जब सोनिया गांधी सत्ता की सर्वेसर्वा थीं तो उनके कालेधन के बारे में उसी दौर में भड़ास पर स्टोरी छापी गई थी

Yashwant Singh : मूर्ख भाजपाइयों और भक्तों को बता दें कि जब वो चुप्पी मारे बिल में थे तब भी हम लोग सत्ता के खिलाफ लिखते थे और सीना ठोक कर लिखते थे. ये स्टोरी भड़ास के तब कंटेंट एडिटर रहे Anil Singh ने तैयार की थी और जून 2011 में तब प्रकाशित किया था भड़ास पर जब कांग्रेस की सरकार केंद्र में थी और आदरणीया सोनिया जी सर्वेसर्वा हुआ करती थीं. मीडिया का काम ही सत्ता में बैठे लोगों की कुनीतियों और कदाचारों का खुलासा होता है.

टुकड़खोर चैनल वाले माल्या द्वारा मीडिया को दी गई धमकी पर प्राइम टाइम नहीं दिखाएंगे

Yashwant Singh : बिकाऊ मीडिया के मालिक और संपादक सारे ज्यादातर बड़े उद्योगपतियों से पैसे खाकर बैठे हैं. तभी तो कभी ललित मोदी मीडया के दलालों को धमका जाता है तो कभी भगोड़ा विजय माल्या अपने पालतू संपादकों को डांट जाता है. ध्यान से देखिएगा, किस चैनल और किस अखबार को टोन डाउन होता है विजय माल्या को लेकर. वैसे तो ये चैनल व अखबार पहले ही विजय माल्या जी को महामहिम की तरह पेश कर रहे हैं, जैसे देश से भागकर उन्होंने कोई एहसान कर दिया हो हम लोगों पर.

भड़ास4मीडिया के 8 साल पूरे होने वाले हैं… जानिए कब और कैसे प्रकट हुआ भड़ास

देखते ही देखते आठ साल पूरे होने वाले हैं. इतने लंबे वक्त तक भड़ास निकालता रहूंगा, मुझे खुद पर कतई भरोसा न था. अब जब आठ साल सामने है तो कई चीजें याद आ रही हैं. भड़ास4मीडिया के चार साल पूरे होने पर जो आर्टकिल लिखा था, उसे हूबहू नीचे दे रहा हूं क्योंकि इस आर्टकिल में तफसील से सब कुछ है, वो सब कुछ जिसे फ्लैशबैक में जाकर याद कर रहा हूं. जो कुछ छूटा है, नया है, वह आगे लिखूंगा. फिलहाल चार साल पहले लिखे आर्टकिल को दुबारा पढ़िए. इसे इसलिए भी पढ़िए क्योंकि इस पुराने आर्टकिल के बारे में ‘मीडिया वीडिया’ नामक एक अंग्रेजी ब्लाग चलाने वाले भाई परमीत लिखते हैं: ”This is most frank personal story of any Indian blogger I have read so far.” कोई अंग्रेजी वाला बंदा हम जैसे हिंदी वाले शुद्ध देसी आदमी की अंग्रेजी में तारीफ करता है तो अच्छा तो लगेगा ही गुरु. पहले पढ़िए, परमीत ने पूरा क्या लिखा है. उसके बाद पढ़िए वो आर्टकिल जो भड़ास के चार साल पूरे होने पर पूरे रौ में एक सीटिंग में लिख डाला था.

-यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया

अस्सी हजार रुपये में बिक गई यशवंत की अल्टो कार, अब हुए पूरी तरह पैदल

Yashwant Singh : अस्सी हजार रुपये में बिक गई मेरी दस साल पुरानी अल्टो कार. आजादी थोड़ी सी और बढ़ गई. घुमक्कड़ी में अब आएगा ज्यादा आनंद. दिल्ली का भड़ास आफिस बंद करना और अब कार बेचना… दोनों काम खुद ब खुद हो गए… लेकिन ये दोनों काम और इन दोनों के कम हो जाने के बाद खुद को ज्यादा मुक्त व उदात्त महसूस कर रहा हूं. अगर कार रखने की जगह न हो, एकल परिवार में कोई दूसरा कार चलाने वाला न हो और आफिस वाफिस जाने का कोई झंझट न हो तो कार असल में हाथी की माफिक हो जाया करती है. उस पर भी दिल्ली में केजरीलाल ने आड इवन करके बे-कार जीने के रास्ते जबरन चला दिया था. केजरी भाई साहब के उस प्रयोग से मुझे बड़ा फायदा ये हुआ कि लगातार बस मेट्रो आदि की यात्राएं करने से कार के प्रति मोह आस्था यथास्थितिवाद खत्म हो गया.

