भारतीय रेल सेवा की हैरान करनेवाली हक़ीक़त देखिए. मैंने झाँसी से दिल्ली लौटने के लिए AC-3 में ऑनलाइन टिकट बुक किया. टिकट कन्फ़र्म था. मैसेज भी आ गया था. लेकिन ऐन यात्रा के दिन जो मैसेज आया उसमें मेरी सीट स्लीपर क्लास में दी गयी थी.

बिना किसी सूचना के, बिना किसी बातचीत के. ये उस रेलवे का हाल है जहाँ फ़ीडबैक लेने के लिए बाक़ायदा कॉल सेंटर चल रहे हैं. स्टेशन पर पहुँचकर TI अनिल कुमार शर्मा जी से पूछा तो पता चला AC3 के डिब्बे नहीं लगे इसलिए स्लीपर में ऐडजस्ट कर दिया. मैंने कहा चलिए ठीक है, बाक़ी के पैसे तो मिलेंगे? बताने लगे कि वो एक पर्ची देंगे, जिसे लेकर मैं कहीं जमा कराने जाऊँगा, तब मुझे बक़ाया राशि मिल सकेगी. बहरहाल ट्रेन चलने का वक़्त हो रहा था, लिहाज़ा मैं भागकर अपने स्लीपर क्लास बर्थ पर आ गया हूँ. देखना ये है कि जादुई पर्ची वाले TI साहब से अपनी क़िस्मत की पर्ची ले पाता हूँ या नहीं.

पूरे प्रकरण से संबंधित वीडियो ये है :

वरिष्ठ टीवी पत्रकार गिरिजेश कुमार की एफबी वॉल से.

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रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा की संसदीय सीट गाजीपुर में रेलवे स्टेशन पर अराजकता का आलम देखिए…

गाजीपुर लोकसभा संसदीय सीट से जीते मनोज सिन्हा रेल राज्य मंत्री हैं. उन्हीं के इलाके गाजीपुर के रेलवे स्टेशन पर अराजकता का आलम है. ट्रेनें आती और रुकती हैं लेकिन ट्रेनों का गेट नहीं खुलता और यात्री परेशान हो जाते हैं. टिकट होने के बावजूद यात्री ट्रेन पर चढ़ नहीं पाते. इस समस्या के संज्ञान में आने पर रेलवे स्टेशन पहुंचे भाजपा नेता राघवेंद्र सिंह, समाजसेवी सुजीत सिंह प्रिंस और अन्य लोग. इन लोगों ने देखा कि 12-12-2017 को पवन एक्सप्रेस रात्रि लगभग 11.30 बजे को स्टेशन पर आती है लेकिन इसका गेट नहीं खुलता. टिकट होने के बावजूद भी यात्री ट्रेन पर चढ़ नहीं पा रहे थे.

अराजकता का यह आलम देख भाजपा नेता राघवेंद्र सिंह, सुजीत सिंह प्रिंस और अन्य लोगों ने विरोध शुरू करत दिया और स्टेशन मास्टर के पास पहुंचे. उन्हें बताया गया कि AC बोगी से लेकर स्लीपर बोगी तक के गेट नहीं खुल रहे हैं. भाजपा नेता राघवेंद्र सिंह ने इस प्रवृत्ति का जमकर विरोध किया. तभी स्टेशन के कुछ कर्मियों ने गेट खुलवा कर यात्रियों को ट्रेन पर चढ़ाने की बजाय यात्रियों से ही गुंडों की तरह व्यवहार करना शुरू कर दिया. यहां तक कि गाजीपुर सिटी स्टेशन पर पुलिस वालों ने भी यात्रियों के साथ बदतमीजी करना शुरू किया और गर्दन पकड़ने लगे. इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सुजीत कुमार सिंह प्रिंस ने तैयार किया है, जो नीचे दिया जा रहा है…

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नवभारत टाइम्स के दामोदर व्यास ने रेल प्रशासन को दिया करारा जवाब

मुंबई : जरा सी बारिश में भी घंटों लोकल ट्रेन रोककर मुंबईकरों की नाक में दम कर देने वाले पश्चिम रेलवे का जनसंपर्क विभाग इन दिनों हॉलीवुड की महानतम धुन का प्रचार कर रहा है। गत दिनों पश्चिम रेलवे के जनसंपर्क विभाग के ईमेल आईडी से एक न्यूज़ सभी मीडियाकर्मियों को भेजी गई.. इसमें कहीं भी रेलवे का नामोनिशान तक नहीं था… लेकिन ओफिशियल तौर पर ये मेल आई थी इसलिए भाई लोग लग लग गए इस न्यूज़ को लगाने में…

ये न्यूज़ नवभारत टाइम्स के दामोदर व्यास जी को भी रेलवे की तरफ से भेजी गई थी। दामोदर व्यास ने तुरंत उस ईमेल आईडी पर रिप्लाई भेज कर पश्चिम रेलवे को जमकर लताड़ लगाई और पूछा कि इस न्यूज़ से पश्चिम रेलवे का क्या लेना-देना है। कुछ पत्रकारों ने तो रेल मंत्री को भी ट्वीट कर ये जानकारी दे दी कि आपका पश्चिम रेलवे कर क्या रहा है.. कुछ अखबार वालों ने पश्चिम रेलवे की इस बेसिर पैर की प्रेस रिलीज को हूबहू छाप दिया कि कहीं पश्चिम रेलवे का पीआरओ नाराज न हो जाये और उनका विज्ञापन न रोक दे या उनका टिकट कन्फर्म न करे। आप भी पढिये पश्चिम रेलवे की वो प्रेस रिलीज।

यूट्यूब पर सनसनी से हॉलीवुड का भारत में अवतरण

डिजिटल वर्ल्ड आजकल यूट्यूब पर नये शानदार वीडियो से चहक उठा है। हॉलीवुड की महानतम धुनों में से कुछ धुनों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की लय में पिरोकर बनाये गये ये वीडियो दर्शकों के दिलों पर छा रहे हैं। ये वीडियो अविस्मरणीय फिल्म ‘टाइटेनिक’ की थीम पर आधारित है, जिसमें भारतीय वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया गया है।

इंडियन जैम प्रोजेक्ट के संस्थापक और प्रणेता तुषार लाल ने एक बार फिर बहुत ही खूबसूरत धुन पेश की है, जो आरएमएस टाइटन पर रहे उस महान संगीतकार को समर्पित है, जो बहुत ही ज़िंदादिल थे। जब टाइटन जहाज डूब रहा था, उन क्षणों में भी उस महान संगीतकार ने अपने संगीत को रुकने नहीं दिया। यह उत्तम रचना ऐसे ही जिंदादिल इंसानों के प्रति एक संगीतमय उपहार है।

