ऐसे तो धुलने से रहा व्यापमं का पाप

मन कसैला सा हो गया है व्यापमं मामले में सरकार का चरित्र देखकर। किस प्रदेश के निवासी हैं हम। लाखों गरीब, योग्य मासूम बच्चों का भविष्य बर्बाद कर दिया गया नोटों की खातिर। जो आरोपी बनाये गये हैं उनमें से भी कितने गुनहगार हैं कितने बेगुनाह कोई हिसाब नहीं। दीनहीन सा मुंह लिये सरकार के लोग कहते हैं किसी जांच की जरूरत नहीं। और सूबे के मुखिया ने मौन धारण किया हुआ है। उनकी नजर में सब विपक्षियों की चाल है। सारे सबूत सारे दस्तावेज….. जय हो मामाजी की हद हो गई ये तो। अगर व्यापमं मामले के आरोपियों और गवाहों की मौत की ही बात करें तो इसके भी सही—सही आंकडे नहीं हैं।