‘सभ्यताओं के संघर्ष’ की शुरुआत हो चुकी है, मुस्लिम उग्रवाद बनेगा तृतीय विश्वयुद्ध का कारण!

क्या यूरोप पर इस्लामी शासन होगा और क्या अमेरिका वहाँ परमाणु हमला कर मुस्लिमों का सफाया कर देगा?

इस्तांबूल (तुर्की), क्वेटा (पाकिस्तान), जलालाबाद (अफगानिस्तान), जकार्ता (इंडोनेशिया) आदि में हुए हालिया आत्मघाती हमलों ने एक बार फिर साबित किया है कि इस्लामी आतंकवाद अभी समाप्त होने वाला नहीं है। हालांकि अभी कुछ दिन पहले ही इसके कमजोर होने के अनुमान लगाये जा रहे थे लेकिन ऐसे हल्के हमलों की निरंतरता से इन आशंकाओं को बल मिलता है कि कहीं यह भयंकर तूफान से पहले की चेतावनी तो नहीं है। यह बात निश्चित रूप से कही जा सकती है कि इन आत्मघाती हमलों के लिए कम समझ वाले युवाओं को तथाकथित जेहादी शहादत के आकर्षक भ्रम-जाल में फंसा कर धार्मिक उन्माद का जहर दुनिया भर में फैलाने का दुष्चक्र अभी आगे भी जारी रहेगा। यदि निकट भविष्य में कथित जेहादी ताकतें किसी तरह शक्ति बटोरने में सफल हो जाती हैं, जिसकी संभावना से इंकार भी नहीं किया जा सकता, तो जल्दी ही ऐसी अमानवीय घटनाओं का सिलसिला एक बार फिर शुरू हो सकता है।

इस साल के अंत तक दुनिया की आधी आबादी जुड़ जाएगी इंटरनेट से

इस साल के आख़िर तक दुनिया की कुल जनसंख्या में से आधे लोग इंटरनेट से जुड़ चुके होंगे. संयुक्त राष्ट्र की संस्था अंतरराष्ट्रीय टेलीकम्यूनिकेशन यूनियन (आईटीयू) की एक रिपोर्ट में अनुमान है कि 3.2 अरब से ज़्यादा लोग ऑनलाइन हो चुके होंगे, फिलहाल दुनिया की जनसंख्या 7.2 अरब है. इनमें विकासशील देशों के तकरीबन दो अरब लोग शामिल हैं. लेकिन सबसे कम विकसित देशों की सूची में शामिल नेपाल और सोमालिया से सिर्फ 8 करोड़ 90 लाख लोग ही इंटरनेट का इस्तेमाल कर पाएंगे.