22 वर्ष की युवावस्था में ही प्रतिभावान तुषार ने भारतीय शास्त्रीय वाद्य यंत्रों के ज़रिये पश्चिमी धुन पर सजी संगीतमय प्रस्तुतियों का रागबद्ध कर लिया था, जिसको यूट्यूब पर 1 करोड़ 30 लाख से ज्यादा लोगों ने पसंद किया है। उनका हॉलीवुड धुन का प्रसिद्ध रूपांतर ‘पायरेट ऑफ दी कैरिबियन’ उनके अन्य रूपांतर ‘हैरी पॉटर’, ‘गेम ऑफ थ्रोन’ इत्यादि की तरह 40 लाख से अधिक लोगों द्वारा देखा गया। डिजिटल दुनिया के अलावा तुषार ने सम्पूर्ण देशभर के साथ-साथ दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण पूर्वी एशिया और विश्व के अन्य देशों में अपने लाइव परफॉमेंस दिये हैं। 4 वर्ष की कम उम्र में ही तुषार ने वाद्य यंत्रों के ज़रिये अपनी साधना का सफ़र शुरू कर दिया था और यूट्यूब पर अपने चैनल पर 12 वीडियो के ज़रिये वह अपने सफ़र में बहुत आगे निकल चुके हैं।

वर्तमान में यूट्यूब पर टाइटेनिक का भारतीय संगीत संस्करण दर्शकों में सुर्खियाँ बटोर रहा है और हफ्ते के भीतर ही साढ़े 3 लाख से ज्यादा लोग इसका लुत्फ उठा चुके हैं। वर्तमान संगीत पृष्ठभूमि में तुषार ने अपनी एक पहचान बना ली है और विश्वस्तर पर ‘कम्पोजिंग लीजेंड’ के रूप में दस्तक देने के लिए वह पूरी तरह तैयार हैं।

मुंबई से पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट शशिकांत सिंह की रिपोर्ट. संपर्क : 9322411335

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चार महीने पहले रेल टिकट कटाने वाले इंजीनियर का दिवाली पर घर जाने का सपना ‘वेटिंग’ ही रह गया!

Yashwant Singh : हरिद्वार में कार्यरत इंजीनियर गौरव जून महीने में तीन टिकट कटाए थे, दिल्ली से सहरसा जाने के लिए, अपनी बहनों के साथ। ट्रेन आज है लेकिन टिकट वेटिंग ही रह गया। चार्ट प्रीपेयर्ड। लास्ट मोमेंट में मुझे इत्तिला किया, सो हाथ पांव मारने के बावजूद कुछ कर न पाया। दिवाली अपने होम टाउन में मनाने की उनकी ख्वाहिश धरी रह गई। दिवाली के दिन अपने जिला-जवार में होने की चार महीने पहले से की गई तैयारी काम न आई।

धन्य है अपना देश। धन्य है भारतीय रेल। हां, सत्ता के नजदीकियों के चिंटू पिंटू मिंटू जब चाहें टिकट कटा कर सीधे रेल मंत्रालय से कन्फर्म करा सकते हैं। सरकार चाहें कांग्रेसियों की हो या संघियों की, इस देश में दो देस होने का एहसास बना रहेगा।

भड़ास एडिटर यशवंत की उपरोक्त एफबी पोस्ट पर आए कमेंट्स में से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं…

Dushyant Rai प्रभु ने जुलाई में वेटिंग खत्म करने की बात कभी नहीं की थी।वाजपेयी सरकार के मालगाड़ियों के लिए अलग लाइनों (DFC)को अगर यूपीए सरकार ने पूरा किया होता तो आज किसी को टिकट के लिए रोना नहीं पड़ता। इस सरकार को एक साथ कई मोर्चों पर काम करना पड़ रहा है।मालगाड़ी में अधिकतम लोडिंग करने से पुरानी पटरियों की भी हालत गंभीर हो गई थी।हजारों किलोमीटर के ट्रैक पर 2 करोड़ यात्रियों को ढोते हुए भी यह सरकार अगले साल से कई रूटों पर DFC शुरू कर देगी। लगभग 3 साल में सबको बर्थ मिलने लगेगी और यात्रा का समय भी काफी कम हो जाएगा।

Rajiv Tiwari दूर तक साफ दिखाने वाला चश्मा लगाइए, मोदी लेंस को बदलकर।

Dushyant Rai अलीगढ़ से कानपुर की यात्रा ट्रेन यात्रा आम आदमी बन कर कीजिए, काम की गति और क्वालिटी देखकर आप को अपने कमेंट के लिए बड़ी शर्म आएगी।

Rajiv Tiwari शर्म आती है दुष्यंत जी, आप जैसे अंध समर्थकों पर, जो यह मानते है भारत निर्माण केवल 3 वर्षों में हुआ है। वरना पहले तो विशाल बियाबान जंगल था यहां। ट्रेन तो लोगों ने देखी ही नहीं थी…हैं ना सही बात।

Yashwant Singh भाई Rajiv Tiwari, दुष्यंत जी अपने पुराने मित्र और खरे आदमी हैं। रेल मंत्रालय से जुड़े हैं। हम लोगों को इनकी बात को गंभीरता से सुनना चाहिए। दूसरा पक्ष हमेशा महत्वपूर्ण होता है। मालगाड़ी और यात्री रेल की लाइन अलग किए जाने की व्यवस्था से निश्चित रूप से फर्क पड़ेगा।

Rajiv Tiwari सहमत हूँ यशवंत भाई, लेकिन पक्ष को संतुलित तरीके से रखना भी एक कला होती है।

Sanjaya Kumar Singh दुष्यंत राय जी, दो नहीं तीन मोर्चों पर कहिए। यूपीए सरकार ने बुलेट ट्रेन भी चला दी होती तो मोदी जी को उसपर भी मेहनत नहीं करनी पड़ती। और मेट्रो चलाया था तो उसका किराया बढ़ाकर खुश होने का मौका भी नहीं मिलता।

Yashwant Singh और ये भी सच है कि 60 साल में कांग्रेस अगर सबको यात्रा सुविधा प्रदान नहीं कर पाई तो प्राइमरी अपराधी हाथ का पंजा ही है। हां, bjp चीजों को ठीक करने के नारे के साथ आई थी तो इससे उम्मीद ज्यादा है और फिलहाल उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सकी है। हो सकता है सही नीति पर अमल करके आगे चीजें ठीक कर दी जाएं, जिसका हम सबको इंतज़ार है।

Rajiv Tiwari संजय जी, बुलेट ट्रेन आने से देश का चहुँमुखी विकास हो जाने वाला है, जैसा पहले की सरकारों ने मेट्रो लाकर किया। चारों ओर सुख शांति, कहीं कोई परेशान नहीं, सर्व सुविधाओं की त्रिवेणी प्रवाहित हो रही है और हर देशवासी उसमें गोते लगाकर पुण्य बटोर रहा है।

Rajiv Tiwari ठीक कहा आपने यशवंत भाई, कांग्रेस ने 60 साल में जो कुछ किया उसका परिणाम उसके सामने है। लेकिन 3 साल में 6 दशकों पुरानी मैली गंगा साफ करने का दावा करने वाले ये बातों के शेर खुद कहाँ खड़े हैं।

