स्टार इंडिया के सीईओ उदय शंकर समेत दस के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा

Star India CEO Uday Shankar (File Photo)

NSTPL v. Star India Pvt. Ltd. & Ors

Hon’ble Court of Chief Metropolitan Magistrate, Patiala House, New Delhi, has order FIR to be registered against broadcaster Star India, Uday Shankar and 9 other senior officers of Star for cheating under Section 418 and 420 of IPC.

24st July 2017, New Delhi : Noida Software Technology Park Ltd. (NSTPL) filed a Criminal Complaint along with an application under Section 156 (3) of CrPC on 20.03.2017 against Star India Pvt. Ltd. (SIPL),  and its top Management.

The said application under Section 156 (3) for registration of FIR was listed before the Ld. Chief Metropolitan Magistrate, Patiala House Courts for pronouncement of Order today i.e. 21.07.2017. The Ld. Chief Metropolitan Magistrate has, through an order pronounced in open court, allowed the said application and directed that an FIR may be registered against the Accused for the offences punishable under Section 418 and 420 of the IPC.

NSTPL had filed a complaint against Star India and it 10 top officials including Udey Shankar in February with the Economic offences Wing (EOW) of the Delhi police. When the police failed to take any action in the matter NSTPL moved the court of CMM Patyala house.
NSTPL has alleged that STAR has cheated them and caused financial loss of over 350 crores. According to NSTPL’s lawyer Aditya Wadhwa, “STAR had induced NSTPL into making huge financial commitments by first offering attractive rates which they had no intention to finally offer and later denying signals and making NSTPL blead 8 crores a month.

Accoding to Vaibhav Sethi, NSTPL’s other lawyer, “STAR had published a false RIO (mandatory rate card) and falsly assured NSTPL that it provides these rates to all digital servies providers including MSOs and DTH.

Later on in a landmark judgemetn on 7th December 2015, Telecom Dispute Settlement Appalat Tribunal (TDSAT) ruled in favour of NSTPL  declaring STAR’s ratecard to be illegal and asking them to publish a new ratecard. STAR has challenged this order in Hon’ble Delhi High Court and then Hon’ble Supreme Court. However Hon’rable Supreme Court also upheld the order of Hon’ble TDSAT.

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हिंदी टीवी न्यूज के मसखरेपन के लिए क्या वाकई उदय शंकर, रजत शर्मा और कमर वहीद नकवी जिम्मेदार हैं?

Nadim S. Akhter : दो बातें कहनी हैं. एक तो दिलीप मंडल जी ने हिंदी टीवी न्यूज के -मसखरेपन- के लिए उदयशंकरजी, रजत शर्मा जी और कमर वहीद नकवी जी को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर जिम्मेदार ठहराया है. उनके मन की बात पढ़कर उसका लम्बा-चौड़ा जवाब लिख मारा, लेकिन फिर पुरानी गलती दोहरा गया. सब कुछ ऑनलाइन फेसबुक वॉल पे ही लिख रहा था. अचानक से मेरा कम्प्यूटर बंद हुआ और सब गायब. फिर दुबारा लिखने का मूड सुबह से अब तक नहीं बना. सो हिंदी टीवी न्यूज की गंभीरता को खत्म करने वाली दिलीप जी की बात पर मेरा जवाब फिर कभी.

 

दूसरी बात. टाइम्स नाऊ के न्यूज आवर डिबेट में अर्नब गोस्वामी ने बहस के लिए जिस विषय को चुना, उस पर कुछ बोलना चाहता था, सुबह-सुबह. काम में उलझ गया और फिर लिख नहीं पाया. अभी देखता हूं कि कुछ वेबसाइट्स पर इससे सम्बंधी टिप्पणी प्रकाशित हुई है. मेरे एक मित्र ने तो ये तक कहा है (जाहिर है नीचे मेरी वॉल पे) कि मैं अर्नब का फैन हूं. तो मित्रों ! बात यहां अर्नब के फैन या एसी होने का नहीं है. अगर वे गलत करेंगे (मेरी-आपकी समझ के अनुसार) तो निंदा के भी पात्र होंगे. जैसे कल अर्नब ने अपने डिबेट में भारत की हार का जो विषय चुना, वह पूरी तरह हास्यास्पद था. पहली बार मैंने देखा कि अर्नब के पास बोलने के लिए कुछ नहीं था. वो गालथेथरी कर रहे थे और स्टूडियो में बैठे पैनालिस्ट, अरबाज खान व अतुल वासन, जमकर अर्नब का विरोध कर रहे थे. अर्नब कह रहे थे कि फलां बॉलर को पहले क्यों नहीं लाया, टीम के पास कोई स्ट्रैटेजी नहीं थी, यह शर्मनाक हार थी,..वगैरह-वगैरह.

