बहनजी हार का कारण खुद को बतातीं तो समर्थक टूट जाते, इसलिए EVM को दुश्मन बनाया!

मायावती के निशाने पर ईवीएम के मायने… राजनीति में अक्सर ईवीएम को मोहरा बना दिया जाता है…  बीएसपी की हार से नाखुश दिख रहे दलित हितों को प्रमुखता से उठाने वाले एक संपादक ने मुझसे निजी बातचीत में बहन मायावती जी रवैये पर खासी नाराजगी जाहिर की. कहा, हार के कारणों की सही से समीक्षा नहीं होगी, तो ईवीएम को गलत ठहराने से बहुजन समाज पार्टी का कुछ भी भला नहीं होगा. बहन जी से मिलकर सबको सही बात बतानी चाहिए, भले ही उसमें अपना घाटा ही क्यों ना हो जाये. मैंने अपने संपादक मित्र से इस मामले पर एक घटना का जिक्र किया. जिसे आपके लिए भी लिख रहा हूं.

क्या संभावना तलाशने को होली बाद यूपी में लगेगा राष्ट्रपति शासन?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के 7 चरणों में से 4 चरण पूरे हो चुके हैं, शेष तीन चरण भी डेढ़ सप्ताह में निपट जायेंगे और ठीक पन्द्रहवें दिन (फाल्गुन शुक्ल चौदस) 11 मार्च को परिणाम आ जायेगा। फिलहाल सत्ता के तीनों दावेदार भाजपा, बसपा व सपा-कांग्रेस गठबंधन एक स्वर में 300 सीटें जीतने का दावा कर रही हैं। चूंकि मतदान प्रक्रिया के बीच किसी तरह हवा के रुख को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, किन्तु नेताओं के भावात्मक आवेश, अमर्यादित शब्दाबली एवं सत्ता के तीनों दावेदारों के निरंतर बनते-बिगड़ते  आन्तरिक हालात निश्चित रूप से ‘‘त्रिशंकु विधानसभा’’ के संकेत जन-जन की जुवां से सुने जा सकते हैं।

बिहार में भाजपा को मोहन भागवत खा गए, यूपी में मनमोहन वैद्य ने वही काम कर दिया!

Vikas Mishra : जो काम बिहार विधानसभा चुनावों से पहले मोहन भागवत ने किया था। वही काम अब मनमोहन वैद्य ने कर दिखाया। बिहार चुनावों से ठीक पहले मोहन भागवत ने आरक्षण के खिलाफ बयान देकर बीजेपी का बेड़ा गर्क कर दिया था। लालू यादव ने भागवत के बयान को चुनावों में खूब भुनाया और बीजेपी को मुंह की खानी पड़ी। अब उसी तर्ज पर जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में संघ के प्रवक्ता मनमोहन वैद्य ने आरक्षण के खिलाफ आवाज उठा दी। उन्होंने हालांकि बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर का हवाला दिया, लेकिन बात तो आरक्षण के खिलाफ ही की। इसके साथ ही बैठे-ठाले नई मुसीबत बीजेपी के गले पड़ गई। अब उत्तर प्रदेश में आरएसएस के इस सेल्फ गोल से बीजेपी कैसे उबरेगी..?