Sanjaya Kumar Singh मूल मुद्दा ये है Yashwant Singh जी कि वेटिंग लिस्ट लेने की भी तमीज नहीं है। जब तीन या चार महीने पहले बुकिंग शुरू होती है और छठ के लिए महीने भर बाद ही वेटिंग शुरू हो जाता है तो ये तय होना चाहिए कि वेटिंग कितना बुक करना है, कब तक और जो बुक हो जाए उसे कंफर्म मिलना ही चाहिए। वैसे भी अब जब अंतिम समय पर कैंसल कराने वालों को नहीं के बराबर पैसे मिलते हैं तो कुछ सीटें खाली रह जाएं पर तीन महीने पहले बुक कराने वालों को अंतिम दिन पता चले कि कंफर्म नहीं हुआ और उसे डिफेंड किया जाए कि फलाने ने वो नहीं किया और ढिमाके ने वो नहीं किया – खरा आदमी होना तो नहीं हो सकता। नौकरी हो रही है – उससे मुझे कोई एतराज नहीं है।

Dushyant Rai भाई साहब रेल का नेटवर्क इतना विशाल और इतने बोझ से दबा है कि नई सरकार रेल लाइन बिछाने, विद्युतीकरण और पुरानी लाइन सुधार में लगभग तीन गुना गति से काम कर रही है फिर भी अभी तीन साल लगेगा जनता को अपेक्षित सुविधा मिलने में।

Sanjaya Kumar Singh आप ठीक कह रहे हैं। फिर भी, जब अंतिम समय में कैंसल कराने वाले को टिकट नहीं मिलता है तो क्या यह सुनिश्चित नहीं किया जाना चाहिए (जैसे भी और उसमें छठ स्पेशल ट्रेन में वैकल्पिक आरक्षण मिलने पर चाहिए कि नहीं पूछ लेना शामिल है) कि तीन महीने पहले अपनी जरूरत बताने वाले को निराश नहीं किया जाए। क्या इस जरूरत से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि रेलवे की लाचारी को डिफेंड किया जाए? निश्चित रूप से यह लाचारी 130 करोड़ की आबादी के कारण है और हर कोई नरेन्द्र मोदी होता तो यह स्थिति नहीं आती। पर ये कर दूगां, वो कर दूंगा – कहने से पहले भी यही स्थिति थी।

Shyam Singh Rawat मैं ट्रेन नंबर 15035 व 15036–उत्तरांचल सम्पर्क क्रान्ति एक्सप्रेस का इसकी शुरुआत से ही नियमित यात्री हूं जो काठगोदाम-दिल्ली रूट पर चलती है। यह ट्रेन पहले ISO 9000 तथा ISO 2001-2008 द्वारा प्रमाणित एक अच्छी सेवा थी। अभी 25 सितंबर को इस ट्रेन से दिल्ली जाना हुआ (Coach No.D-9), गाड़ी की हालत बहुत बुरी है। समय-पालन, डिब्बे के भीतर सफाई, कैटरिंग, पानी आदि सब चौपट। यहाँ तक कि मोबाइल चार्जिंग सुविधा भी खत्म। 4 अक्टूबर को इसी ट्रेन नं.–15036 से वापस आने के लिए जब दिल्ली स्टेशन पहुंचा तो नैशनल ट्रेन इक्वायरी सिस्टम पर इसका आगमन-प्रस्थान निर्धारित समय-सारणी के अनुसार ही क्रमश: 15.25 और 16.00 बजे दिखाया जा रहा था। जबकि सच्चाई यह थी कि यह ट्रेन 16.05 पर प्लेट फार्म सं―5 पर पहुंची और वहां से 16.35 पर काठगोदाम के लिए चली। यह ट्रेन अपने गंतव्य पर डेढ़ घंटा विलंब से पहुंची। इसकी शिकायत नये रेल मंत्री पीयूष गोयल से उनके फेसबुक पेज पर की जिसे कुछ ही पलों में डिलीट कर दिया गया था। शायद यह मोदी सरकार की कपटपूर्ण नीति के अनुसार ‘आल इस वैल’ दिखा कर देश में भ्रम का वातावरण बनाने का एक हिस्सा है।

Prashant M Kumar ऐसे में बस यही लगता है कि अपना देश भी परदेस हो गया

Sarwar Kamal इस देश मे दो देश होने का अहसास बना रहेगा

निखिलेश त्रिवेदी भारतीय रेलवे जैसी थी और है वैसी ही आगे भी रहेगी। कायाकल्प की उम्मीद नहीं है।

Pramod Patel यह सरकार भी फेल. . . जनता ने मौका दिया और जनता को ही लुट लिया. . .

Pankaj Kumar अरे बाबा, मैने खुद कोलकाता से मोतिहारी जाने के लिये आज से तीन महीने पहले दो टिकट एसी टू टियर की ली थी। वेटिंग 1 और 2 मिला था। आज तक सीट कंफर्म नहीं हुआ हैं। परिवार को ले जाना है इस हताशे से फ्लाइट से दूसरे रूट से टिकट लिया। जो सबकुछ मिलाकर करीब करीब चौगुना बजट बढ़ गया। सभी रेलवे के मिनिस्टर , अधिकारी कहते फिरते है कि रेलवे घाटे में चल रही है, कोई आदमी बतावें कि जिस दिन उसे यात्रा करना है और उस दिन टिकट उसे आराम से मिल जाये। सभी ट्रेनें सालों भर फ़ूल रहती है। ट्रेन की सीटों से ज्यादा रेलवे के कर्मचारी है। जो दिनभर ऑफिस में गप व डींगें हाँकते और मारते है। सैलरी लेते है सबसे ज्यादा। आखिर क्यों न रेलवे घाटे में जाये।

Sushant Saurav Kya kahein iske liye bjp se jyada congg jimmedar h agar 50 salon m Cong Kam krti to bjp aati hi nhi

Gajendra Kumar Singh प्रभु जी तो जुलाई से वेटिंग खत्म करने की घोषणा की थी । अब तो खुद ही खिसक गये ।

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बिना पैसेंजर वाली आगरा-ग्वालियर पैसेंजर ट्रेन उतरी पटरी से (देखें वीडियो)

भारतीय रेलवे का हाल इन दिनों बहुत खराब है. रेलें आए दिन दुर्घटनाग्रस्त हो रही हैं जिसके कारण लोग ट्रेनों पर चढ़ने से डर रहे हैं. कई ट्रेनें इन दिनों हादसों के दौर से गुजरी हैं जिसमें बहुत सारे लोग हताहत भी हुए हैं. आज आगरा में आगरा-ग्वालियर पैसेंजर ट्रेन की बोगी पटरी से उतर गई. इस घटना के बाद उत्तर मध्य रेलवे के आगरा डिवीजन के अधिकारियों में हड़कंप मच गया. हालांकि ट्रेन में कोई पैसेंजर सवार नहीं था वरना बड़ा हादसा हो सकता था.