लेकिन अर्नब क्या बताएंगे कि धोनी के पास कोई स्ट्रैटेजी थी या नहीं थी, ये उन्हें मुंबई के स्टूडियो मैं बैठकर कैसे पता?? और फील्ड में जब कप्तान कोई डिसीजन लेता है, किसी बैॉलर-फील्डर को लगाता है तो उस वक्त उसके दिमाग में एक स्ट्रैटेजी चल रही होती है, उसी के तहत ये सब होता है ना. तो अगर इसी स्ट्रैटेजी के तहत अगर कल टीम इंडिया जीत जाती तब तो अर्नब गोस्वामी और पूरा मीडिया धोनी की तारीफों के पुल बांध देते. और जब हार गए तो पचास इल्जाम. कुल मिलाकर कहूं तो टाइम्स नाऊ के इतिहास में कल पहली बार मुझे अर्नब गोस्वामी और बहस के लिए उनके चुने गए विषय पर तरस आया. कई बार तो अर्नब बगलें झांकते भी नजर आए और एक बार तो वो अपनी बगल में बैठे बहस करते अरबाज खान का हाथ तक पकड़ने लगे. कल तो अर्नब ने हद ही कर दी. ज्यादातर मौकों पर गंभीर विषय चुनने वाले अर्नब गोस्वामी को ये सब करते देख कल अच्छा नहीं लगा.

पत्रकार नदीम एस. अख्तर ने उपरोक्त पोस्ट दिलीप मंडल के इस स्टेटस के जवाब में लिखा है….

Dilip C Mandal : अरनब गोस्वामी ने अगर इंग्लिश TV न्यूज की हत्या की, जैसा कि Outlook वाले कहते हैं, तो हिंदी TV न्यूज चैनलों की उससे भी बुरी मौत के लिए कौन जिम्मेदार है? या फिर यह आत्महत्या का मामला है, जिसके लिए कोई दोषी नहीं है. आखिर किन की लीडरशिप में हिंदी TV न्यूज चैनलों ने मसखरा-युग में प्रवेश किया? जोकर क्यों बन गए पत्रकार… नागिन ने नाग की हत्या का बदला क्यों लिया… TV न्यूज को पीपली लाइव किसने बनाया? हिंदी NEWS चैनलों का डायन-तांत्रिक-मसखरा युग और उसके नायक या खलनायक…  न्यूज का एंटरटेनमेंट हो जाना ग्लोबल मामला है, लेकिन हिंदी न्यूज चैनलों में यह कुछ ज्यादा ही भोंडे तरीके से हुआ. न्यूज बुलेटिन में नागिन ने नाग की हत्या का बदला लिया, स्वर्ग को सीढ़ी तन गई, सबसे महंगी वैश्या की ऑन स्क्रीन खोज हुआ, बिना ड्राइवर के कार चली. मत पूछिए कि क्या क्या न हुआ. और जब ढलान पर चल ही पड़े तो फिर कितना गिरे और किस गटर में गिरे, इसकी किसे परवाह रही.

हिंदी न्यूज चैनलों को पीपली लाइव और हिदी के टीवी पत्रकारों को जोकर बनाने वाले दौर के तीन लीडर हैं. ये तीन नाम हैं – उदय शंकर, क़मर वहीद नकवी और रजत शर्मा. इस दौर पर मैं कभी डिटेल पेपर लिखूंगा. बाकी लोगों को भी लिखना चाहिए क्योंकि बात बिगड़ गई और बिगाड़ने वाला कोई नहीं हो, ऐसा कैसे हो सकता है. इनसे मेरा कोई निजी पंगा नहीं है. इनमें से दो लोग तो किसी दौर में मेरे बॉस रहे हैं. मुझे नौकरी दी है. उनके क्राफ्ट और कौशल पर भी किसी को शक नहीं होना चाहिए. मामला नीयत का भी नहीं है.