‘जानेमन जेल’ के लिए उत्सवधर्मी यशवंत भड़ासी को सलाम!

Ayush Shukla : लोग कई दशक तक पत्रकारिता करते रहते हैं और जेल जाने की नौबत तक नहीं आपाती, क्योकि वे ऐसा कुछ लिख-पढ़ नहीं पाते,  कुछ हंगामेदार कर नहीं पाते कि उन्हें भ्रष्ट लोग भ्रष्ट सिस्टम जेल भेज पाता। Yashwant Singh की जानेमन जेल से साभार। मजा आ गया पढ़ के। किसी भी जेल जाने वाले व्यक्ति को यह पुस्तक जरूर पढ़नी चाहिए। उत्सवधर्मी यशवंत भड़ासी को सलाम।
आयुष शुक्ला
क्लस्टर इनोवेशन सेंटर
दिल्ली विश्वविद्यालय

अतुल सक्सेना के खून के छींटे जागरण के मालिकों के माथे से लेकर न्याय के तराजू और अच्छे दिनों के नारे तक पर पड़े हैं

ये स्तब्ध और रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर है. मजीठिया वेज बोर्ड न दिए जाने, मामले को कोर्ट में लटकाए रखने और दैनिक जागरण प्रबंधन की प्रताड़ना से त्रस्त एक मीडियाकर्मी का जान दे देना दरअसल दिखाता है कि अब यह पूरी व्यवस्था आम जन तो छोड़िए, मीडिया कर्मियों तक के लिए दम घोंटू गैस चैंबर में तब्दील हो चुका है. किसे पड़ी है दैनिक जागरण के उन सैकड़ों लोगों की सुध लेने की जो महीनों पहले ही बेलगाम दैनिक जागरण प्रबंधन द्वारा बर्खास्त किए जा चुके हैं. ये सैकड़ों लोग कई महीनों से बिना सेलरी सड़क पर हैं और अदालतों से लेकर सरकारों तक के चक्कर काट रहे हैं.

यशवंत ने निदा फ़ाज़ली को कुछ इस तरह दी श्रद्धांजलि (देखें वीडियो)

Yashwant Singh : निदा फ़ाज़ली साहब के न रहने पर उनकी वो नज़्म याद आती है जिसे उन्होंने अपने पिता के गुजर जाने पर लिखा था… ”तुम्हारी कब्र पर मैं, फ़ातेहा पढ़ने नहीं आया, मुझे मालूम था, तुम मर नहीं सकते.” इस नज़्म को आज पढ़ते हुए खुद को मोबाइल से रिकार्ड किया. इसी नज़्म की ये दो लाइनें:

तुम्हारी मौत की सच्ची खबर, जिसने उड़ाई थी, वो झूठा था,
वो तुम कब थे? कोई सूखा हुआ पत्ता, हवा मे गिर के टूटा था।

व्यापारी संगठन के इन सवालों के क्रमवार जवाब कोई भाजपाई या मोदी भक्त दे तो अच्छा रहेगा

Yashwant Singh : भड़ास के पास ALL DELHI COMPUTER TRADERS ASSOCIATION (ADCTA) की तरफ से एक ईपत्र आया है, adcta.nehruplace@gmail.com मेल आईडी और Modi Ji, Vyapari ke Man ki Baat bhi suniye शीर्षक से. इसमें जो कुछ कहा गया है, उसका बिंदुवार जवाब कोई भाजपाई या मोदी भक्त दे तो अच्छा रहेगा… पढ़िए व्यापारी संगठन की मेल में कहा क्या गया है.

मस्ती की एक रात इस Osho पंथी संत ने यशवंत को दीक्षित कर नाम दे दिया स्वामी प्रेम संतति!

Yashwant Singh : तंत्र साधना को जानने की इच्छा के तहत काफी समय से बहुत कुछ पढ़, देख, सुन, खोज रहा हूं. इसी दरम्यान चंद रोज पहले लखनऊ में एक ओशो पंथी संन्यासी मिल गए, स्वामी आनंद भारती. उनसे तंत्र को लेकर त्रिपक्षीय वार्ता हुई. एक कोने पर Kumar Sauvir जी थे. दूसरे कोने पर खुद स्वामी आनंद भारती और तीसरे कोने पर मैं, श्रोता व वीडियो रिकार्डर के रूप में. ये 25 मिनट का वीडियो आपको बहुत कुछ बताएगा.