बताया जा रहा है ट्रेन यार्ड से प्लेटफार्म पर लगने के लिए जा रही थी, तभी बोगी पटरी से उतर गई. भारतीय रेलवे के हादसे सबसे ज्यादा यूपी में हो रहे हैं. रेल के इन हादसों में लापरवाही भी खूब देखने को मिल रही है. आज आगरा ग्वालियर पैसेंजर ट्रेन की बोगी पटरी से उतरने का हादसा मेन लाइन पर यह हुआ होता तो निश्चित रूप से इसके गंभीर परिणाम हो सकते थे.

आगरा से फरहान खान की रिपोर्ट.

संबंधित वीडियो…

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रेलवे की लूट का एक छोटा सा अनुभव सुना रहे हैं साहित्यकार अरुण माहेश्वरी

Arun Maheshwari : रेलवे की लूट का एक छोटा सा अनुभव… इस बार 1 सितंबर को हम जब दिल्ली सियालदह राजधानी एक्सप्रेस से दिल्ली आ रहे थे, हमारे साथ 3एसी में हमारी घरेलू सहायक मंजुरी कुइल का टिकट भी था। ट्रेन चलने के काफी देर बाद पता चला कि भूल से मंजुरी का टिकट सियालदह राजधानी का न होकर कोलकाता राजधानी का बन गया था जो हावड़ा स्टेशन से छूटती है।

बहरहाल, ट्रेन ख़ाली थी इसलिये मंजुरी को बिना टिकट का यात्री मान कर उसके लिये टिकट के दाम के बराबर जुर्माना देते हुए अर्थात टिकट का दुगुना दाम देकर नया टिकट कराना जरूरी था, और हमने टिकट चेकर को वैसा ही करने के लिये कह दिया। टिकट का मूल दाम बाईस सौ रुपया था, लेकिन टिकट चेकर ने बताया कि आजकल लागू की गई प्रोग्रेसिव मूल्य प्रणाली के अनुसार उसे टिकट का दाम अट्ठाईस सौ रुपये लेना पड़ेगा और उस पर जुर्माना और जीएसटी लगाने पर कुल उनसठ सौ रुपये पड़ेगा। खैर!

ट्रेन में ढेर सारी सीटें ख़ाली जा रही है और यात्री से ‘प्रोग्रेसिव’ मूल्य वसूला जा रहा है! यह कैसी व्यवस्था है, हमारी समझ के परे है! यह क्या इसीलिये संभव हो रहा है क्योंकि रेलवे पर सरकार की इजारेदारी है! कल Suraj Prakash जी की एक पोस्ट पर पढ़ रहा था कि कैसे उन्होंने मुंबई-दिल्ली के बीच की अगस्त क्रांति के डिब्बों में क्षमता से एक तिहाई से भी कम यात्री देखे थे। रेलवे की यात्री किराये की विवेकहीन नीतियों ने भारतीय नागरिकों की रेल यात्राओं में कटौतियाँ शुरू कर दी है। कहना न होगा, यह सब मोदी सरकार की देन है।

साहित्यकार और प्रोफेसर अरुण माहेश्वरी की एफबी वॉल से.

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मोदी-योगी राज में चोरी और चोरों का बोलबाला!

Yashwant Singh : अभी टिकट बुक कर रहा था, तत्काल में। प्रभु की साइट हैंग होती रही बार बार। paytm ने अलग से पैसा लिया और सरकार ने अलग से टैक्स वसूला, ऑनलाइन पेमेंट पर। ये साले भजपईये तो कांग्रेसियों से भी बड़े चोट्टे हैं। इनको रोज सुबह जूता भिगो कर पीटना चाहिए। मुस्लिम गाय गोबर पाकिस्तान राष्ट्रवाद के फर्जी मुद्दों पर देश को बांट कर खुद दोनों हाथ से लूटने में लगे हैं। ये लुटेरे खटमल की माफिक जनता का खून पी रहे हैं, थू सालों।

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कोई योगी भक्त भाजपाई समझाए कि सपा राज का यह महाचोरकट अभी तक यूपी का मुख्य सचिव कैसे बना हुआ है? अब तो बड़े अखबारों ने भी इस लुटेरे को पद पर बनाए रखने को लेकर योगी सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। ये आज के अमर उजाला में छपी न्यूज़ का एक हिस्सा है। पढ़ें और बूझें।

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

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Sanjaya Kumar Singh : जीएसटी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि सर्विस टैक्स 15 प्रतिशत से 18 प्रतिशत हो जाएगा। उन सेवाओं के लिए भी जो सरकार को मुफ्त देना चाहिए पर देती नहीं है या घटिया होती है। आप दूसरों से पैसे देकर जो सेवाएं प्राप्त करते हैं उसके लिए भी सरकार सेवा कर लेती है। मनमोहन सिंह की बेईमान सरकार ने सात प्रतिशत से इसकी शुरुआत की थी जो बढ़ते हुए 15 प्रतिशत थी और जीएसटी के बाद ईमानदार सरकार इसे 18 प्रतिशत कर रही है। जय हो।

वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह की एफबी वॉल से.

इन्हें भी पढ़िए…

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लोअर बर्थ महंगा करने को तत्पर प्रभुजी इन उपायों से भी कराएं रेलवे को भरपूर कमाई :)

रेल मंत्री को सोशल मीडिया पर मिल रहे कुछ नायाब सुझाव, देखें-जानें…. 

रेल मंत्री सुरेश प्रभु अब लोअर बर्थ / विंडो सीट बेचकर रेलवे की आय बढ़ाएंगे. इस लोअर बर्थ और विंडो सीट को पाने के लिए किराया बढ़ाये जाने की तैयारी है. सुरेश प्रभु के राज में रेलवे को कई अन्य तरीकों से भी आय हो सकता है. इस बारे में सोशल मीडिया पर तरह तरह के सुझाव प्रभु को मिल रहे हैं. कुछ सुझाव यहां संकलित करके प्रकाशित किए जा रहे हैं…

1) इंजन के साथ वाले डिब्बे का किराया ज्यादा होना चाहिये क्योंकि ये सबसे पहले पहुंचता है

२) प्लेटफार्म एक पर ठहरने वाली गाड़ियों का किराया भी ज़्यादा वसूला जाना चाहिए

3) पत्नी को मायके छोड़ने जाते हुए पुरुषों से चार गुना किराया भी लिया जा सकता है

४) ट्रेन में लटक कर यात्रा करते हुए स्पाईडर मैन की फीलिंग लेने पर एक्स्ट्रा चार्ज लगना चाहिए

५) पायदान पर गमछा बिछाकर बैठने पर दुगुना किराया होना चाहिए

६) पंखा चलाने, मोबाइल चार्जिंग करने का 50 रुपये सरचार्ज भी लिया जाना चाहिये

७) ट्रेन में बैठकर ताश खेलने पर मनोरंजन कर भी वसूल किया जा सकता है

८) सुबह पटरियों पर प्रेस कांफ्रेंस करने वालों से ५-५ रुपये वसूल करके भी सालाना अरबों रुपए की आय बढ़ाई जा सकती है

