मोदी की नीतियों से महिलाओं की सेविंग पर पड़ रही तगड़ी मार, पढ़िए ये खुलासा

Vikas Mishra : मेरी पत्नी का सेविंग अकाउंट था इंडियन ओवरसीज बैंक में। गुप्त खाता। जिसमें जमा रकम का मुझे घर में लिखित कानून के मुताबिक पता नहीं होना था, लेकिन श्रीमतीजी के मोबाइल में बैंक से अक्सर खातों से कुछ रुपये निकलने के मैसेज आने लगे। कभी एसएमएस चार्ज के नाम पर, कभी एटीएम चार्ज के नाम पर। बीवी आगबबूला। मैं बैंक पहुंचा तो पता चला कि सेविंग अकाउंट में ब्याज घटकर 3 फीसदी हो गया है। एसएमएस चार्ज हर महीने देना है, हर छह महीने में एटीएम चार्ज देना है। दूसरे बैंक के एटीएम से पैसे निकाले तो उसका चार्ज। चाहे एटीएम का इस्तेमाल हो या न हो उसका भी चार्ज। खैर, मैंने पत्नी का वो अकाउंट बंद करवा दिया।

खाता तो बंद हुआ, नए खाते के लिए बैंक की तलाश हुई। मैंने कहा पोस्ट ऑफिस में खुलवा लो। पोस्ट ऑफिस गए, वहां एक तो ब्याज 6 फीसदी से घटकर 4 फीसदी हो गया था। सर्वर ऊपर से डाउन। वहीं के एक कर्मचारी ने धीरे से कहा-भाई साहब कहां फंस रहे हो, झेल नहीं पाओगे। खैर, यस बैंक में सबसे ज्यादा 6 फीसदी ब्याज का विज्ञापन देखा था, वहां संपर्क किया, कंडीशन अप्लाई में देखा तो पता चला कि जो लोग एक करोड़ रुपये खाते में रखेंगे, उन्हें 6 फीसदी ब्याज मिलेगा। एक लाख रुपये से कम रखने वालों को 4 फीसदी। चार्जेज यहां भी कटेंगे। सभी बैंकों में कटेंगे। हां, एक शर्त और, दस हजार रुपये से कम हुआ बैलेंस तो भी चार्जेज कटेंगे। सभी बैंकों का ये नियम है।

इससे पहले कि आप गलत अनुमान लगा लें, मैं स्पष्ट कर दूं कि पत्नी की कुल जमा राशि 10 हजार रुपये से ऊपर है और 15 हजार से नीचे। बाकी तो मेरे ऊपर उन्हीं का उधार रहता है। उन्हें एक गुप्त अकाउंट रखने का शौक है, जिस पर अच्छा ब्याज मिले, पति को पता न हो कि कितना जमा है। अब वो पति को दौड़ा रही थीं, पति के पास दौड़ने के अलावा कोई चारा भी नहीं।

मैं अच्छा खासा कमाता हूं, मेरे लिए पत्नी का खाता खुलवाना एक मनोरंजक खेल हो सकता है, लेकिन मुझे फिक्र हो रही है करोड़ों उन महिलाओं की, जो बड़े जतन से कुछ सौ रुपये, सौ भी क्यों 40-50 रुपये तक बैंक में जमा करवाती हैं। उनकी फिक्र हो रही है, जिनके पास अकाउंट में 10 हजार रुपये मेंटेन कर पाने की क्षमता नहीं है। वो तो ये सोचकर बैंक में पैसे रखती होंगी कि ब्याज मिलेगा, जरूरत पड़ने पर पैसा काम आएगा, लेकिन बैंक ब्याज देना तो दूर, चार्जेज के नाम पर उनके खातों में दीमक छोड़ दे रहा है, जो एक रोज उनका अकाउंट चालकर जीरो बैलेंस पर छोड़ देगा। मेंटीनेंस चार्ज का नाम सुनकर ही मेरा खून खौलता है।

मेरी भानजी रुचि Ruchi Shukla का एचडीएफसी बैंक में खाता था। एक बार 10 हजार से कम बैलेंस हुआ, बैंक ने 1 हजार रुपये काट लिए। अगले महीने फिर कटे। उसने कुछ पैसे निकाल लिए। कुछ सौ रुपये छोड़े। अब हर महीने मैसेज आने लगा कि अकाउंट में माइनस इतने रुपये है। मैं बैंक मैनेजर से मिला। बताया कि सेविंग अकाउंट में माइनस 4 हजार रुपये का बैलेंस हो गया है। वो बोला- खाता चलाना हो तो इसे चुकाना पड़ेगा। नहीं चलाना, तो चुपचाप रहिए, एक रोज अपने आप बंद हो जाएगा।

