Why do Lovely Professional University hide Information under RTI Act

: Lovely Professional University hide information what is actual fact in transparency :

To,
The Hon’able Governor of Punjab,
Chandigarh,

Subject : Why do Lovely Professional University hide Information under RTI Act)  

Dear Sir,

I want to bring your kind notice to the state private universities that are looting innocent students with both hands and filling their coffer with money.

पुष्पेन्द्र पाल के माखनलाल विश्वविद्यालय से जाने से छात्रों में गहरी टीस, वीसी से नफरत

पुष्पेन्द्र पाल  सिंह  के बच्चों  की दुनिया  और  क्लास रूम से दूर चले जाने को सिर्फ वही  समझ सकता है, जो उनसे पढ़ा हो या जो उनको करीब से जानता हो। रवीश कुमार जब अपने लेख ‘कभी रवीश कुमार मत  बनना’ में मीडिया और कम्युनिकेशन शिक्षा के दुर्गति की बात करते हैं तो अनायास ही आँखों के सामने अपना माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय घूमने लगता है। कैसे एक कुलपति (कुलनाशपति) किसी अच्छे शैक्षणिक संस्थान को बर्बाद करता है, इसको हम लोगों ने बड़े क़रीब से देखा है। 

माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया प्रारम्भ

भोपाल : माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 201 एवं 2016 में संचालित होने वाले विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए प्रक्रिया प्रारम्भ हो गई है। विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु केवल ऑनलाईन आवेदन ही किये जा सकते हैं।

सुभाष चंद्रा ग्रुप के हिमगिरी जी विश्वविद्यालय का फ्रॉड, छात्र-छात्राएं हो रहे परेशान

Respected Sir, Myself xxx from Dehradun, i got your mail ID from Internet as you are so famous among everyone. The reason for this mail is I need your support and help, as may be you heard about our problem though the means of Media… FOCUS NEWS. 

व्यापमं से भी बड़ा घोटाला!

लीजिए साहब व्यापमं से भी बड़ा घोटाला. बस थोड़ा इंतजार कीजिए इस सड़ांध में इतनी गंदगी मिलेगी की सांस लेना मुश्किल हो जाएगा. खबर पढ़िए व नीचे लिंक देखिए. प्रदेश अभी व्यापम और पीएससी घोटालों के झटकों से उबर भी नहीं पाया था कि उसकी प्रतिष्ठा को एक और झटका लगा है। सांची में खुल रहा नया बौद्ध विश्वविद्यालय औपचारिक शुरुआत के पहले ही गंभीर विवादों में उलझ गया है। विश्वविद्यालय के गैर अकादमिक पदों के लिए हुई नियुक्तियों के जो नतीजे सोमवार एक दिसंबर को घोषित किए गए हैं,  उनमें गंभीर अनियमितताओं की बात सामने आई है।

अर्जियों से लेकर अनशन में बीत गए सत्रह साल, विकलांग अध्यापक को नहीं मिली स्थायी नियुक्ति

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रविन्द्रपुरी स्थित सांसद/प्रधानमंत्री कार्यालय में पत्रक सौंपते डॉ. केशव ओझा

वाराणसी। 17 साल के कड़वे अनुभवों को परे रखकर विकालांग अध्यापक डॉ. केशव ओझा ने बीते 8 सितंबर को जब प्रधानमंत्री मोदी के रविन्द्रपुरी कार्यालय पहुंच अपने अच्छे दिनों के लिए दस्तक देते हुए अर्जी दी थी तो शायद उन्हें नहीं मालूम था, कि सत्ता की सूरत भले ही बदल गयी हो पर सीरत नहीं बदली, महीना भर बीत जाने के बाद भी डॉ. ओझा का प्रार्थना प्रत्र सत्ता की अंधी गलियों में कही गुम हो कर रह गया है और डॉ. ओझा का संघर्ष वहीं का वहीं खड़ा है।

स्वाधीनता संघर्ष के दौरान गांधी ने पत्रकारिता का उपयोग एक हथियार के रूप में किया था

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूविवि के जनंसचार विभाग में महात्मा गांधी की जयंती की पूर्व संध्या पर ‘गांधी, पत्रकारिता एवं समाज’ विषयक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर छात्रों को महात्मा गांधी द्वारा लिखित ‘दक्षिण अफ्रीका के सत्याग्रह का इतिहास’ पुस्तक भेंट की गयी। गोष्ठी में विभाग के प्राध्यापक डॉ. मनोज मिश्र ने कहा कि पत्रकारिता, समाज सेवा एवं राजनीति करने वालों के लिए गांधी आदर्श है। पत्रकारिता के क्षेत्र में सच को उजागर करना पहली जिम्मेदारी है। इसकी शुरूआत स्वयं महात्मा गांधी ने की थी।

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गोष्ठी को सम्बोधित करते डाॅ. मनोज मिश्र