खुद के लिखे-छपे पुराने लेखों को पढ़ने का सुख बता रहे भड़ास वाले यशवंत

Yashwant Singh :   दो पुराने (आई-नेक्स्ट के दिनों के) लेखों को पढ़ने का सुख…. बहुत कम मौका मिलता है पीछे मुड़कर देखने का. लेकिन जब कभी किसी बहाने देखने का अवसर आता है तो कुछ ऐसी चीजें हाथ लग जाती हैं जिसे देखकर मन ही मन कह उठते हैं… अरे, क्या इसे मैंने ही किया था!

संगम तीरे न होने का दुख

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह उन दिनों आई-नेक्स्ट अखबार के कानपुर एडिशन के लांचिंग एडिटर हुआ करते थे. 18 जनवरी 2007 को प्रकाशित यह लेख आई-नेक्स्ट में ही एडिट पेज पर छपा था. पेश है वही आलेख, हू-ब-हू…