बीए में अर्थशास्त्र मेरा विषय था। उसमें बैंकिंग का पाठ भी था। बताया गया था कि अगर आप 100 रुपये जमा करते हैं तो बैंक मानता है कि आप महीने में 15 रुपये से ज्यादा नहीं निकालेंगे, अब बैंक 85 रुपये को बाजार में लगाएगा, लोन देगा, ब्याज कमाएगा। आपको सेविंग अकाउंट पर ब्याज देगा। यही बैंकिंग है। यानी अगर बैंक में एक लाख करोड़ रुपये जमा हैं तो वो 85 हजार करोड़ रुपये का व्यापार करेगा, उधारी देगा, ब्याज से कमाएगा। दुनिया के किसी भी बैंक की इतनी औकात नहीं जो अपने सभी ग्राहकों का पूरा पैसा एक दिन में लौटा सके।

बैंक भी करें तो क्या करें। नोटबंदी के बाद बैंक तो मालामाल हैं, पैसे ठसे पड़े हैं, लेकिन कोई कर्ज लेने के लिए तैयार नहीं है। रियलिटी सेक्टर का भट्ठा बैठा हुआ है। लोन लेकर फ्लैट लेने वाले गूलर के फूल हो रहे है। पैसा उगलती जमीनों के ग्राहक गायब हो गए हैं। पर्सनल लोन तो होम लोन की दर पर मिल रहा है, लेने के लिए लोग तैयार नहीं हैं, बैंक वाले लोन के लिए फोन कर करके आजिज कर दे रहे हैं। और हां, जिन्हें वाकई लोन की जरूरत है, उनके पास इतनी संपत्ति नहीं, जिसे गिरवी रखकर लोन लें।

बैंकों में पैसा फंसा है, बैंक व्यापार कर नहीं पा रहे हैं। इसकी गाज गिर रही है उन गरीबों पर, जो एक एक पैसा जोड़कर बैंक में जमा कर रहे हैं। सरकारी हों या प्राइवेट बैंक, पीएफ हो या पीपीएफ, हर जगह जमा पर ब्याज दर घट चुकी है, घट रही है। सरकार चाहती ही नहीं कि कोई बैंक में पैसा जमा करे, लेकिन ये भी नहीं चाहती कि लोग नकद पैसा अपने पास रखें, क्योंकि उसे तो कैशलेस इंडिया बनाना है।

डिजिटल पेमेंट का हाल देखिए, एलपीजी गैस नकद खरीदने पर सस्ती है, क्रेडिट कार्ड से खरीदने पर महंगी। क्योंकि उसका अलग से चार्ज है। बिजली बिल क्रेडिट कार्ड से चुकाना, ट्रेन का टिकट कटाना महंगा हो गया है। नोटबंदी और जीएसटी ने व्यापारियों और दुकानदारों की बैंड बजा दी, लेकिन अब भी वो क्रेडिट कार्ड या किसी और माध्यम से डिजिटल पेमेंट लेने को तैयार नहीं हैं। कार्ड दो तो कहते हैं 2 फीसदी अलग से देना होगा। कोई रोकथाम नहीं। अब आपको गरज हो तो कैश दीजिए, सौदा लीजिए, वरना भाड़ में जाइए। कैश का हाल ये है कि छोटे शहरों और कस्बों में बैंकों ने सीमा रख दी है कि अकाउंट से बस इतनी ही रकम निकाल पाएंगे। मैं अर्थशास्त्र का ज्ञानी नहीं हूं, लेकिन मुझे लगता है कि कहीं कुछ गड़बड़ हो रही है। अर्थव्यवस्था तो अड़ियल घोड़ी की तरह अटकी सी दिख रही है।

आजतक न्यूज चैनल में वरिष्ठ पद पर कार्यरत पत्रकार विकास मिश्र की एफबी वॉल से.

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गोरखपुर लोकसभा सीट से बीजेपी शलभ मणि त्रिपाठी को देगी टिकट!

Vikas Mishra : योगी आदित्यनाथ तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए। अब सवाल ये उठ रहा है कि गोरखपुर से सांसद कौन बनेगा। दरअसल सवाल ये उठना चाहिए था कि गोरखपुर से सांसद के उपचुनाव में बीजेपी का प्रत्याशी कौन होगा, लेकिन ये सवाल इस नाते नहीं उठ रहा, क्योंकि गोरखपुर में योगी के उत्तराधिकारी की जीत पक्की है। मेरी राय में तो बीजेपी को गोरखपुर लोकसभा सीट से शलभ मणि त्रिपाठी Shalabh Mani Tripathi को टिकट देना चाहिए। इसकी वजहें भी हैं।

शलभ योगी की तरह तेज तर्रार हैं, जरूरत पड़ने पर कड़क तो जरूरत पड़ने पर नरम हैं। पत्रकारों के बीच प्रचलित तमाम व्यसनों से शलभ कोसों दूर हैं। योगी और शलभ के बीच उम्र का फासला भी बहुत ज्यादा नहीं होगा, शलभ तीन-चार साल छोटे होंगे। योगी गोरखपुर के युवा सांसद रहे तो गोरखपुर को युवा सांसद ही मिलना चाहिए। शलभ मणि नेटवर्क 18 में एक दशक से ज्यादा वक्त तक उत्तर प्रदेश के प्रभारी रहे हैं। पूरे प्रदेश को जानते हैं। गोरखपुर के रहने वाले हैं, तो गोरखपुर को क्या चाहिए, उसे अच्छी तरह समझते हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त हैं।

