अपनी पुरानी आदत के मुताबिक आखिर में दगा दे ही गए ‘दगाश्री’

नोएडा : विश्व में ऐसी कोई हड़ताल नहीं हुई होगी, जो अनंत काल तक चली हो। हड़ताल शुरू होती है तो खत्म भी होती है और खत्म होने पर सवाल होने या यूं कहें कि क्या खोया, क्या पाया रूपी समीक्षा होती है । सहारा इंडिया के मीडिया ग्रुप में हड़ताल हुई, चार पांच दिनों तक चली और अपने अभिभावक सहाराश्री (जो अब दगाश्री) के नाम से जाने जा रहे हैं, के एक संदेश पर उनके प्यारे प्यारे कर्तव्य योगियों ने कार्य बहिष्कार समाप्त कर दिया । जो लोग हड़ताल तुड़वने में व्यस्त रहे, उन्हें तो सेलरी नहीं भेजी। उनको तो सही दंड मिला। जो निचले स्तर के कर्मचारी थे उन्हे आधा दे भी दिया। 

सहारा के मीडिया कर्मियों की अपने मालिक से गुहार – ‘हे सहाराश्री, सैलरी नहीं तो जहर ही दे दो !’

लखनऊ : सहारा ग्रुप के छोटे मालिक जेबी राय के २०००% आश्वासन देने के बाद भी मीडिया वालों को वेतन नही मिला। लखनऊ और कानपुर को छोड़ कर अन्य यूनिटों मे कर्मचारियों का गुस्सा चरम पर है । हो सकता है कि कल को यह भी सुनने को मिल सकता है कि किसी यूनिट के प्रबंधक या संपादक की ठुकाई-पिटाई हो गई क्योंकि कर्मचारियों का कहना है कि अब भेट-मुलाकात-सिफारिश-जीहुजूरी से काम होने वाला नहीं होता दिख रहा है।

दो की बलि लेकर भी कर्मचारियों को वेतन नहीं दे रहे सहारा वाले

यह चौथा महीना है कि बिना वेतन के सहारा के कर्मचारी किसी तरह दिन गुजार रहे हैं। हलांकि कर्मचारियों के घेराव के दौरान मालिक जयव्रत राय ने पूरी गारंटी दी थी कि अप्रैल से वेतन की समस्या पटरी पर आ जाएगी लेकिन कम्पनी के सीईओ के रुख से तो ऐसा नहीं लग रहा है। 

‘जिया इंडिया’ मैग्जीन के बुरे दिन, मीडियाकर्मियों को तीन महीने से वेतन नहीं

पिछले दिनों पत्रकार एसएन विनोद के नेतृत्व में ‘जिया इंडिया’ नामक एक राष्ट्रीय हिंदी मैग्जीन लांच हुई थी. इस मैग्जीन को लांच करने से पहले जिया न्यूज नामक चैनल को बंद कर सैकड़ों मीडियाकर्मियों को पैदल कर दिया गया था. उन्हीं विवादों और आरोपों के बीच जिया इंडिया नामक मैग्जीन लांच हुई थी. अब खबर है कि जिया न्यूज की तरह हाल जिया इंडिया का भी होने जा रहा है. तीन-तीन महीने से यहां सेलरी नहीं मिली है. पत्रकारों का हाल बेहाल है.