और जो एंकर-रिपोर्टर टाइप लोग स्क्रीन पर तमाशा करते नजर आते हैं, और इस वजह से अक्सर आलोचना के निशाने पर होते हैं, उनकी इतनी हैसियत नहीं थी कि मैं उन्हें दोषी ठहराऊं. लेकिन इसमें क्या शक है कि इनके समय से चैनल जिस तरह से चलने लगे, उसकी वजह से आज की तारीख में हिंदी के टीवी पत्रकारों और चैनलों के नाम पर पान दुकानों और हेयर कटिंग सलून में चुटकुले चलते हैं. पत्रकारों का नाम आते ही बच्चे हंसने लगते हैं. इन चैनलों ने मसखरेपन की दर्शकों को ऐसी लत लगा दी कि आखिर में न्यूज चैनलों पर आधे-आधे घंटे के लाफ्टर चैलेंज शो चलने लगे.

होने को तो ये न भी होते और कोई और होता, तो भी शायद यही हो रहा होता, लेकिन जिस कालखंड में हिंदी टीवी चैनलों का “मसखरा युग” शुरू हुआ तब 3 सबसे महत्वपूर्ण प्लेफॉर्म की लीडरशिप इनके ही हाथ में थी. कहना मुश्किल है कि इसमें इनका निजी दोष कितना है, लेकिन अच्छा होता है तो नेता श्रेय ले जाता है, तो बुरा होने का ठीकरा किसके सिर फूटे? इन्होंने अगर नहीं भी किया, तो अपने नेतृत्व में होने जरूर दिया.

एस पी सिंह ने गणेश को दूध पिलाने की खबर का मजाक उड़ाकर और जूता रिपेयर करने वाले तिपाए को दूध पिलाकर भारतीय टीवी न्यूज इतिहास के सबसे यादगार क्षण को जीने का जज्बा दिखाया था. सिखाया कि अंधविश्वास के खंडन की भी TRP हो सकती है. लेकिन मसखरा युग में अंधविश्वास फैलाकर TRP लेने की कोई भी कोशिश छोड़ी नहीं गई. टीवी पर इंग्लिश न्यूज में भी तमाशा कम नहीं है. लेकिन वह तमाशा आम तौर पर समाचारों के इर्द गिर्द है. हिंदी न्यूज में तमाशा महत्वपूर्ण है. खबर की जरूरत नहीं है. न्यूज चैनल कई बार लंबे समय न्यूज के बगैर चले और चलाए गए. किसी ने तो यह सब किया है.

उदय शंकर, क़मर वहीद नकवी और रजत शर्मा ही क्यों? हिंदी न्यूज चैनलों के मसखरा युग में प्रवेश के तीन नायकों की मेरी इस शिनाख्त से कुछ लोग खफा है, तो कुछ पूछ रहे हैं कि यही तीन क्यों? दीपक चौरसिया, आशुतोष, विनोद कापड़ी जैसे लोग भी क्यों नहीं. जिनकी भावनाएं आहत हुई हैं मेरा स्टेटस पढ़कर, उनके लिए मुझे कुछ नहीं कहना. उनसे निवेदन है कि कमेंट बॉक्स में जाकर मेरा स्टेटस फिर से पढ़ लें. और जो जानना चाहते हैं कि “उदय शंकर, कमर वहीद नकवी और रजत शर्मा ही क्यों” उन्हें शायद मालूम नहीं कि हिंदी के न्यूज चेनलों ने जब “नागिन का बदला युग” या “महंगी वेश्या की खोज युग” में प्रवेश किया तो ये तीन लोग देश के सबसे लोकप्रिय तीन चैनलों के लीडर थे. TRP लाने की मजबूरी थी. सही बात है. लोग न देखें, तो चैनल क्यों चलाना.

लेकिन TRP लाने के लिए उन्होंने जो रास्ता चुना, उसकी वजह से आज एक बच्चा भी टीवी पत्रकारों को जोकर और मदारी के रूप में देख कर हंसता है. दीपक चौरसिया, आशुतोष, विनोद कापड़ी जैसे लोग इसलिए नहीं क्योंकि वे स्क्रीन पर जरूर रहे लेकिन उस दौर में इनकी इतनी हैसियत नहीं थी कि कटेंट को निर्णायक रूप से प्रभावित करें.