९) एक्सप्रेस ट्रेन से ज्यादा, पैसेंजर ट्रेन सैर कराती है, जंगल, पहाड़ और खेतों के बीच रोककर यात्रियों को प्रकृति से संबंध बनाने का अवसर भी प्रदान करती है, अत: उसका किराया भी बढ़ाकर उसे पर्यटन रेलगाड़ी भी घोषित किया जा सकता है

(ह्वाट्सएप / फेसबुक मैसेज)

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सुहेल देव एक्सप्रेस से नरक यात्रा (देखें वीडियो)

मोदी सरकार के इस कार्यकाल में गाजीपुर से सांसद मनोज सिन्हा ने रेल राज्यमंत्री के बतौर एक ट्रेन का तोहफा दिया जिले वासियों को. सुहेल देव एक्सप्रेस. गाजीपुर से आनंद विहार. हफ्ते में तीन दिन चलने वाली यह ट्रेन इन दिनों किसी नरक यात्रा का बोध कराती है. 14 अप्रैल 2016 को गाजीपुर से आनंद विहार के लिए चली इस सुहेल देव एक्सप्रेस के एस3 कोच में वाश बेसिन का पानी फैला गया.

लोग बर्थ के नीचे से सामान निकाल कर सीट के उपर रखने लगे क्योंकि पानी सब कुछ भिगो रहा था. न टीटीई को कुछ दिख रहा था और न कोच अटेंडेंट को. न कोई शिकायत पुस्तिका दी गई और न ही किसी ने संज्ञान लेकर वाश बेसिन ठीक कराया. लग रहा है मोदी के राज में प्रभु की रेल राम भरोसे ही चल रही है. शायद इसी को रामराज कहते हैं क्या?

वीडियो देखने के लिए नीचे क्लिक करें…

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भारतीय रेल के लिए मोदी राज है ‘नर्क काल’, ताजा अनुभव सुना रहे वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ला

Shambhunath Nath : कहीं रेलवे को बेचने की तैयारी तो नहीं!… आज रेलवे की भयानक अराजकता और रेल कर्मचारियों की लापरवाही के साक्षात दर्शन हुए। सुबह मुझे कानपुर शताब्दी (12033) पकड़कर वापस गाजियाबाद आना था। कानपुर स्टेशन से यह गाड़ी सुबह छह बजे खुलती है। कानपुर में मैं वहां जहां रुका था, वह जूही कलाँ दो के विवेक विहार डब्लू-टू का इलाका स्टेशन से करीब सात किमी होगा। सुबह पहले तो बुकिंग के बावजूद ओला ने धोखा दे दिया। वह कैब आई ही नहीं और ड्राइवर ने फोन तक नहीं रिसीव किया। तब मेरे बहनोई स्वयं मुझे छोडऩे आए। इस तरह दो लोगों की नींद में खलल पड़ा।

हम घर से साढ़े पांच पर निकले थे और रास्ते भर यही सोचकर परेशान रहे कि कहीं टाटमिल चौराहे पर जाम न मिल जाए। खैर जब स्टेशन पहुंचे तो 5.48 हो रहा था। अपना सामान उठाए मैं भागता हुआ प्लेटफार्म में दाखिल हुआ तो गाड़ी का कहीं पता नहीं जबकि नियमत: उसे साढ़े पांच पर प्लेटफार्म पर लग जाना चाहिए। आखिर वहीं से यह ट्रेन चलती है। मगर ट्रेन प्लेटफार्म पर आई ही छह बजे। पूरी भीड़ ट्रेन के दरवाजों पर टूट पड़ी। मगर दरवाजे अंदर से ही बंद थे। सब उनके खुलने का इंतजार करते रहे। अब एक आदमी था जिसने एक के बाद एक कोच के दरवाजे खोलने शुरू किए। तेरह कोचों वाली इस ट्रेन के दरवाजे खुलने में ही 15 मिनट लग गए। सारे लोग एकदम से भड़भड़ा कर चढऩे लगे। और ट्रेन पांच मिनट बाद चल दी। अब जो चढ़ाने आए थे वे तो ट्रेन के अंदर तथा जिनको चढऩा था वे बाहर। हंगामा हुआ ट्रेन फिर रुकी और चली।

हमारा कोच सी-7 था। गाड़ी में बैठते ही मच्छरों ने घेर लिया। वृहदाकार के मच्छर जो भनभनाते तो डिस्टर्ब करते और चुप रहते तो हाथों-पांवों में काट लेते। हमे जो इंडियन एक्सप्रेस अखबार दिया गया उसे पढऩे की बजाय हम मच्छरों का शिकार करते रहे। मगर मच्छरों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि ट्रेन में चढ़ा हर मनुष्य परेशान हो गया। औरतें, बच्चे सब तंग। तब मैने अपना रौद्र रूप दिखाया और टिकट चेक करने आए बाबू से कंप्लेंट बुक लाने को कहा। बुक आ तो गई मगर उसमें पहले से जो शिकायतें थीं उन पर ही कोई जवाब नहीं आया था। दूसरी सवारियां भी उखड़ पड़ीं तब एक सफाई कर्मी आया और फर्श पर पोछा लगा गया। फिर जो चाय आई लाई गई उसका पानी ठंडा था। फिर टीटी बाबू को बुलाकर शिकायत की गई तो वेटर ने बताया कि ब्वायलर काम नहीं कर रहा। एक तो ट्रेन वैसे भी डिले थी उस पर उसकी गति ऐसी जैसे बारात चल रही हो।

कानपुर से इटावा आने में ही दो घंटे लग गए। उस शताब्दी से जिसकी स्पीड कम से कम 130 रखी जाती है। और कानपुर-इटावा की दूरी महज 133 किमी की है। फिर राम-राम करते ट्रेन चली तो जो नाश्ता आया वह भी ठंडा और ऊपर से मच्छरों की भरमार। टूंडला पार करने के बाद वह कर्मचारी आया जिसके कंधे पर ट्रेन की सफाई का भार था। उसने बताया कि मच्छर तो आएंगे ही ट्रेन रात को जंगल में खड़ी की जाती है। और हमारे पास हिट है नहीं। उसकी शैली से लग रहा था कि रेलवे सफाई के वास्ते जो सामान इसे मुहैया करवाता होगा उसे यह जरूर बाजार में बेच देता होगा। मजे से गुटखा खाते हुए और खूब फूला पेट लेकर वह जैसे आया था वैसे चला गया।