यशवंत यात्रा संस्मरण : एलीफैंटा द्वीप पर बुद्ध को किसने पीटा? देखें वीडियो

Yashwant Singh : एलीफैंटा द्वीप पर जो गुफाएं हैं, उसमें दीवारों पर चारों तरफ बुद्ध की मूर्तियां हैं. किसी में बुद्ध के पैर कटे हैं, किसी में मुंह टूटा है, किसी में हाथ गायब हैं. शांति के प्रतीक बुद्ध के साथ ये हिंसा कब और किसने की होगी. वीडियो बनाते हुए ये सवाल दिल दिमाग में चलता रहा. क्या वाकई हिंसा, डेस्ट्रक्शन ही मुख्य धारा है और शांति करुणा अहिंसा आदि चीजें रिएक्शन में पैदा हुईं, साइड इफेक्ट के चलते उपजी हुई बाते हैं? क्या प्रकृति की मोबोलिटि के लिए वायलेंस अनिवार्य है? शांति और अहिंसा से क्या प्रकृति को खुद के लिए खतरा पैदा होता है? या फिर ऐसा कि प्रकृति हर दौर के अपने नायक चुनती है और जब बुद्ध का दौर खत्म हुआ तो उनसे बड़ा कोई नायक पैदा नहीं हुआ लेकिन नित नए नए आयाम छूती गई? उदास मन और कई प्रश्नो को लेकर लौटा. आप भी देखिए और थोड़ा मुझे समझाइए.

त्रयंबकेश्वर मंदिर : 200 रुपये डोनेशन देकर वीआईपी दर्शन करने की बात लिखा देख मन बिदक गया

Yashwant Singh : आजकल नासिक में डेरा है. यहां चाचाजी की ओपन हॉर्ट सर्जरी हुई है. सब कुछ सकुशल रहा. वे अपने सुपुत्र और मेरे छोटे भाई Rudra Singh के यहां रहकर स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं. चाचाजी के कहने पर आज नासिक से कुछ दूर स्थित त्रयंबकेश्वर मंदिर गया, जिसकी हिंदू धर्म में बहुत महिमा है. पर मंदिर के गेट पर 200 रुपये डोनेशन देकर वीआईपी दर्शन करने की बात लिखा देख मन बिदक गया. भीतर नहीं गया. पूछा तो पता चला कि आम जनता लंबी लाइन लगाकर काफी समय गुजारने के बाद दर्शन लाभ पाती है लेकिन जो दो सौ रुपये दे देते हैं उन्हें तुरंत डायरेक्ट दर्शन करा दिया जाता है.

 

मेरठ, मोदी, मनुष्य और मस्ती : कहीं आप रोबो मशीन तो नहीं!

Yashwant Singh :  मेरठ आया हुआ हूं. कल जब बस से उतरा तो पुरानी यादों के सहारे शार्टकट मार दिया. वो मटन कोरमा और काली मिर्च चिकन की खुश्बू को दिलों में उतारते, उस दुकान के सामने खड़े होकर कुछ वक्त उसे निहारते. फिर एक तंग गली में चल पड़ा. रिक्शों, आटो वालों को मना करते हुए कि मुझे पैदल ही जाना है. चलता रहा. कई दिन से दाढ़ी बढ़ी हुई थी. दाएं बाएं देखता रहा और वर्षों पुरानी मेरठ की यादों को ताजा करते हुए पैदल चलता रहा.

मांस मदिरा से मोक्ष तक की बात करने वाला एक बुजुर्ग OSHO पंथी संन्यासी (देखें वीडियोज)

Yashwant Singh : OSHO मांस मदिरा से मोक्ष तक, एक बुजुर्ग ओशो अनुयायी संन्यासी का दर्शन प्रवचन देखें सुनें… ओशो कह गए, संभोग से समाधि तक. उनके हाथों दीक्षित एक बुजुर्ग ओशो अनुयायी कह रहे हैं मांस मदिरा से मोक्ष तक. लखनऊ में वरिष्ठ पत्रकार Kumar Sauvir के ठिकाने पर एक शाम फक्कड़ों की हुई जुटान में इस ओशो पंथी संत से मांस मदिरा उत्सव के दौरान इस विषय पर हुई बेबाक बातचीत को मैंने छह पार्ट में मोबाइल से रिकार्ड किया.