वे खुद अंधविश्वासी नहीं हैं, लेकिन आपको या आपमें से ज्यादातर को अंधविश्वासी मानते हैं!! उदय शंकर, क़मर वहीद नकवी और रजत शर्मा ने एक खास कालखंड में हिंदी टेलीविजन समाचार उद्योग को अंधविश्वास और मसखरा युग में पहुंचा दिया, लेकिन ये तीनों खुद आधुनिक विचारों के मॉडर्न लोग हैं. इसलिए समस्या इनकी निजी विचारधारा को लेकर नहीं है. बल्कि TRP पाने के लिए बनी उनकी इस सोच को लेकर है कि हिंदी चैनलों का दर्शक मूर्ख और अंधविश्वासी होता है.

इसे मनोरंजन उद्योग की भाषा में “Lowest common denominator” कहते हैं. इसकी परिभाषा यह है- the large number of people in society who will accept low-quality products and entertainment या appealing to as many people at once as possible. लेकिन इसका नतीजा यह भी हुआ कि आज एक बच्चा भी टीवी पत्रकारों को जोकर और मदारी के रूप में देख कर हंसता है.

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धरती के गोला से पीके ठोंकू का स्टार वाले गोला के उदय शंकरवा जी को खुल्ला पत्र

I AM PK THONKOO…. YE UDAY SHANKAR KE LIYE OPEN LETTER HAI…. PLEASE ISE CHHAPIE…. LAGATAR LEKHOONGA…. PEHLE MEN PK LELE THA… AB PK THONKOO HO GAYA HOON…. DHANYAWAAD….

PK

prakash kumar

pkthonkoo@gmail.com

 


आदरणीय उदय शंकरवा जी,

नमस्कार।

उम्मीद है कि आप और भौजी बंढ़िया होंगे। पहले हम तनिक पनवा चबाई लें। हम्ममम.. अब ठीक है। हम हूं पीके ठोंकू। मतलब ई कि हम हूं प्रकाश कुमार ठोंकू और हम पीने के बाद जमकर ठोंकत हूं और सच बोलत हूं। इसीलिएन हमरे दोस्त कहत हैं हमें पीके ठोंकू। समझे का नाही। चलिए सबसे पहिलन आपन को बहुत बहुत बधाई कि आपने स्टार ग्रुपवा को इतना ऊंचाई दिया, तरक्की दिया। आप को हालन में ही पर्सन ऑफ द डिकेड भी चुना गया। क्या बात, क्या बात, ईसबर करे कि आप इसी तरह आगे बढ़त रहिन।

बहरहाल हम मुद्दे की बात पर आवत है शंकरवा भाई। शंकरवाई भाई दरअसल आपने धूम धडाम से स्टार स्पोरटस चैनल में नई जान फूंका, कबड्डी को बहुत ही लोकप्रियन बनाया। हम आपको बताइ रहिन कि हमरे मोहल्लवन का बच्चा लोग किरकिट का बल्ला छोड़न के पूरे दिन कबड्डी कबड्डी करना शुरू कर दिया शंकरवा भाई। बढ़िया है। बहुत ही बढ़िया है। सुनने में तो आवत है कि हिंदुस्तान में खेलन को जिंदा रखन वास्ते आपन के चैनल ने पांच हजार करोड़ के निबेस की प्लानिंग बनाई है। रूपक ताऊ की प्लानिंग तो बहुत ही बढ़िया रहिन। बढ़िया है। बहुत ही बढ़िया है। क्या बात, क्या बात, लेकिन सुनने और देखन में आवत है कि चैनल में आपने अपन और अज्ञानी लोगोन को भर लिया है।

सुनने और देखन में आवत है कि पुरानी स्टार न्यूजवा टीम का रैकेट जोर सोर से चलत है। एक हिन्हा को आपने हेडवा दिया तो इन हिरभवा ने स्टार न्यूजवा टीम का पुराना सपोरटस हेडवा दुरजोग को भर्ती कर लिया। दुरजोगवा आया, तो पता नहि कि कउन कउन कालन गौरन को अपने पीछे लगाई लिया। इसके बात ई हुआ शंकरवा भाई कि अपन-अपन लोगोन को भर्ती करन की लाइन लग गई। भाई शंकरवा जी मान लिया कि न्यूज चैनलवा में ई धंधा बहुत जोर-शोर से चलत है लेकिन स्टार ग्रुपवा भी इस बीमारी का शिकारवा हो जाएगा। ई का हमको बिल्कुल भी उम्मीद न ही थी। भाई शंकरवा जी आपन के जैसे बहुत ही पेसेबर और नामी गिरामी संस्थान में भी ई सब होत है का। आश्चर्य की बात ई बा कि आपने ऐसे-ऐसे लोगन को भर्ती कर लिया जिनका पूरे जीवन में खेलन से कोई लेना-देना कतई भी न न रहिन।

