जोगिया जनूबी गांव में लोकरंग के माध्यम से लोक जीवन को संवारने का प्रयास

कुशीनगर (उ.प्र.) : जिले के जोगिया जनूबी पट्टी गांव में हर वर्ष की तरह इस बार भी दो दिवसीय लोकरंग कार्यक्रम 12-13 अप्रैल को आयोजित हुआ। यह आयोजन का आठवां वर्ष रहा। इस बार का आयोजन असहयोग आंदोलन के दौरान अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंकने वाले कुशीनगर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों हनुमान प्रसाद कुशवाहा, ब्रह्मदेव शर्मा, मुंशी तप्तीलाल और मोती भगत को समर्पित किया गया। इन चारों सेनानियों की खोज, सुभाष चन्द्र कुशवाहा ने 8 मई, 1921 के स्वदेश अखबार में प्रकाशित समाचार के आधार पर की थी। इस बार के आयोजन की खास बात यह रही कि भोजपुरी क्षेत्र की लोक कलाओं के साथ-साथ झारखंड, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल के लोक कलाओं से भी लोगों को रूबरू होने का मौका मिला।  

गुस्से में किसान : 20 को देशव्यापी विरोध, पांच मई को संसद पर प्रदर्शन, 14 मई को रेल-सड़क रोकेंगे, जेलें भरेंगे

उत्तर प्रदेश किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष कामरेड इम्तेयाज बेग ने कहा कि पूरे देश में ख़ास तौर से उत्तरी भारत में असामायिक वर्षा, ओले, आंधी और बाढ़ के चलते हजारो किसानों के मरने के साथ ही लगभग 20 से 30 हजार करोड़ की रवि की फसलो की बर्बादी के बाद भी केंद्र व प्रदेश सरकारों के अगुवा कुम्भकर्णी नीद में पड़े हैं। किसानो की कोई चिंता नहीं। आईएएस लॉबी किसानों की मौत को स्वाभाविक बता रही है। बीमा कम्पनियां और बैंक किसानों से पैसा लेकर फसल बीमा नहीं करते हैं। केंद्र और प्रदेश सरकारें किसानो की बर्बादी पर राहत के नाम पर मुआवजा पहले नौ हजार रुपये प्रति हेक्टेयर, अब बढ़ाकर साढ़े तेरह हजार रुपये प्रति हेक्टेयर कर दिया है। यह किसानों के साथ सरकारों का क्रूर मजाक है, क्योकि एक बिस्से की पूरी फसल बर्बाद होने पर 142 रूपये या पचास फीसदी बर्बाद होने पर 71 रूपये का चेक मिल रहा है, क्या यह किसानों के साथ खिलवाड़ नहीं है, सरकार बताये ?

एमपी में पत्रकार की हत्या, यूपी में टीवी रिपोर्टर के घर पर कातिलाना हमला

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में इन दिनों पत्रकारों पर कातिलाना हमले हो रहे हैं। सिंगरौली (म.प्र.) में एक साप्ताहिक अखबार के संपादक की हथौड़े से हत्या कर दी गई। गोरखपुर (उ.प्र.) में एक टीवी न्यूज चैनल के पत्रकार के घर पर धावा बोलकर कुछ लोगों ने परिजनों से आधा दर्जन से अधिक लोगों को लहूलुहान कर डाला।

किसानों और महिलाओं की चीख को दबाना चाहता है यूपी का शासन-प्रशासन

उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने का नारा देने वाली समाजवादी पार्टी की सरकार में ठीक विपरीत परिणाम आता नजर आ रहा है। अपराध और भ्रष्टाचार के बिन्दुओं पर तुलना की जाये, तो आज उत्तर प्रदेश बिहार से ज्यादा बदनाम नजर आ रहा है। कानून व्यवस्था को लेकर हालात इतने दयनीय हो चले हैं कि आम आदमी को कोई सांत्वना तक देने वाला नजर नहीं आ रहा, लेकिन खास लोगों के अहंकार को ठेस न पहुंचे, इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। 

होशियार ! मजीठिया मामले पर मीडिया हाउसों और लेबर डिपॉर्टमेंट के बीच दलाल हरकतें तेज, चार लाख की घूसखोरी !!