दूल्हा हिंदू, दुल्हन मुस्लिम, दोनों मीडिया में, दोनों आर्टिस्ट, शादी हुई क्रिश्चियन रीति से, देखें वीडियो

Yashwant Singh : पिछले दिनों एक अनूठी शादी में शिरकत करने का मौका मिला. लड़का हिंदू. लड़की मुस्लिम. दोनों ही मीडिया फील्ड से. दोनों ही आर्टिस्ट, यानि कार्टून, स्केच, चित्रकारी में सक्रिय. दोनों में कई वर्षों से प्रेम संबंध था.

बात शादी तक पहुंची. परिवार वाले राजी न थे लेकिन धीरे-धीरे दोनों ने अपने प्रेम और परिश्रम से परिजनों को राजी कर लिया. हालांकि ऐसा कर पाना भारत में बड़ा मुश्किल काम होता है लेकिन हुआ. प्रेम की उदात्तता के आगे मजहब की चट्टानी दीवार बौनी साबित हुई. दोनों के परिजनों ने अपनी-अपनी सीमाओं, अपनी-अपनी सोच के आगे जाने का फैसला किया.

मेरठ में नाई की दुकान, मोदी-केजरी की राजनीति और आम जन का जीवन : …कहीं आप धन कमाने वाले रोबो मशीन तो नहीं!

Yashwant Singh : मेरठ आया हुआ हूं. कल जब बस से उतरा तो पुरानी यादों के सहारे शार्टकट मार दिया. वो मटन कोरमा और काली मिर्च चिकन की खुश्बू को दिलों में उतारते, उस दुकान के सामने खड़े होकर कुछ वक्त उसे निहारते. फिर एक तंग गली में चल पड़ा. रिक्शों, आटो वालों को मना करते हुए कि मुझे पैदल ही जाना है. चलता रहा. कई दिन से दाढ़ी बढ़ी हुई थी. दाएं बाएं देखता रहा और वर्षों पुरानी मेरठ की यादों को ताजा करते हुए पैदल चलता रहा.

उतर गया चोला… अमीरों का आदमी साबित हुआ केजरीवाल, समझा रहे हैं यशवंत सिंह

Yashwant Singh  : कई लोग कहते मिले कि दिल्ली सुधर गई, केजरीवाल का फार्मूला पास हो गया, दिल्ली वाले बिना चूं चपड़ किए हंसते खेलते नया नियम मान लिए, प्रदूषण घट गया, ट्रैफिक स्मूथ हो गया… ब्ला ब्ला ब्ला…

जा जा रे केजरिया… तू तो एहसासे करा दिए हम गरीबों को कि हम सब ब्लडी गरीब टाइप लोग भेरी भेरी गरीब हैं

Yashwant Singh : कृपया कोई दिल्ला वाला आपाई विशेषज्ञ मेरी इस भड़ास का जवाब दे…

मेरी मारुति अल्टो कार छह सात साल पुरानी है… इसके अलावा मेरे पास कोई दूसरी कार या बाइक या साइकिल नहीं है… मेरी कार का आखिरी अंक 7 पड़ता है. परसों दो तारीख को सिनेमा जाने का प्लान है.. फिर घूमने का… तो क्या मैं परसों बच्चों को कार पर बिठाकर सिनेमा दिखाकर उसके बाद इंडिया गेट घुमाने ले जा सकता हूं… या कार को घर पर धो पोंछकर रखें और हम चार पांच जच्चा बच्चा युक्त सकल परिवार मम पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ठुंसियाने को मजबूर होवें?

आनलाइन एड एजेंसी झुकी, भड़ास के खाते में हफ्ते भर के विज्ञापन के लिए 70 डालर आए… चीयर्स

एक विदेशी आनलाइन एड एजेंसी ने 70 डालर मेरे एकाउंट में भेज दिए. काफी दिनों से बारगेनिंग चल रही थी. मैंने बहुत पहले तय कर लिया था कि बिना एडवांस लिए आनलाइन या आफलाइन, किसी एड एजेंसी वालों या किसी शख्स का विज्ञापन नहीं चलाउंगा क्योंकि विज्ञापन चलवाने के बाद पेमेंट न देने के कई मामले मैं भुगत चुका था. बकाया भुगताने के लिए बार बार फोन करने, रिरियाने की अपनी आदत नहीं रही. हां, इतना जरूर कुछ मामलों में किया हूं कि किसी रोज दारू पीकर बकाया पैसे के बराबर संबंधित व्यक्ति को फोन कर माकानाकासाका करके हिसाब चुकता मान लेता हूं. पर यह कोई ठीक तरीका थोड़े न है. इसलिए एक नियम बना लिया. बिना एडवांस कोई विज्ञापन सिज्ञापन नहीं. दर्जनों एड प्रपोजल इसलिए खारिज करता रहा क्योंकि आनलाइन एजेंसी को एडवांस पेमेंट वाला शर्त मंजूर न था. लेकिन आखिरकार एक एड एजेंसी झुकी और 70 डालर हफ्ते भर के विज्ञापन के लिए दे दिए.

