ये है जागरण की ‘कथनी- करनी में फर्क’ का एक छोटा सा फसाना

केंद्र सरकार की कथनी और करनी में कितना फर्क है- एक तरफ सरकार कहती है कि श्रमिकों के अधिकारों का किसी भी कीमत पर संरक्षण किया जाएगा तो दूसरी तरफ अखबारों के कर्मचारियों को मजीठिया वेतनमान दिलाने के लिए एक बयान तक जारी नहीं कर सकी है। शायद यही वजह है कि अखबार मालिक मानीय सुप्रीम कोर्ट की आंख में धूल झोंक रहे हैं।