हाल ही में शलभ ने पत्रकारिता की पारी घोषित करके सियासत की दुनिया में नई पारी बीजेपी के साथ शुरू की है। इतिहास गवाह है कि तमाम पत्रकार अच्छे राजनेता साबित हुए हैं। अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर एमजे अकबर तक पत्रकारों के अच्छे राजनेता बनने की नजीर भी है। इसीलिए मेरी नजर में गोरखपुर लोकसभा सीट से शलभ मणि त्रिपाठी बेहतरीन उम्मीदवार हैं।

शलभ को मैं व्यक्तिगत रूप से भी जानता हूं। वो ऐसी जगह, ऐसे पद-पोजीशन में रहे, जहां दिमाग खराब हो जाने की गुंजाइश बहुत ज्यादा होती है, लेकिन शलभ हमेशा वैसे बने रहे, जैसे वो 12 साल पहले थे। उतने ही सभ्य, उतने ही विनम्र, उतने ही सौम्य और चेहरे पर उतनी ही मुस्कान। बड़ों को सम्मान, छोटों को स्नेह और हमउम्रों को सहयोग देने में शलभ ने कभी कोताही नहीं की। इसी नाते मेरी नजर में शलभ गोरखपुर से सांसद बनने के लिए सर्वथा योग्य हैं। गोरखपुर और आसपास के लोगों से मैं जानना चाहता हूं कि सांसदी के लिए शलभ मणि की उम्मीदवारी की दावेदारी पर उनकी क्या राय है..?

आजतक न्यूज चैनल में वरिष्ठ पद पर कार्यरत और गोरखपुर के निवासी विकास मिश्र की एफबी वॉल से. उपरोक्त पोस्ट पर शलभ मणि त्रिपाठी का जो कमेंट आया है, वह इस प्रकार है…

Shalabh Mani Tripathi बहुत देर तक सोचता रहा लिखूँ या ना लिखूँ, कुछ कहूँ या ना कहूँ, पर लगा कि विकास भइया ने इतनी बडी बहस छेड़ दी है तो ख़ामोश रहना भी मुनासिब नहीं होगा……… विकास भइया आपकी इस पोस्ट के एक एक शब्द से मेरे लिए आपका अथाह प्यार टपक रहा है, और ऐसा ही प्यार-लगाव उन सभी दोस्तों की प्रतिक्रियाओं में भी साफ़ दिख रहा है जो विकास भइया की इस पोस्ट के पक्षधर हैं……मैं आप सबके प्यार से सच में अभिभूत हूं, पर सच तो यही है कि गोरखपुर की जिस लोकसभा सीट की गरिमा आदरणीय योगी जी ने देश और दुनिया में बढ़ाई है, मैं ख़ुद को उस सीट के क़ाबिल नहीं पाता, मुझे अभी बहुत काम करना है, बहुत कुछ सीखना है, मुझसे ज़्यादा क़ाबिल, कर्मठ और बेहतर लोग हैं गोरखपुर में इस सीट के लायक, मैं सौभाग्यशाली हूँ कि आप सबका इतना स्नेह और भरोसा है मुझ पर, और मेरा सबसे बड़ा दायित्व है इसे हमेशा बरक़रार रखना, इसीलिए आप सभी का हृदय से आभार जताते हुए उन सभी को प्रणाम करता हूँ जिन्होंने मेरा हौसला बढ़ाया या फिर मेरी कमियाँ बता कर भी, खुद को और बेहतर बनाने की मेरी मुहिम में अपना महती योगदान दिया, आप सबके प्यार का हमेशा आकांक्षी रहूंगा, धन्यवाद. 

Vikas Mishra मैंने इसी सौम्यता का जिक्र अपनी पोस्ट में किया था Shalabh Mani Tripathi । आज जहां तुम हो, बेशक वहां से वैसा दिखता होगा, जहां की बात कर रहे हो, लेकिन मैं जहां पर हूं, वहां से देखता हूं तो वैसा दिखता है, जैसा मैंने अपनी पोस्ट में लिखा है। मैं सिर्फ ये कहना चाहता हूं कि जैसे टीवी 18 ग्रुप ने तुम्हारी पूरी प्रतिभा का उपयोग किया, बीजेपी भी तुम्हारे पूरे टैलेंट, कमिटमेंट और उत्तर प्रदेश में डेढ़ दशक की पत्रकारिता के अनुभव का पूरा इस्तेमाल करे। मैं बतौर पत्रकार किसी पार्टी का पक्षधर नहीं हो सकता, लेकिन व्यक्तिगत रूप से जो मेरे करीब है, उसकी उन्नति तो हमेशा चाहता हूं। मुझे यकीन है कि जो भी जिम्मेदारी तुम्हें मिलेगी, तुम साबित करोगे कि इसके लिए तुमसे बेहतर कोई और नहीं था।

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