हर दिन लाखों का विज्ञापन चैनलों पर देने वाले खरबपति बाबा की सुरक्षा पर जनता का धन खर्च होगा

Anil Singh : नेताओं को ही नहीं, कलियुगी साधुओं और बाबाओ को भी सुरक्षा की तगड़ी ज़रूरत है तो बाबा रामदेव को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने Z सुरक्षा देने का फैसला कर लिया है। राजनाथ सिंह ने मन ही मन सोचा – खर्च तो जनधन ही होगा, अपना या अपने पूत का क्या जाता है! कांग्रेस ने बड़ी चोरी की तो भाजपा ने छोटी चोरी की, इसमें क्या बुराई…. इस किस्म के तर्क दे रहे हैं कुछ लोग। मित्र, संत को कभी राजाश्रय या सुरक्षा की ज़रूरत नहीं होती। इसका एक अर्थ तो यही है कि यह बाबा संत नहीं, कुसंत है। दूसरे खरबों की संपत्ति वाला बाबा हर दिन लाखों का विज्ञापन न्यूज़ चैनलों पर दे सकता है तो अपनी सुरक्षा का इंतज़ाम खुद क्यों नहीं कर सकता? आखिर क्यों उस पर हमारा यानी करदाताओं का धन लुटाया जा रहा है?

सत्तर सेकेंड का सीन

यह एक्शन सीन कुल सत्तर सेकेंड का रहा. इसमें सब कुछ था. सवाल पूछती हुई एक रिपोर्टर थी. उसका कैमरा था. सामने रॉबर्ट वाड्रा खड़े थे. उनके साथ उनके सुरक्षा गार्ड खडे थे. यह एक होटल का गलियारा था जहां पूरा सीन एक ही टेक में शूट हुआ. कहते हैं कि रिपोर्टर कई घंटे से उनका इंतजार करती रही और ज्यों ही राबर्ट वाड्रा जिम से कसरत करके निकले त्यों ही रिपोर्टर ने माइक लेकर पूछना शुरू कर दिया कि हरियाणा वाली जमीन के प्रकरण के बारे में उन्हें क्या कहना है? वाड्रा पहले रिपोर्टर को देखते रहे, फिर तीन बार क्रोध में भरकर कहा: ‘आर यू सीरियस?’ फिर एएनआई की उस रिपोर्टर के हाथ में ठहरे गनमाइक को जोर का मुक्का मारा. गनीमत रही कि रिपोर्टर का गनमाइक उसके हाथ छूट कर नीचे नहीं गिरा. उसके बाद वाड्रा आगे बढ गए और एक आवाज आती रही कि डिलीट कर दो…

पीएमओ ने वाड्रा पीआईएल में गहरी व्यक्तिगत रुचि ली थी

डीएलएफ-वाड्रा प्रकरण में विधिक कार्य विभाग, विधि मंत्रालय द्वारा आरटीआई कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर को प्राप्त कराये गए नोटशीट से यह साफ़ जाहिर होता है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) सहित पूरी सरकार किस प्रकार इस मामले में गहरी रूचि ले रही थी. मामले में स्वयं पीएमओ ने 05 नवम्बर 2012 को विधिक कार्य विभाग को विस्तृत निर्देश भेजे थे. इसमें डॉ ठाकुर द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में इस प्रकरण में दायर याचिका का शुरुआती स्तर पर ही पुरजोर विरोध के निर्देश शामिल थे. तत्कालीन नए विधि मंत्री अश्विनी कुमार से व्यक्तिगत निर्देश लेने को कहा गया था.

कैग का कहना है कि कांग्रेस सरकार की मदद से वाड्रा ने एक झटके में 44 करोड़ कूट लिए

Om Thanvi : देश के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) का कहना है कि कांग्रेस सरकार की मदद से रॉबर्ट वाड्रा ने एक झटके में ४४ करोड़ कूट लिए। गौर करें कि मोदी और भाजपा तो खुद वाड्रा के खिलाफ अभियान चलाते आए हैं। फिर भी कुछ होता क्यों नहीं?

गनीमत है, मीडिया अभी साहिब के हगने मूतने को खबर नहीं मानता

: यू नो, आई एम सीरियस :

दिनेशराय द्विवेदी जी मेरे अच्छे फेसबुक मित्रों में हैं. उनका, उनके विचारों का काफी सम्मान करता हूं लेकिन आज उनकी एक पोस्ट जरूरत से ज्यादा निचले स्तर की लगी. इस तरह की अपेक्षा ऐसे विद्वानजनों से नहीं की जाती. हर पेशे का सम्मान होना चाहिए अन्यथा आपको ऐसे जवाब के लिए तैयार रहना चाहिए. द्विवेदी जी फेसबुक पर वनलाइनर लिखते हैं- ”गनीमत है, मीडिया अभी साहिब के हगने मूतने को खबर नहीं मानता।”

एएनआई के रिपोर्टर को हड़काने वाले अपने दामाद राबर्ट वाड्रा से मिलने पहुंचीं सोनिया गांधी

लैंड डील पर सवाल पूछे जाने पर पत्रकार के साथ बदसलूकी करने के बाद मीडिया में मचे शोर और विभिन्न राजनीतिक दलों की निंदा के बाद सोनिया गांधी वाड्रा से मिलने उनके घर पहुंची. उन दोनों के बीच में क्या बातचीत हुई, अभी इसके बारे में जानकारी नहीं मिल पाई है. हरियाणा जमीन सौदे को लेकर वाड्रा पर लगातार उठ रहे सवालों के बीच शनिवार को जब एक न्यूज चैनल एजेंसी एएनआई के रिपोर्टर ने इस बाबत सवाल पूछा तो वाड्रा भड़क उठे. उन्होंने मीडियाकर्मी से बदसुलूकी की और माइक झटकते हुए आगे निकल गए.

न्यूज चैनलों के लिए ‘वाड्रा मीडिया दुर्व्यवहार प्रकरण’ सत्ता के प्रति निष्ठा जताने का मौका

हरियाणा में भूमि घोटाला पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा से पूछे गए सवाल पर तिलमिलाये वाड्रा ने पत्रकारों से जो बदसलूकी की उसकी गर्मी 24 घंटे तक कायम है और शायद आगे भी कायम रहेगी। प्रायः हर चैनल एएनआई का माईक झटकने का सीन हजार बार दिखा चुका है। एक पत्रकार के रूप में हम वाड्रा के कृत्य की कड़े से कड़े शब्दों में निन्दा करते हैं। पत्रकारों को स्वतंत्र रूप से कार्य करते रहने की आजादी की पुरजोर मांग करते हैं। शनिवार के प्रकरण में घटना से बड़ी राजनीति है, इससे कोई इनकार नहीं कर सकता।