पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजाराम यादव तो अदभुत गायक निकले (देखें वीडियो)

उत्तर प्रदेश में जौनपुर के वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजाराम यादव ने रविवार को विश्वविद्यालय के संगोष्ठी भवन में हारमोनियम बजा कर ऐसा लोकगीत गाया कि विद्यार्थियों की तालियां रुकने का नाम ही नहीं ले रही थीं. विश्वविद्यालय के कुलपति ने संगीत को अपने मन से जोड़ने की बात की। प्रोफ़ेसर यादव बचपन से ही संगीत से जुड़े रहे हैं और कई देशों में उन्होंने अपनी प्रस्तुतियां दी है। भारतीय परिधान धोती कुर्ता पहनकर प्रोफ़ेसर यादव विश्वविद्यालय के संगोष्ठी भवन स्थित मंच पर चढ़े तो किसी ने इस बात की उम्मीद भी नहीं की थी कि भौतिकी का प्रोफेसर ऐसा गीत गा सकता है.

जानिए, मोदी का मूड बिगड़ा तो किस तरह चौटाला के बगल वाली बैरक में पहुंच जाएंगे मुलायम!

ये ‘सीबीआई प्रमाड़ित ईमानदार’ क्या होता है नेताजी?

सौदेबाज मुलायम का कुनबा 26 अक्टूबर 2007 से वाण्टेड है, क़ानूनी रूप में सीबीआई की प्राथमिक रिपोर्ट के बाद 40 दिनों में एफआईआर हो जानी चाहिए थी. चूँकि सीबीआई सत्ता चलाने का टूल बन चुकी है, सो सीबीआई कोर्ट पहुँच गई एफआईआर की परमीशन मांगने। उस वक्त मुलायम के पास 39 सांसदों की ताकत थी। खुली लूट की आजादी में रोड़ा बन रहे वामपंथियों से मनमोहन का गिरोह छुटकारा चाहता था और अपने आकाओं के इशारे पर हरहाल में न्यूक्लियर डील कराने पर आमादा था।

राजभवन में वो शख्स कौन है, जो प्रो महावीर अग्रवाल को बचा रहा

देहरादून : राजभवन उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय,हरिद्वार के कुलपति प्रो महावीर अग्रवाल से संबधित जानकारियां उपलब्ध कराने में जिस तरह से लेट लटीफी कर रहा है उससे राजभवन सचिवालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। बडा सवाल उभरकर यह आ रहा है कि राजभवन में आखिर वो सख्श कौन है जो कुलपति के शैक्षणिक अभिलेखों को अपीलकर्ता को उपलब्ध नहीं कराना चाहता है। यहां यह समझना जरूरी है कि राज्यपाल संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हैं और राजभवन सचिवालय से ही कुलपति की नियुक्ति की जाती है। फिर क्यों प्रो महावीर अग्रवाल के दस्तावेजों को उपलब्ध कराने के लिए उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलसचिव को बार बार लिख कर समय वर्बाद कराया जा रहा है। क्या राजभवन में कुलपति के दस्तावेज नहीं हैं या फिर अपनी गर्दन बचाने के लिए गेंद कुलसचिव के पाले में डाली जा रही है। इस पूरे प्रकरण में कुलपति प्रो महावीर अग्रवाल की चुप्पी संदेह को और भी गहरा रही हैं। 

जीडीए वीसी का स्वागत कर पत्रकारिता की मर्यादा को किया तार तार

गाजियाबाद : सरकारी अधिकारियों को अपने दबाव में रखने के लिए हाल ही में गाजियाबाद के कुछ मुट्ठीभर पत्रकारों द्वारा गठित की गई पत्रकार एसोशिएशन के स्वंभू अध्यक्ष अजेय जैन और महासचिव संदीप सिंघल जीडीए के नवनियुक्त उपाध्यक्ष विजय यादव का स्वागत करने नौएडा पहुंच गये । 

Save Scholar’s Career from Dictatorship of VC Prof. B.K. Kuthiala

: Mental torture being faced by Mass Communicaton Ph.D. Scholars : Student Forum of Makhanlal Chaturvedi National University of Communication and Journalism would like to bring to your notice that mental torture being faced by Mass Communicaton Ph.D. Scholars in University. As we would like to tell you that Application for Ph.D. were invited in the 2011, entrance examination was conducted on 29th January 2012, Entrance Exam was held at the University campus. Result  of Which came on 16 May 2012. The Course work commence on 13th February 2013 and the Result of course work was announced on 23rd December 2013.