लखनऊ : ताजा सूचना है कि यहां से प्रकाशित एक अखबार के अधिकारी ने लेबर डिपार्टमेंट के एक दलाल को चार लाख रुपए दिए हैं। इसी दलाल ने कुछ दिन पहले मजीठिया मामले से संबंधित आरटीआई के जवाब में गोल-मटोल कर फाइल को लौटा दिया था।  

सिर्फ विज्ञापन में ‘बन रहा है आज, संवर रहा है कल’

मुझे यह स्लोगन बड़ा अच्छा लगता है, जिसने भी बनाया हो उसे बधाई (इसको इजाद करने में पैसा भी जरूर लगा होगा)! आज कुछ चयनित अखबारों में छपा एक विज्ञापन देखा | शायद जो अखबार ‘अन्नदाता की मुसीबत’ के बारे मैं कुछ ज्यादा ही सच्चाई से अड़े हैं , वे इसे न पाएं हो ; ये विज्ञापन बड़ा सुखद सा दिखा बाहर से, परन्तु अन्दर पढ़ कर किंचित निराशा हुई।

यूपी में पुस्तक माफिया का बोलबाला, लुगदी साहित्य की ऊंचे दामों पर भरपूर खरीद

उत्तर प्रदेश की लॉयब्रेरियों के लिए सरकारी पुस्तकों की खरीद में पिछले वर्षों की तरह इस बार भी पुस्तकालय प्रकोष्ठ के अधिकारियों और माध्यमिक शिक्षा विभाग के सचिव स्तर के एक वरिष्ठ अफसर की साठ-गांठ से भारी गड़बड़ी और मनमानी किए जाने की सूचना है। बताया गया है कि मुंह पर भरपूर कमीशन मार कर अपनी किताबें चयनित करा लेने वाले भ्रष्ट प्रकाशकों, उर्दू-हिंदी साहित्य अकादमियों तक पहुंच रखने वालो और राजनेताओं-अफसरों की चापलूसी करने वाले लेखकों की कानाफूसी से इस बार लुगदी साहित्य की ऊंचे दामों पर भरपूर खरीदारी हुई है। इससे सुपठनीय पुस्तकों के लेखकों-साहित्यकारों में भीतर ही भीतर प्रदेश सरकार की पुस्तक खरीद नीति पर भारी रोष है। कुछ पिछलग्गू किस्म के साहित्यकारों, विरुदावली गाने वाले रचनाकारों को ही खरीद में तरजीह दी गई है।

वरिष्ठ आईएएस का अखिलेश सरकार से सवाल – अभी और कितने किसानों की मौत का इंतजार

यूपी में एक वरिष्ठ आईएएस की बेबाक बयानी ने अखिलेश सरकार की दोरंगी नीतियों की रही सही पोल-पट्टी भी खोल दी है। आईएएस सूर्यप्रताप सिंह अपने फेसबुक वॉल पर लगातार सरकार को आगाह कर रहे हैं कि वह किस तरह मदहोश है और प्राकृतिक आपदा के सताए प्रदेश के किसान बेमौत मर रहे हैं, खुदकुशी और आत्मदाह कर रहे हैं। वह लिखते हैं – ‘किसान कहां जायें? अन्नदाता मुसीबत में तथा लखनऊ में ‘ग्रामीण क्रिकेट लीग’ (ICGL) का ग्लैमर।’

 

यूपी में आरटीआई के तहत मांगी जानकारी तो देना पड़ेगा जुर्माना

अगर आप उत्तर प्रदेश में आरटीआई ऐक्ट (सूचना के अधिकार) के तहत जानकारी हासिल करने की सोच रहे हैं तो सावधानी के साथ कदम बढ़ाएं। अगर राज्य सूचना आयोग की चली तो वह आपको दंडित कर सकता है और आपको उस सरकारी विभाग को मुआवजा देने के लिए कह सकता है, जिससे आपने सूचना मांगी है। इससे भी परेशान करने वाली बात यह है कि आपको किस आधार पर मुआवजा देने को कहा जाएगा, यह भी पूरी तरह से सूचना आयोग की मर्जी पर निर्भर करेगा।

