मुबारक बेगम की तबीयत बिगड़ी, मुंबई के अस्पताल में भर्ती, सरकारी मदद का कर रहीं इंतजार

विजय सिंह ‘कौशिक’, मुंबई

कभी तन्हाईयों में यूं हमारी याद आएगी, अंधेरा छा रहे होंगे कि बिजली कौध जाएगी। 1961 में आई फिल्म ‘हमारी याद आएगी’ के इस गीत को स्वर देने वाली मुबारक बेगम इन दिनों तन्हा अस्पताल के बिस्तर पर पड़ी हैं। चार दिनों पहले उन्हें फिर से अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। मुंबई के पश्चिमी उपनगर अंधेरी रेलवे स्टेशन के सामने स्थित बीएसईएस अस्पताल में हमारी मुलाकात उनसे होती है। देख कर विश्वास नहीं होता कि बिस्तर पर पड़ी यह महिला 115 फिल्मों में 175 गीत गाने वाली मशहूर गायिका मुबारक बेगम हैं। उनका परिवार फिलहाल इलाज के लिए सरकारी मदद का इंतजार कर रहा है।

पूर्वोत्तर यात्रा-6 : नदी के बीच दुनिया के सबसे बड़े टापू की सैर

वह 28 नवम्बर 2015 की सर्द सुबह थी। सुबह 6 बजे तक एलिफेंट सफारी के लिए काजीरंगा अभ्यारण्य के दूसरे छोर तक पहुचना था। टीम लीडर किरण जी कि हिदायत के मुताबिक सभी पत्रकार साथी सुबह 5.30 बजे तक बस में सवार हो चुके थे। हमें 30 किलोमीटर की दूरी तय कर एलिफेंट सफारी स्टेशन पहुँचना था। तय समय से हम पहुँच गए पर जंगल की सैर कराने वाले हाथी और महावत अभी नहीं पहुचे थे। आधे घंटे के इंतज़ार के बाद दो हाथी सामने से आते हुए दिखाई दिए। बताया गया कि एक बार में 6 से 7 लोग ही एलिफेंट सफारी के लिए जा सकेंगे। इस दिए हमने दो टीम बनाई। हाथी पर सवार हो कर 1 घंटे तक जंगल में घूमने की फ़ीस 800 रूपये प्रति व्यक्ति थी। मुझे लगता है अपने देश में पर्यटको से सुविधाओं के लिए भारी कीमत वसूली जाती है। खैर पहली और शायद आखिरी बार यहाँ तक आये थे लिए जंगल घूमने के लिए हाथी पर सवार हो गए। पहली खेप में मेरा भी नंबर लग गया। मैं सुरेंद्र जी हथियारबंद गार्ड के साथ हाथी पर सवार हो कर जंगल भ्रमण के लिए रवाना हो गए।

पूर्वोत्तर यात्रा-5 : बिहु और झूमर का नशा

आज गुवाहाटी से काजीरंगा नेशनल पार्क के लिए रवाना होना था। सुबह 7 बजे सारे पत्रकार साथी तैयार हो चुके थे। राजभवन से नाश्ता कर प्रस्थान करना था। हम दो दिनों से असम के राजभवन में रुके थे पर अब तक राज्यपाल पद्मनाभन आचार्य जी से हमारी मुलाकात नहीं हो पाई थी। दरअसल आचार्य जी के पास असम के साथ साथ नागालैंड के राज्यपाल का भी प्रभार है। इन दिनों वे नागालैंड की राजधानी कोहिमा स्थित राजभवन में थे। वहाँ उनसे हमारी मुलाकात होने वाली थी। सुबह 7 बजे हम 4 घंटे की यात्रा पर काजीरंगा के लिए रवाना हुए। बस आगे बढ़ी तो समय बिताने के लिए फिर से गीत संगीत की महफ़िल जमी।

पूर्वोत्तर यात्रा-2 : चौदह पेज का अखबार आठ रुपए में

सिर्फ 50 रुपए में बन गए राजा

-विजय सिंह ‘कौशिक’-

शिलांग से चेरापूंजी के लिए रवाना होने के वास्ते 23 नवंबर 2015 कि सुबह 7 बजे का समय तय किया गया था। लेकिन हम भारतीयों में से अधिकांश समय प्रबंधन के मामले में कच्चे ही हैं। कुछ साथी तैयार हो रहे थे इस लिए बाकी साथी राजस्थान विश्राम भवन के पास में स्थित होटल में नास्ता करने चले गए। होटल के काउंटर पर बैठे सज्जन को हिंदी अखबार पूर्वोदय पढ़ते देखा तो समझ में आ गया कि महोदय हिंदी भाषी हैं। पूर्वोत्तर में हिंदीभाषियों के खिलाफ हिंसा की खबरे आती रहती हैं। उनसे यहां के हालात जानने के लिए बातचीत करने की उत्सुकता हुई। पता चला होटल के मालिक राजेंद्र शर्मा मूलतः राजस्थान के सिलचर जिले के रहने वाले हैं। 40 सालों पहले उनका परिवार राजस्थान से शिलांग आ गया था। मौजूदा हालात के बारे में पूछने पर शर्मा बताते हैं कि अभी स्थिति थोड़ी अच्छी है।

पूर्वोत्तर यात्रा-1 : शिलांग में पश्चिम का राजस्थान

शिलांग में राजस्थानी समाज द्वारा 1959 में बनाया गया राजस्थान विश्राम भवन।

जिंदगी यादों का कारवाँ है। हम भी अपने इस यादों के कारवे में आप सब को शामिल करने जा रहे है। देश के पूर्वी हिस्से जिसे नार्थ ईस्ट यानि पूर्वोत्तर के नाम से जानते हैं। भारत का यह इलाका देश के बाकी हिस्से से लगभग कटा हुआ है। हालाँकि हाल के वर्षों में लोगों की दिलचस्पी पूर्वोत्तर में बढ़ी है। काफी दिनों से पूर्वोत्तर यात्रा के बारे में सोच रहा था। इसी साल सितम्बर की एक दोपहर मंत्रालय में खबरों की तलाश के दौरान  एशियन एज के विशेष संवाददाता मेरे मित्र विवेक भावसार ने बताया की हम कुछ पत्रकार मित्र पूर्वोत्तर यात्रा की योजना बना रहे हैं। पूछा क्या आप भी चलना चाहेंगे ? मैं तो पूर्वोत्तर देखने के लिए कब से लालायित था। इस लिए हा कहने में जरा भी देर नहीं की। धीरे धीरे पूर्वोत्तर जाने वाले पत्रकार साथियों की संख्या बढ़ते बढ़ते 18 तक पहुच गई। आख़िरकार पूर्वोत्तर यात्रा की तिथि भी तय हो गई। एयर टिकट सस्ते मिले इस लिए एक माह पहले ही टिकटों की बुकिंग कराई गई।