उमेश चतुर्वेदी, विनीता यादव, अशोक वेंकटरमानी और उमेश कुमावत की नई पारी

वरिष्ठ पत्रकार उमेश चतुर्वेदी अब आकाशवाणी के साथ जुड़ गए हैं. प्रसार भारती ने उमेश को आकाशवाणी का सलाहकार बनाया है. बलिया के रहने वाले उमेश लंबे समय तक प्रिंट, टीवी, रेडियो और इंटरनेट मीडिया आदि माध्यमों के साथ काम करते रहे हैं.

जनसत्ता में ‘दुनिया मेरे आगे’ स्तंभ शुरू होने की कहानी बता रहे पत्रकार उमेश चतुर्वेदी

Umesh Chaturvedi : नवभारत टाइम्स में जब मेरे गुरू डॉक्टर रघुवंश मणि पाठक के गुरू और हिंदी के प्रकांड विद्वान पंडित विद्यानिवास मिश्र संपादक थे, तब संपादकीय पृष्ठ पर एक स्तंभ सिर्फ रविवार को छोड़कर हफ्ते में छह दिन प्रकाशित होता था -निर्बंध..तब अच्युतानंद मिश्र वहां कार्यकारी संपादक थे..चूंकि मैं हिंदी में एमए करके पत्रकारिता करने आया था, लिहाजा उन दिनों हिंदी की प्रकीर्ण विधाओं मसलन डायरी, गद्यगीत, ललित निबंध आदि से मेरा कुछ ज्यादा ही लगाव था। निर्बंध कुछ-कुछ ललित निबंध जैसा ही स्तंभ था..उन दिनों अपनी भी कच्ची-पक्की लेखनी से लिखे आलेख निर्बंध में छपे।

काश कि बीबीसी अच्युता जी की इस किताब को भी देख लेता

भारतीय जनसंचार संस्थान में हमारे सहपाठी रहे टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार अक्षय मुकुल ने गीता प्रेस पर किताब लिखी है. ‘गीता प्रेस एंड द मेकिंग ऑफ़ हिंदू इंडिया’….उसके आधार पर गीता प्रेस को बीबीसी ने उग्र हिंदुत्व का पैरोकार संस्थान बताया है… बीबीसी की रिपोर्ट में गीता प्रेस को गांधी का विरोधी भी बताया गया है… हालांकि हाल के दिनों में वरिष्ठ पत्रकार अच्युतानंद मिश्र के संपादन में गीता प्रेस के व्यवस्थापक-संपादक रहे हनुमान प्रसाद पोद्दार के पत्रों का संग्रह निकला है-पत्रों में समय-संस्कृति… उसमें शामिल पत्र कुछ और ही कहानी कहते हैं…

स्वप्न दासगुप्ता, रजत शर्मा और रामबहादुर राय को पद्म पत्रकारिता के नाम पर मिलता तो खुशी होती

Shambhunath Shukla : जिन तीन पत्रकारों को पद्म पुरस्कार मिला है उनका योगदान साहित्य व शिक्षा क्षेत्र में बताया गया है। मगर तीनों में से किसी ने भी जवानी से बुढ़ापे तक कोई चार लाइन की कविता तक नहीं लिखी। यहां तक कि नारे भी नहीं। ये तीन पत्रकार हैं स्वप्न दासगुप्ता, रजत शर्मा (दोनों को पद्म भूषण) और रामबहादुर राय को पद्म श्री। पत्रकारों को पद्म पत्रकारिता के नाम पर मिलता तो खुशी होती।

वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल के फेसबुक वॉल से.

हिंदी का ये कौन बड़ा अखबार है जो पहले कांग्रेस का चाटुकार था, आज भाजपा का चाटुकार है

Umesh Chaturvedi : हिंदी पत्रकारिता का वैचारिक बदलाव का दौर चल रहा है..यह बदलाव अंदर से है या सिर्फ दिखावे का..इसे तय पाठक ही करेंगे..हिंदी का एक बड़ा अखबार है..16 मई 2014 से पहले तक पूरे दस साल तक उसके बीजेपी बीट रिपोर्टर का एक ही काम होता था..बीजेपी की आलोचना करना..बीजेपी से जुड़ी रूटीन खबरें नहीं करना..