अलीगढ़ में स्टाप न होते हुए भी ट्रेन रोकी गई और तब कोच में एक अधिकारी आया और उसने हिट उसी कर्मचारी से मंगवाई और छिड़काव करवाया। उसके बाद ट्रेन चली मगर स्पीड वही साठ-सत्तर वाली। इस तरह जिस गाजियाबाद में हमें साढ़े दस पर पहुंच जाना था उस पर हम साढ़े बारह पर उतरे और एक बजे घर आए। समझ में नहीं आता कि रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने शताब्दी में तमाम तरह के सुविधा शुल्क लगाकर कानपुर तक का किराया लगभग 11 सौ रुपये कर दिया है मगर न तो कोई सुविधा बढ़ाई न खानपान की गुणवत्ता ही सुधारी। जबकि दस साल के मनमोहन राज और उसके पहले की सरकारों के वक्त भी शताब्दी जाड़ों के कोहरे के दौरान को छोड़ दिया जाए तो कभी लेट नहीं होती थी।

खाने का हाल यह है कि शताब्दी खाने और नाश्ते के नाम पर दो सौ रुपये और चार सौ रुपये वसूलती है पर नाश्ता ऐसा था कि उसे खाना दूभर। दो स्लाइस और एक डिब्बी मक्खन। न नमक न कालीमिर्च पाउडर। दो ही विकल्प थे या तो दो पीस कटलेट अथवा आमलेट। दोनों ही बेस्वाद और एकरस। पिछले 28 वर्षों से यही परोसते आ रहे हैं। प्रभु ने जब पैसे बढ़ाए थे तो कहा था कि खाने की क्वालिटी सुधरेगी। मगर क्वालिटी तो और गिरी। मजे की बात कि कानपुर और लखनऊ शताब्दी में इतनी भीड़ होती है कि कभी भी दो दिन पहले टिकट नहीं मिल पाती। पर इसका फायदा रेलवे उठाता है कि जो कुछ दे दो खा ही लेंगे। क्या ट्रेन को इस तरह लेट करने तथा साफ-सफाई न करने के पीछे रेलवे को निजी हाथों में देने की तैयारी तो नहीं चल रही है।

(जो कंप्लेंट मैने की उसका नंबर और पावती मेरे पास है। सोचता हूं कि दो दिन बाद रेलवे से पूछा जाए कि मेरी शिकायत पर हुआ क्या।)

अमर उजाला समेत कई अखबारों में संपादक रहे वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल की उपरोक्त एफबी पोस्ट पर आए प्रमुख कमेंट्स इस प्रकार हैं….

