कृष्णदत्त पालीवाल का जाना…

Vineet Kumar : नहीं रहे हमारे कृष्णदत्त पालीवाल सर… एमए का आखिरी पेपर उन बच्चों के लिए प्रोजेक्ट हुआ करता था जो ऑप्शन में मीडिया लिया करते थे..और इस प्रोजेक्ट के लिए विभाग से एक गाइड तय किए जाते थे. जब हमने एमए हिन्दी साहित्य में दाखिला लिया तो के डी सर की धूम थी. वो जापान से लौटे ही थे और सीनियर्स को देखता था कि हर दूसरे उन्हीं के साथ पीएचडी करना चाहते थे. एमए की क्लास में गोविंद दर्शन जैसी भीड़ होती. सच पूछिए तो केडी सर और नित्यानंद तिवारी सर के लिए ही हम बच्चे आर्ट्स फैकल्टी जाते..वैसे मैं बैल की तरह पूरी क्लास में मौजूद होता. खैर. एमए की इस प्रोजेक्ट के लिए वो स्वाभाविक रुप से मिल गए. लिस्ट में नाम आने के बाद मैं वहां गया. अपना विषय बताया और कहां सर बताइए- कैसे लिखना है.