एक पत्रकार को जीवन में पहली बार ‘अछूत’ होने का अहसास क्यों हुआ?

प्रोफेशनल लाइफ के २८ साल में मैंने खूब भाड़ झोंकी है। करीब ढाई दशक तक मीडिया संस्थानों की शोषण की चक्की में खुद को हँसते- हँसते पिसवाया। जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर और राष्ट्रीय स्तर  पर एक से एक निकृष्ट मालिकों के अधीन काम करने का कटु अनुभव रहा। कुछ संस्थानों की नौकरी को मैंने खुद छोड़ दिया तो कुछ संस्थानों ने मुझे निकाल दिया। प्रोफेशनल लाइफ के पहले पंद्रह साल में मुझे नौकरी जाने का थोड़ा दुःख भी होता था। मन में टीस उठती थी कि कठोर परिश्रम और सत्यनिष्ठा एक झटके में व्यर्थ चली गई, लेकिन पिछले एक दशक से मैं इस मामले मैं बिलकुल संवेदनहीन हो गया हूँ। नौकरी जाना कोई मसला नहीं। 

एचटी बिल्डिंग के सामने सिर्फ एक मीडियाकर्मी नहीं मरा, मर गया लोकतंत्र और मर गए इसके सारे खंभे : यशवंत सिंह

Yashwant Singh : शर्म मगर इस देश के मीडिया मालिकों, नेताओं, अफसरों और न्यायाधीशों को बिलकुल नहीं आती… ये जो शख्स लेटा हुआ है.. असल में मरा पड़ा है.. एक मीडियाकर्मी है… एचटी ग्रुप से तेरह साल पहले चार सौ लोग निकाले गए थे… उसमें से एक ये भी है… एचटी के आफिस के सामने तेरह साल से धरना दे रहा था.. मिलता तो खा लेता.. न मिले तो भूखे सो जाता… आसपास के दुकानदारों और कुछ जानने वालों के रहमोकरम पर था.. कोर्ट कचहरी मंत्रालय सरोकार दुकान पुलिस सत्ता मीडिया सब कुछ दिल्ली में है.. पर सब अंधे हैं… सब बेशर्म हैं… आंख पर काला कपड़ा बांधे हैं…

उफ्फ… दैनिक जागरण अलीगढ़ और ईनाडु टीवी हैदराबाद में हुई इन दो मौतों पर पूरी तरह लीपापोती कर दी गई

अलीगढ दैनिक जागरण के मशीन विभाग में कार्यरत एक सदस्य की पिछले दिनों मशीन की चपेट में आकर मृत्यु हो गई. न थाने ने रिपोर्ट लिखा और न ही डीएम ने कुछ कहा. शायद सब के सब जागरण के प्रभाव में हैं. यह वर्कर 2 दिन पहले वहां तैनात किया गया था. उसका भाई वहां पहले से कार्यरत था. पंचनामा जबरन कर लाश को उठवा दिया गया. बताया जाता है कि अलीगढ़ दैनिक जागरण में शाफ्ट टूट कर सिर में लगने से मौत हुई.

गोरखपुर स्टेशन पर कूड़ेदान में भोजन करता वो युवक और एसी कोच में उबलता मेरा बेइमान मिडिल क्लास मन (देखें वीडियो)

Yashwant Singh : गोरखपुर में आयोजित कंटेंट मानेटाइजेशन की वर्कशाप से बनारस जाने के लिए गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन पकड़ने से पहले एक अजीब दृश्य देखा. एक युवक डस्टबिन में दोनों हाथ डाले मूंगफली बीन-बीन कर खा रहा था. मोबाइल कैमरा आन किया और रिकार्ड करने लगा. मोबाइल कैमरा आन रखते हुए ही उसके नजदीक गए, आहिस्ते से ताकि वह जान न सके कि उसकी रिकार्डिंग हो रही है. देखा तो डस्टबिन में बाकी सारा अखाद्य कूड़ा एक तरफ कर कर के यह युवक सिर्फ मूंगफली के छिलकों के बीच बची साबूत मूंगफली को खोज रहा है और मिलते ही उसे चबा रहा है. (वीडियो देखने के लिए नीचे दिया गया पहला वीडियो लिंक क्लिक करें)

तुम्हारी इस दशा के लिए हम सब पापी हैं दोस्त, हम सब अलग-अलग चुपके-चुपके भोगेंगे, शायद यही हमारा पश्चाताप है, शायद यही हमारी नियति है.