Vishwanath Dwivedi रेलवे का यह सामान्य अनुभव है. पता नहीं कब सुधरेगे हम लोग. मच्छर ही नहीं चूहे भी मिलते है शतब्दी में.
Rahul Bhardwaj ये भारत में विमान यात्रा को बढ़ावा देने का परोक्ष तरीका है
gazab kumar ये तो है शताब्दी का हाल, अब ज़रा सोचिए नार्मल ट्रैन का क्या हाल रहता होगा, और नीति निर्माता लोग अपने मुद्दे पर जनता से बहस करवाते हैं। व्यवस्था नहीं सुधरेगी फिर वही होगा कि प्राइवेट को सौंप दिया जाये…
Vir Vinod Chhabra शुक्र है कि आप गोमती एक्सप्रेस में नहीं बैठे। वैसे आप सुषमा जी को भी ट्वीट कर दें। विदेश मंत्री हैं तो क्या हुआ? उनका हृदय विशाल है।
Kaushal Madan सर सभी जगह ये ही हाल है कब सुधरें भगवान जाने
Vinay Oswal सब को साथ लेने के बाद विकास होगा। अभी तो शिकायतें इकठ्ठी की जा रही हैं। फिर विचार करेंगे किस एजेंसी से निस्तारण कराएं। उसके खर्चे भी जोड़े जाएंगे टिकट में। ऐसे में उन एजेंसियों का विकास होगा। आपको गलत फहमी तो नहीं कि किसका विकास किये जाने का लक्ष्य है?
Nitish Shukla आपने चिल्लाकर ‘जय भारत माता’ नहीं बोला, बोलते ही यकीन मानिए सारी तकलीफ कम लगने लगती
Prabhat Mishra 13 मार्च को लखनऊ शताब्दी से कानपुर से आया था, जैसा खराब खाना दिया गया उसे देखकर लग रहा कि रेलवे को डाक्टर भी रेल में रखना पड़ेगा इलाज के लिए.
Rakesh Pandey एक सवाल? कहीं रेलवे की बेचने की तैयारी तो नहीं … एक जवाब! देश के हालात रेलवे जैसे ही हैं।
Om Shanker Porwal मोदीराज में सबसे बदतर व्यवस्था रेलवे की ही है, सारी ट्रेने लेट, गति आराममय, खड़ी तो खड़ी, खाना बदतर, तमाम शिकायतो के बाद भी इसका कोई पुरसाहाल नहीं है।
Akmal Faruqi आपकी एक बात से इत्तेफ़क नही रखता की 12033 अलीगढ में स्टोपेज नहीं है Shambhunath Nath ji 9.05 का शेडयूलड आने का समय है
Shambhunath Nath बहुत से लोग मेरी बहुत-सी बातों से इत्तेफाक नहीं रखते। पर मैं तो वही लिखूंगा जो कानपुर में रेलवे ने एनाउंस किया। कानपुर से ट्रेन खुलते ही एनाउंस होने लगा कि यह ट्रेन यहां से चलकर इटावा और गाजियाबाद रुकेगी। अब अलीगढ़ वालों ने भी पव्वा लगवा लिया होगा। सो इसे रुकवाने लगे। आखिर भाजपा के आदि पुरुष कल्याण सिंह का गृह जिला जो है। पहले इटावा नहीं रुकती थी तो मुलायम राज में रुकने लगी थी।
Akmal Faruqi बहुत से लोग मेरी बहुत-सी बातों से इत्तेफाक नहीं रखते। आपकी इस बात से इत्तेफाक रखता हूँ
Chitaranjannath Tiwaric अच्छे दिन हैं साहब…. थोड़ा विधर्मी, कुलच्छनी ममता बैनर्जी को भी याद कर लिया जाय !!!
Nadim S. Akhter Shambhunath Nath जी, देख पा रहा हूं कि आपको पोस्ट लिखे करीब 35 मिनट हो गए. इस पर लाइक और कमेंट की संख्या को देखते हुए आपको भी अंदाजा लग रहा होगा कि लोग ट्रेन को लेकर कितने जागरूक हैं. जाने दीजिए. सबको आदत हो गई है. कितनों से लड़िएगा. हां, रेलवे से सवाल-जवाब जारी रहे तो बेहतर. अपडेट जरूर दीजिएगा. इंतजार रहेगा.
Anil Maheshwari This catering system in Indian Railways has become a big fraud. Whether you want or not, you have to pay it. It was introduced by Scindia as Railway Minister. The time has come, it should be abandoned. Anyone willing to pay can purchase items from the pantry car as is the case with the trains in the USA. Shambhunath Nath
Shambhunath Nath पेंट्री तो ओवरनाइट जर्नी वाली किसी भी ट्रेन में नहीं लगती। हम या तो स्वयं बाजार से खरीद कर चलें अथवा ट्रेन कहां से हमारे लिए खाने की व्यवस्था करेगा। इटावा और अलीगढ़ में तो सामान्य रोटी-दाल भी ढंग का मिल जाए तो बहुत है। कानपुर से दिल्ली की दूरी कुल 444 किमी की है और शताब्दी इसे पांच घंटे में पूरी करती है। इस बीच भोजन नहीं तो भाव तो मुहैया करवाएं।
Anil Maheshwari Youn are correct. I was talking about this catering business in all the trains, in particular Rajdhani and Shatabdi trains.
Shambhunath Nath ऐसा भी होगा तो रेलवे किसी एक कंपनी को ठेका देगा और अभी भी रेलवे शताब्दी में किसी को ठेका ही देती है। खाना पैक कर उसमें चढ़ा लिया जाता है। चूंकि शताब्दी अधिक से अधिक सात घंटे की यात्रा करती है इसलिए इस दूरी के लिए पेंट्री रखना मुमकिन नहीं। शताब्दी का बटर-चिकेन देख लें तो नानवेज खाना ही छोड़ देंगे। और वेज में वे अरहर की बजाय खेसारी की वह दाल परोसते हैं जिस पर 1975 में बैन लगा दिया गया था।
Anil Maheshwari That is why the choice should be left to the passenger. If one does not like tyhe Railway food, one can bring food from his house or restaurant, as we used to do in the past.
Giriraj Kishore रेलवेज़ क्या हर जन माध्यम को विशिष्ट में बदलने की योजना है। मैंने जबसे रेल में सफ़र करना आरंभ किया रेलवे में इतनी अव्यवस्था पहले कभी नहीं देखी।
Vijay Balyan विमान यात्रा को बढ़ावा देने का परोक्ष तरीका……. अच्छे दिन हैं
राजेश कुमार यादव रेल और रेलकर्मी आपसे कष्ट के लिए क्षमा चाहते हैं, साथ ही रेलवे मे खाली पदों को भरने के लिए आपसे हमारा साथ देने की अपील भी करते हैं ।
Rudresh Kumar मोदी सरकार ने सिर्फ लोगों की जेबे खाली करने के तरीके ढूंढे हैं। सुविधा देने के नहीं।
Anil Kumar Yadav प्राइवेट करने में ही भलाई है। टीटी और जो तोंद वाले भाई साहब गुटका खा कर मज़ा मार रहे थे, उनको भी पता चल जायेगा।
Sanjaya Kumar Singh रेल मंत्री पानी और चखना भिजवाने से ऊपर की शिकायतों का जवाब भी नहीं देते। और फेसबुक वालों को बिल्कुल भाव नहीं देते। ट्वीटर पर शिकायत कीजिए तब शायद सुनें भी।
Shambhunath Nath मैं फेसबुक के जरिये रेलवे मंत्री से जवाब नहीं मांग रहा बल्कि जनता को सचेत कर रहा हूं ताकि वे सब जरा-सी भी असुविधा होते ही शिकायत पुस्तिका में शिकायत दर्ज करवाएं। मेरी लिखित शिकायत को सक्षम अधिकारी ने बाकायदा दस्तखत कर पावती दी है। अलीगढ़ में जब ट्रेन रुकवाई गई तब एक अधिकारी आया और उसने बाकायदा हमारी शिकायत और सीट का भी फोटो लिया। अब कुछ न कुछ तो होकर रहेगा। मैं तो बोड़ चला जाऊँगा शिकायत करने।
Sanjaya Kumar Singh सही बात है। सभी यात्रियों को अपने अधिकारों के प्रति ऐसे ही सचेत रहना चाहिए।
Umesh Kr कही अब आपको देशविरोधी ना घोषित कर दिया जाए
Shambhunath Nath अब मैं आप सब लोगों की तरह इतना कायर तो नहीं। अपन सिर्फ फेसबुक बहादुर ही नहीं हैं कोर्ट तक जाएंगे। ऐसे नहीं यहां हठी और पागलों के बीच डटे हैं।
Rao Deepak पहले सिस्टम को ख़राब करो, फिर बीमार बता के बेच दो।
Vikas Patel भगवान भरोसे रेलवे विभाग…. और सुनने मे आ रहा है कि भोपाल का हबीबगंज स्टेशन का निजीकरण कर बंसल कंम्पनी के दिया जा रहा हैl संम्पूर्ण भारत के यही हाल…
Govind Prasad Bahuguna आपने जिस तरह हालात बयान किये उसको पढकर लगा जैसे मैं खुद सफर ही नहीं बल्कि suffer कर रहा हूँ। मेरा सुझाव है इस लेख को बिना सम्पादित किये रेल मंत्री और रेलवे बोर्ड के चेयरमैन को जरूर भेज दीजिए। आप विख्यात पत्रकार हैं सब आपको जानते हैं कार्यवाही जरूर होगी। नहीं तो फिर रवीशकुमार के साथ इस इश्यू को हाइलाइट करिये ।
Suresh Sharma कार्रवाई होना चाहिए वरना लापरवाह कमिंयो को सबक नही मिलेगा ।
Nikhil Katiyar बुलेट train की तैयारी मे सरकार बिजी है असुविधा के लिये खेद है
Nimish Sharma Sir aapki is shikayat ka me samarthan karta hu,jab shatabdi ka ye hal he to sir mail express aur passenger trains to ram bharose hain
Sujata Choudhary उसके बाद जब मोबाईल पर आवाज आती है रेलवे से कोई शिकायत हो तो कृपया इस नम्बर पर बताएं ,असुविधा के लिए खेद है,।उस समय क्या इच्छा होती है बता नहीं सकती। जब अडानी को समुद्र दिया जा सकता है तो रेलवे क्या चीज है।
Smith Agrawal Delhi bhopal satabdi ka bhi bura haal hai. मैं तो कंप्लेंट करके थक गया, जवाब वही एक पुराना घिसा पिटा सा है। खैर अब तो सरकार देशभक्तो की है तो प्रश्न उठाने का तो सवाल ही नहीं उठता। वैसे भी 2020 तक वेटिंग ख़त्म करनी ही है।
Prakash Kumar Jha हम रेलवे में काम करने वाले कभी शताब्दी राजधानी नहीं चढ़ पाते…. तो उसका एक्सपीरियंस नहीं है, पर खाना सच में खराब मिलता है, उसका कारण है ठेकेदारी सिस्टम में गला काट प्रतियोगिता… जिसके कारण बहुत ऊँचे दाम पर पैंट्री लिया जाता है, ठेकेदार उसका पैसा वसूलने के लिए खराब खाना देते हैं, और ज्यादा पैसे लेते हैं, पूर्णतः निजीकरण जल्द ही होगा, उस समय स्थिति और खराब ही होगा… इतना तय है…
Pratik Bajpai बहुत बुरा हाल है रेलवे का ,विपक्षी रेलवे जैसे मुद्दे उठाने के बजाय ऊना ,नजीब, जैसे फालतू मुद्दे पर समय बर्बाद कर रहे है ।मुझे भी कुछ ऐसे ही एक्सपेरियन्स हुए है
Sudhendu Patel इसे कहते हैं मोदिजी का गुड गवेरनेंस ! प्रभु तो प्यादा ही हैं न गुरू.
Kalyan Kumar वास्तव में रेलवे का जितना बुरा हाल सुरेश प्रभु के कार्यकाल में है, उतना मैंने पहले कभी नहीं देखा…सफाई नहीं, खाना ठीक नहीं, सफर का समय लंबा और पता नहीं और कितनी कमियां समा गई हैं…शताब्दी-राजधानी से बेहतर तो लोकल ट्रेन लगने लगी है…कम से कम खिड़की खोलकर खुली हवा तो ले सकते हैं….फिर अद्भुत भारत के दर्शन भी हो जाते हैं…
Shoeib Khan टिकट लेट बुक कराओ तो चार्ज बढ़ने का प्रावधान लेकिन ट्रैन लेट हो तो कोई हर्जाना नही। मज़ेदार है न ?
Pawan Mishra You got IE in Shatabdi, good
Pankaj Singh प्रभु (सुरेश) को याद कीजिए….सब अच्छा होगा।
gazab kumar रेलवे की व्यवस्था पहले से अगर कुछ बेहतर हुई है तो उसका लाभ, गाजीपुर बनारस और पूर्वांचल के विभ्भिन ज़िलों को ही मिला है, जिसका श्रेय केवल मनोज सिन्हा जी को जाता है, सुरेश प्रभु जी से बेहतर इस विभाग को सुषमा जी देख सकतीं हैं। जब बहुमत में सुरेश प्रभु जी का ये हाल है, तो समर्थन दिए होते तब पता नहीं क्या होता।
Abhay Singhai कल मैं जलगाँव से सागर कामायनी एक्सप्रेस से आया था। ए सी बी1 कोच के टॉयलेट में पानी नहीं था अंदर पोस्टर लगे थे कि सफाई के लिये बाहर दरवाजे पर अंकित मोबाइल पर सम्पर्क करें ,परन्तु कहीं कोई नम्बर नहीं लिखा था। टॉयलेट गन्दे पड़े थे।सब प्रभु की माया है।
Raj Kumar सबसे बुरा ये है कि रेलवे अब आधे से एक घंटे की देरी को देरी मानता ही नहीं है। आपकी अगर छः बजे की ट्रेन है और ६:२० या ६:४० तक ट्रेन नहीं आयी, तब भी रेलवे उसे सही टाइम ही मानता है। और नोटिस बोर्ड पर लेट नहीं दिखता। अब ६:३० पे अनाउन्स होता है की ट्रेन समय पे हैं और ६:०० बजे प्लेटफ़ार्म पे आएगी। जबकि आपकी घड़ी में ६:३० हो रहा है। स्टेशन मास्टर और पूछ ताछ केन्द्र के लोग गुंडागर्दी करते हैं। सवारी को लगता है कि ट्रेन किसी और प्लेटफ़ार्म पर खड़ी है, इसलिए लेट नहीं दिखा रहा है। इससे अफ़रातफ़री का माहोल भी बन जाता है।
Rajesh Kumar बिल्कुल सही कहा सर जी, सफ़ाई व्यवस्था पुरी ठेकेदार के पास है,हॉस्पिटल से मरीज़ प्राइवेट हॉस्पिटल में भेजे जा रहें हैं,दवाइयाँ सीधे उपलब्ध होने की जगह स्थानीय क्रय से आ रहीं हैं, कभी-2 मिलती हैं कभी नहीं भी, कर्मचारी संविदा पर रखे जा रहें हैं, रेल कारखाने जिस चीज़ को ख़ुद बनाते थे और फ़ायदे में रहते थे वही सामान बाहर से ख़रीदा जा रहा है और अब घाटा बढ़ता जा रहा है, ठेकेदार के लोगों को न तो चार्जशीट से डर है न नौकरी जाने का…पद खाली पड़े हैं…अवैध वेंडर और दलालों की पौ बारह है, सारे निर्माण जो रेलवे ख़ुद कराती थी सब ठेके पर
धीरेन्द्र अस्थाना It is same situation in 12003 Lko to Delhi. I never expected such treat by IR.
Somnath Bhattacharya हम सबको भी यह सहना पड़ता है। कहते हैं पर कोई सुनता नहीं। आप बड़े और सम्मानित पत्रकार है शायद बात पहुँच जाये और प्रभु की कृपा हो ।
Pradeep Singh रेलवे की यह दुर्दशा बताती है कि यह कर्मचारियों की लापरवाही है। अपने देश में अच्छे कर्मचारी का चयन नहीँ किया जाता है। सामाजिक न्याय के नाम पर नौकरी दी जाती है। सामाजिक न्याय का साथ दीजिए।
Yogendra Sharma इसके लिए सीधे ठेकेदार और अधिकारी जिम्मेदार हैं। समय-समय पर इसकी न जांच होती है न निगरानी होती है।
Deepak Sootha यात्रियों के सब्र का इम्तिहान तो रोज़ होता है। कोई सुनने वाला नहीं। आपका प्रभु आराधन शायद स्वीकार हो जाय।फिर भी एक ही दिन ( inspection day) का सुधार नज़र आ सकता है। जहाँ तक रेल के बिकने का सवाल है, वह आज नहीं तो कल हक़ीक़त बनना तय है। भोपाल के हबीब गंज रेल स्टेशन से शुरुआत हो चुकी है।