किसानों की तबाही पर यूपी सरकार संजीदा नहीं : रिहाई मंच

लखनऊ : रिहाई मंच ने बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण फसलों की बर्बादी से आहत किसानों द्वारा की जा रही आत्महत्या, दिल का दौरा पड़ने व सदमे से हो रही मौतों और मुआवजे के संदर्भ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को मांग पत्र भेजा है। 11 सूत्रीय सवालों और 14 सूत्रीय मांगों वाले इस पत्र के माध्यम से प्रदेश सरकार की फसलों की बर्बादी की मुआवजा नीति और किसानों की आत्महत्या के बाद प्रदेश सरकार के गैरजिम्मेदाराना कार्यशैली पर सवाल उठाया गया है।

इलाहाबाद हत्याकांड के बाद पूरे यूपी में वकीलों का गुस्सा फूटा, हड़ताल के दौरान तोड़फोड़

इलाहाबाद : यूपी बार कौंसिल द्वारा गुरुवार को प्रदेश भर के वकीलों से हड़ताल पर रहने का आह्वान का मिलाजुला असर रहा। गुरुवार को वकीलों ने बहिष्कार कर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। केंद्र तथा प्रदेश सरकार के खिलाफ इलाहाबाद में वकील की हत्या के विरोध में आज प्रदेश भर में वकीलों की हड़ताल से लोग हलकान देखे गए। 

इस ‘समाजवादी’ मंत्री अवधेश प्रसाद का सामंतवाद तो देखिए!

सेवा में, सम्पादक महोदय, सादर प्रणाम, फैजाबाद से एक खबर है। खबर इस तस्वीर पर आधारित है। तस्वीर में दिख रहे हैं उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार के समाज कल्याण मंत्री अवधेश प्रसाद।  इन्हें उनका सरकारी अर्दली मकर संक्रांति के दिन बुधवार को खिचड़ी भोज से निकलने के बाद जूते पहना रहा है।

2017 का विधानसभा चुनाव जातिवादी राजनीति के सहारे नहीं जीता जा सकेगा, अखिलेश यादव को अहसास हो गया

अजय कुमार, लखनऊ

एक वर्ष और बीत गया। समाजवादी सरकार ने करीब पौने तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया है। 2014 सपा को काफी गहरे जख्म दे गया। लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार ने धरती पुत्र मुलायम को हिला कर रख दिया। पार्टी पर अस्तित्व का संकट मंडराने लगा है। अगर जल्द अखिलेश सरकार ने अपना खोया हुआ विश्वास हासिल नहीं किया तो 2017 की लड़ाई उसके लिये मुश्किल हो सकती है। अखिलेश के पास समय काफी कम है। भले ही लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के पश्चात समाजवादी सरकार ने अपनी नीति बदली ली है, लेकिन संगठन वाले उन्हें अभी भी पूरी आजादी के साथ काम नहीं करने दे रहे हैं। सीएम अखिलेश यादव अब मोदी की तरह विकास की बात करने लगे हैं लेकिन पार्टी में यह बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है। मुलायम अभी भी पुराने ढर्रे पर ही चल रहे हैं। निश्चित ही 2015 खत्म होते ही तमाम दलों के नेता चुनावी मोड में आ जायेंगे। भाजपा तो वैसे ही 2017 के विधान सभा चुनावों को लेकर काफी अधीर है, बसपा और कांग्रेस भी उम्मीद है कि समय के साफ रफ्तार पकड़ लेगी। फिलहाल तो यही कहा जा सकता है कि कांग्रेस ही नहीं सपा-बसपा भी 2014 में अर्श से फर्श पर आ गये।

पुण्य प्रसून बाजपेयी, सुप्रिय प्रसाद, राहुल कंवल और दीपक शर्मा कल क्यों जा रहे हैं लखनऊ?

मोदी अगर राष्ट्रीय मीडिया को पटाने-ललचाने में लगे हैं तो उधर यूपी में अखिलेश यादव से लेकर आजम खान जैसे लोग नेशनल व रीजनल को पटाने-धमकाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़े हुए हैं. आपको याद होगा मुजफ्फरनगर दंगों के बाद आजतक पर चला एक स्टिंग आपरेशन. दीपक शर्मा और उनकी टीम ने मुजफ्फरनगर के कई अफसरों का स्टिंग किया जिससे पता चला कि इस दंगे को बढ़ाने-भभकाने में यूपी के एक कद्दावर मंत्री का रोल रहा, इसी कारण तुरंत कार्रवाई करने से पुलिस को रोका गया.

