दुनिया में जो इतनी अधिक हिंसा है, वह सब ईसा मसीह और बुद्ध जैसे लोगों की देन है!

Yashwant Singh : आजकल मैं यूजी कृष्णामूर्ति की एक किताब पढ़ रहा हूं, ”दिमाग ही दुश्मन है”. अदभुत किताब है. इसे पढ़कर लगने लगा कि सोचने विचारने की मेरी पूरी मेथोडोलाजी-प्रक्रिया ही सिर के बल खड़ा हो चुकी है. किताब का सम्मोहन-जादू-बुखार इस कदर चढ़ा कि इसे पढ़ते हुए माउंट आबू गया और दिल्ली आने के बाद भी पढ़ रहा हूं, दुबारा-तिबारा. तभी लगा कि किताब के कुछ हिस्से को आप सभी से साझा किया जाए. इस किताब के कुछ पैरे यहां दे रहा हूं, ताकि किताब के अंदर की आग को आप भी महसूस कर सकें. हालांकि पूरी किताब पढ़ने के बाद ही आप संपूर्णता में समझ कायम कर पाते हैं जो अंततः आपको समझाती है कि सारी समझ, विचार, धारणाएं, ज्ञान, कोशिशें, योजनाएं ही आपकी सबसे बड़ी दुश्मन हैं, इन्हें जला डालो, इनसे मुक्ति पा लो, फिर देखो कैसी निश्चिंतता आती है… ध्यान से पढ़िए नीचे दिए गए कुछ पैरों को… इस किताब को जिस भी साथी ने मुझे भेंट किया है, उसका आभारी हूं. फिलहाल तो याद नहीं आ रहा कि किसने दिया पढ़ने के लिए.