हम आपन को बता दें कि आपक ई सब लोग पूरी जिंदगी खेलन और किरकिट को पानी पी पीकर पी पीकर कोसत रहे। अही लोगन जब आईबीएन चैनल से लतियाए रहिन तो लाख-लाख रुपया महीने से ऊपर की नौकरी आपके ग्रुप में पाई गए। बढ़िया नाही है। बिल्कुल भी बढ़िया नाही है। ऐसा याराना किस काम का शंकरवा भाई, जो आपकी भद पिटवाई रहिन जो काबिल लोगन को रुलाई रहिन। बहुत ही अजीब बात है भाई। हमरी समज में बिल्कल ना आवत है कि जिन लोगन को न क्रिकेट के क में रुचि है और न ही हॉकी के ह में आपन के ही लोगों न उन लोगन को नौकरी दे दी। अब ई लोगनवा स्टार सपोरट्स को कहां ले जाइन रहिन ई आप बहुत ही अच्छी तरह समझ लेना शंकरवा भाई। ई लोगनवा आपको भरत बाजार में नंगा करित रहिन शंकर भाई। हमरी समझ में ई न आवत है शंकरवा भाई जो लोगन और खेल पत्रकार अपनी जिंदगी खेलन को दे दिए, जो खेल के लिए जीवत है खेलन के लिए मरत है, ऊ का आपको कोई सुधि नाही है ऊ लोगोन को आपने कोई जिम्मेदारी नाही दिया।

ऐसे में स्टार सपोरटस कैसे आगे बढ़िन शंकरवा भाई। कैसे आगे बढ़ी। हमने तो ई भी सुना हूं कि आपके गैंग्स आफ स्टारपुर ने ऐसे भी कई लोगनवा को नौकरी का दावत दिया जो पिछले कई सालन से कछु और ही धंधा करत है….आपकी हेचआर टीम ऐसे लोगन के आगे गिड़गिड़ावत है कि मुंबई आइए। हेचआर टीम कहत है कि आपन के लिए बहुत ही अच्छा मौका रहिन। मगर खेल पत्रकार जो जान दिएत रहे पसीना जिंदगी  बहात रहे, ऊ का कोई दावत आपकी एचआर टीम न नाही भेजा। शंकरवा भाई ऐसे कैसे आपका चैनल आगे बढ़त रहि। शंकरवा भाई हमारा काम तो आपका बताना और ठोंकना है। भाई आप अपन लोगन की ओर से भर्ती किए गएन लोगन की बैकग्राउंड की जरा जांच करवाइए। फिर देखिए कि कैसे दूध का दूध और पानी का पानी होइत रहिन।

ऊ कौन है हां करकेशस्थवा। अऊर न जाने कितना और न जानी कैसन कैसन लोगन को भरती कर लिए लिए आप। पूरा झुंडवा का झुंडवा जोड़ लिए। शंकरवा भाई हम आपको बता देत हैं कि ऐसे काम बिल्कुल भी नाही चलत रहिन। हम बहुत ही सीरियसली आप को बता रहा हूं कि बहुत ही गंभीर शिकायत मिलने के बाद ही हमू ने आपन को ठोकन और लिखन का अनुरोध किया। ठीक है शंकरवा भाई। उमीद है कि आप अपन के नाम और पद को देखत हुए इस मामले की जांच जरूर कराइ रहिन। ठीक है। हम अब चलत है। अपना और स्टार ग्रुपवा को ध्यान रखिएगा और हां याद आया। रुपक ताऊ से हमारी राम राम भी बोलिएगा। ठीक हैं शंकरवा भाई। चलिए आप से फिर मुलाकात होगी। जय राम जी की।

आपका दुलारा..सभी का प्यारा

पीके ठोंकू

(नोट: हम पीके ही ठोकत हूं)

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