यूपी में जंगलराज, यूपी में ‘चोरों’ की सरकार : अब आईपीएस भी सुरक्षित नहीं, अमिताभ ठाकुर के घर भीषण चोरी

उत्तर प्रदेश में जंगलराज का आलम ये हो गया है कि अब जनता तो जनता, अफसर तक सुरक्षित नहीं हैं. वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर आज सुबह जब गाजियाबाद से लखनऊ लौटे तो पता चला कि उनके घर में भीषण चोरी हो चुकी है. गोमती नगर स्थित उनके घर में चोरी की ये घटना कोई सामान्य नहीं है. जहां पर अमिताभ ठाकुर का घर है, वहां ढेर सारे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का घर है. मतलब वीआईपी इलाका है. इस इलाके में घुसने और चोरी करने की हिम्मत कोई सामान्य चोर कर ही नहीं सकता.

IPS officer Amitabh Thakur

यूपी में जंगलराज : मंत्री के रिश्तेदार की खबर छापने पर पत्रकार की पिटाई, एफआईआर लिखने से इंकार

तहसील सिकन्दरपुर, बलिया के पत्रकार संजीव कुमार सिंह को कबीना मंत्री रामगोविन्द चैधरी के चचेरे भाई रामबचन यादव और उसके ड्राईबर धर्मेन्द्र के बारे में खबर छापने की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है. संजीव ने दुर्गा पुजा के दिन धर्मेन्द्र द्वारा सिकंदरपुर कस्बे में कथित छेड़छाड़ करने पर लोगों द्वारा की गयी पिटाई के बाद पुलिस द्वारा एकतरफा कार्यवाही किये जाने के सम्बन्ध में खबर लिखी थी. इस पर 08 अक्टूबर को रात करीब 07.30 बजे धर्मेन्द्र, छोटक सिंह तथा अन्य लोगों ने समाचार छपने के लिए संजीव को भला-बुरा कहा और लात-घूंसे से मारा.

आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने यूपी पुलिस के भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे नफीस खान को सलाम कहा

Amitabh Thakur : नफीस खान को सलाम!.. यह पत्र मैंने अमेठी निवासी नफीस खान की सूचना के आधार पर आईजी ज़ोन लखनऊ को लिखा है. आपकी दृष्टि चाहूँगा, यह एक गंभीर प्रकरण है. इस देश को हज़ारों नफीस खान की जरूरत है…

यूपी में सपा राज उर्फ जंगल राज : जान बचाना मुश्किल हो रहा इस तालाब के सिपाही को.. पढ़िए पूरी दास्तान…

उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार के राज में एक सूचनाधिकार कार्यकर्ता और अधिवक्ता अनूप कौशिक के साथ हो रहे अत्याचार की इस लड़ाई को देखें. यह अधिवक्ता सिर्फ इसलिए आज अपनी जिंदगी को बचाए हर सरकारी दफ्तर, आला पुलिस अधिकारियों और राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास की खाक छान रहा है ताकि जनपद अलीगढ़ का एक तालाब बचा सके. इसके इलाके के एक दबंग नेता ने 300 करोड़ की तालाब की भूमि बेचने का कारनामा सरकारी तंत्र की पनाह में किया है. बदले में इस सूचनाधिकार कार्यकर्ता और अधिवक्ता अनूप कौशिक को मिली है एक गोली, जानलेवा हमले और कई फर्जी मुकदमे.

एडवोकेट अनूप कौशिक

मुख्यमंत्री अखिलेश उवाच- नकल करके सिर्फ बन सकते हैं पत्रकार

बीते हफ्ते शुक्रवार के दिन यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्रकारों पर की गई एक टिप्पणी यूपी के मीडियावालों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. कार्यक्रम अमर उजाला की तरफ से आयोजित था. इसमें प्रदेश के मेधावी छात्रों को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में लैपटॉप दिया. अमर उजाला के इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पत्रकारों को एक टिप्पणी करके भरपूर बेइज्जत किया. लैपटॉप वितरण के दौरान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंच से बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों, पढ़ने-लिखने में मन लगाना क्योंकि नकल करके आईएएस तो नहीं बन सकते, हां पत्रकार बन सकते हो.

विज्ञापन देकर यूपी सरकार की किरकिरी रोकने में जुटे मुलायम और अखिलेश

Prashant Mishra : पिछले कुछ अंकों में ‘इण्डिया टुडे’ पत्रिका ने उ.प्र. सरकार की अच्छी खिंचाई कर रखी थी. पिछले महीने “यूपी लोक सेवा आयोग में यादव राज” करके एक अच्छी और जरूरी रिपोर्ट (पीयूष बवेले की) लगाई जिसपर “आज तक” में पुण्य प्रसून बाजपेयी ने भी एक स्टोरी की.