मौलाना आजाद की जयंती पर मेनस्ट्रीम मीडिया द्वारा पुरानी स्टोरी गरम करके परोसने के मायने

Vineet Kumar : आज यानी 11 नवम्बर को मौलादा अबुल कलाम आजाद की जयंती है. इस मौके पर मेनस्ट्रीम मीडिया ने तो कोई स्टोरी की और न ही इसे खास महत्व दिया. इसके ठीक उलट अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में उनके ना से जो लाइब्रेरी है, उससे जुड़ी दो साल पुरानी बासी स्टोरी गरम करके हम दर्शकों के आगे न्यूज चैनलों ने परोस दिया. विश्वविद्यालय के दो साल पहले के एक समारोह में दिए गए बयान को शामिल करते हुए ये बताया गया कि इस लाइब्रेरी में लड़कियों की सदस्यता दिए जाने की मनाही है. हालांकि वीसी साहब ने जिस अंदाज में इसके पीछे वाहियात तर्क दिए हैं, उसे सुनकर कोई भी अपना सिर पीट लेगा. लेकिन क्या ठीक मौलाना आजाद की जयंती के मौके पर इस स्टोरी को गरम करके परोसना मेनस्ट्रीम मीडिया की रोचमर्रा की रिपोर्टिंग और कार्यक्रम का हिस्सा है या फिर अच्छे दिनवाली सरकार की उस रणनीति की ही एक्सटेंशन है जिसमे बरक्स की राजनीति अपने चरम पर है. देश को एक ऐसा प्रधानसेवक मिल गया है जो कपड़ों का नहीं, इतिहास का दर्जी है. उसकी कलाकारी उस दर्जी के रूप में है कि वो भले ही पाजामी तक सिलने न जानता हो लेकिन दुनियाभर के ब्रांड की ट्राउजर की आल्टरेशन कर सकता है. वो एक को दूसरे के बरक्स खड़ी करके उसे अपनी सुविधानुसार छोटा कर सकता है. मेनस्ट्रीम मीडिया की ट्रेंनिंग कहीं इस कलाकारी से प्रेरित तो नहीं है?

वो माखनलाल के वीसी बनाए ही इसलिए गए हैं ताकि नए मिथक गढ़ सकें….

Mohammad Anas : ताकि लोग यह न कहें कि हमने अपनी ज़िम्मेदारियों से मुंह मोड़ वह सब होने दिया जिसे नहीं होना चाहिए था… इसे ऐसे ही लिख रहा हूं…  क्रांति नहीं समझिएगा क्योंकि जिस छोटी सी बात का निवेदन कर रहा हूं आगे, वह बहुत बड़ी बात नहीं है जो आपसे न हो सके. करने की कोशिश कीजिएगा..बस कोशिश… वहां बच्चों को पार्ट टाइम जॉब करने की मनाही है. कोर्स खत्म होने के बाद प्लेसमेंट नहीं है. रैगिंग हो रही है, यूनिवर्सिटी प्रशासन यूजीसी को फर्जी तौर पर कहता है कि एफआईआर हो चुकी है. नौकरियों में धांधली पिछले कई सालों से बिना रोक टोक के जारी है. कैम्पस के भीतर धार्मिक गतिविधियों से लेकर आरएसएस के पतलू, मोटू, छोटू, लम्बू सबका हैप्पी बड्डे धूमधाम से मनाया जा रहा है. वाइस चांसलर इतना चमत्कारी और विद्वान है कि उसके समकक्ष कोई दूसरा ज्ञानी ‘व्यापम के घोटालेबाज़ों’ को नहीं मिला और एक बार फिर से नौकरी बजाने और वीसी बने रहने की ज़िम्मेदारी दे दी गई.