मोदी राज में भारतीय रेल से संबंधित कुछ अन्य कहानियां…

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हिमगिरि एक्सप्रेस के सेकंड एसी में comesum catering ने परोसा सड़ा खाना, चोरों ने ब्रीफकेस उड़ाया

हावड़ा से लखनऊ जाने वाली गाड़ी हिमगिरि एक्सप्रेस के सेकंड एसी के A1 कोच में comesum catering द्वारा मुग़लसराय स्टेशन पर सड़े खाने की सप्लाई की गई। इस सड़े खाने के बारे में पूछने पर वेंडर ने बदतमीजी की। श्री संजीत कुमार, जो कि देवघर में एक सीमेंट व्यवसायी हैं, का 26″ का VIP का मैरून रंग का ब्रीफ़केस क्विल जं. और पटना के बीच में चोरी हो गया। बक्सर में GRP ने आकर खानापूरी करते हुवे फॉर्मल FIR लॉज कर लिया है।

पीड़ित संजीत कुमार का मोबाइल नंबर 8877180561 है। इतने बड़े बैग की चोरी बिना पुलिस और रेलवे स्टाफ के मिलीभगत के संभव नहीं है। फिर इतना सड़ा खाना ये इतने आराम से बेच लेते हैं food inspector पैसे खा के चुप बैठ जाते हैं शायद। जनता त्राहिमाम कर रही है प्रभु।

भड़ास को मिले एक पत्र पर आधारित.

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