यूपी में जितने सत्ता केंद्र उतने ही अफसरों के गुट, जनता बेचारी रोये फूट-फूट

: यूपी में नाजुक होते नेताओं-नौकरशाहों के रिश्ते से विकास कार्यों और कानून व्यवस्था पर बुरा प्रभाव :  उत्तर प्रदेश की नौकरशाहों और राजनेताओं के रिश्ते भी निराले हैं। वर्षों से दोनों के बीच आंख-मिचौली का खेल चल रहा है। कब कौन कहां किसको पटकनी दे दे, कोई नहीं जानता। वैसे तो यह टकराव कोई खास मायने नहीं रखता है, लेकिन जब इसका असर समाज के किसी हिस्से पर पड़े तो इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता है। सच्चाई तो यही है कि अब देश, समाज और संविधान के तहत काम करने की कसम खाने वाले नौकरशाह और राजनेता जनता के हितों के बारे में रत्ती भर भी नहीं सोचते हैं। अगर ऐसा न होता तो उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव द्वारा सरकार की तरफ से छह वर्षों में अपने अफसरों को 13 पत्र लिखे जाने के बाद भी हालत जस के तस नहीं रहते।

भाजपा के मीडिया सेल में लागू है ‘बैनर-चैनल वर्णक्रम’ आधारित ‘आरक्षण’!

वृंदावन : बड़ों व ताकतवर का सम्‍मान करना और छोटों व गरीबों को ठेंगे पर रखना अमूमन हर व्‍यवस्‍था की परंपरा होती है. यह उसी तरह का शाश्‍वत सत्‍य है, जैसा कि सूरज के पूरब से निकलने का है. कहावत है कि अगर सांप के दंश में जहर का डर नहीं होता है तो लोग उसे भी पूंछ से पकड़कर नचाकर फेंक देते हैं. भाजपा में भी पत्रकारों को लेकर यही व्‍यवस्‍था लागू है. पहली व्‍यवस्‍था तो यह है कि आप बड़े बैनर और बड़ी एजेंसी के पत्रकार हैं तो उनको पूरी इज्‍जत दी जाती है. छोटे बैनर-एजेंसी के पत्रकारों पर ‘एहसान’ किया जाता है.

भाजपा की वृंदावन कार्यसमिति में पत्रकारों को परोसे गए कीड़े

वृंदावन में आयोजित हुई प्रदेश भाजपा की कार्यसमिति लखनऊ के पत्रकारों के लिए हाहाकारी साबित हुई. पत्रकारों को खाने में कीड़े परोसे गए तो पीने के पानी तक के लिए उन्‍हें यहां से वहां चक्‍कर लगाना पड़ा. रही सही कसर बिजली ने पूरी कर दी. मीडिया प्रभारी की नेतागिरी करने का शौक इतना भारी पड़ा …

भाजपाइयों ने बनारस में मीडियाकर्मियों से की मारपीट

क्‍या भाजपा कार्यकर्ता भी समाजवादी पार्टी की राह पर चल पड़े हैं? क्‍या उन्‍हें भी सत्‍ता का नशा हो गया है? क्‍या वे भी अब गुंडई करेंगे, पत्रकारों से मारपीट करेंगे? ये सारे सवाल तब खड़े हुए जब बुधवार को बनारस में भाजपा के कार्यकर्ता कवरेज कर रहे पत्रकारों तथा छायाकारों से भिड़ गए, उनसे मारपीट किया.

यूपी सरकार द्वारा अमिताभ ठाकुर को सामाजिक संस्था से सम्बद्ध होने से मनाही

अपने किस्म के एक अनूठे आदेश में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर को एक सामाजिक संस्था से सम्बद्ध होने और उसकी गतिविधियों में भाग लेने से मना कर दिया है. प्रमुख सचिव गृह नीरज कुमार गुप्ता द्वारा दिए गए आदेश दिनांक 11 अगस्त 2014 के अनुसार अमिताभ ठाकुर को उक्त संस्था से सम्बद्ध होने की अनुमति प्रदान करने का औचित्य नहीं पाया गया.