अगले लोकसभा चुनाव तक मोदी की मार खा खा के केजरी देशव्यापी हैसियत हासिल कर लेंगे : यशवंत सिंह

Yashwant Singh : इस देश के जन-मानस में पीड़ित या प्रताड़ित के प्रति सिंपैथी रखने की प्रवृत्ति बहुत भयंकर है. इमोशनल देश जो ठहरा. एक जमाने में मोदी जी इसी टाइप सिंपैथी गेन कर कर के इतने मजबूत हुए कि अब पीएम हैं. पीएम पद ने मोदी का दिमाग घुमा दिया है. या यूं कहिए …

अमावस की एक रात… गोवर्द्धन परिक्रमा मार्ग… यशवंत को एक भिखारी का भूखदान

मथुरा वृंदावन कई बार जा चुका हूं. गोवर्द्धन व बरसाना इस बार जाना हुआ. ये सब मथुरा जिले में ही है. गोवर्द्धन में सात कोसी यानि 21 किमी परिक्रमा की परंपरा है. मैं अमावस की रात 12 किमी पैदल टहला. अदभुत लगा. नाइट आउट की इतनी मजेदार जगह मुझे आजतक नहीं मिली. तरह तरह के लोग. ढेर सारी दुकानें. आस्था और आधुनिकता एक साथ नंगे पांव.

जो-जो पत्रकार pm के साथ सेल्फी की फ़ोटो सोशल मीडिया पर डाले, कमेंट बॉक्स में ‘प्रेस टी च्यूट” ज़रूर लिखना

Yashwant Singh : आज मीडिया वालों का सेल्फी दिवस है। pm साब बेचारों को पूरा मौका दिए हैं। फिर भी मीडिया वाले साले कहते हैं कि हमारे pm जी असहिष्णु हैं! अबे चिरकुटों, असहिष्णु तो तुम खुद हो। मरे गिरे छटपटाये जा रहे हो सेल्फी के लिए। pm ने तुम लोगों की औकात फिर दिखा दी। बिकाऊ बाजारू के अलावा सच में ‘प्रेस टी च्यूट’ हो।

मजीठिया वेज बोर्ड मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई में हो रही देरी पर यशवंत ने मुख्य न्यायाधीश को भेजा पत्र

देश भर के सैकड़ों लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद अखबार मालिकों द्वारा मजीठिया वेज बोर्ड न दिए जाने के खिलाफ अवमानना याचिका सुप्रीम कोर्ट में लगा रखी है. भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह ने भी सैकड़ों मीडियाकर्मियों का प्रतिनिधित्व करते हुए कई मीडिया हाउसों के मालिकों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका एडवोकेट उमेश शर्मा के माध्यम से दायर कर रखी है. इन सारी याचिकाओं की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई इकट्ठे करता है. सुप्रीम कोर्ट ने कई महीनों पहले सुनवाई के दौरान आदेश दिया कि श्रम विभाग के स्पेशल अधिकारी मजीठिया वेज बोर्ड की रिपोर्ट लागू किए जाने को लेकर स्टेटस रिपोर्ट बनाकर कोर्ट में सबमिट करें, उसके बाद अगली सुनवाई होगी.

यशवंत पर हमले की कहानी, उन्हीं की जुबानी ( देखें सुनें संबंधित आडियो, वीडियो और तस्वीरें )

बिना वाइपर की बस… यह तस्वीर तबकी है जब बारिश थोड़ी कम हो गई थी.

दिल्ली को अलविदा कहने के बाद आजकल भ्रमण पर ज्यादा रहता हूं. इसी कड़ी में बनारस गया. वहां से रोडवेज बस के जरिए गाजीपुर जा रहा था. मेरे चाचाजी को हार्ट अटैक हुआ था, जिसके बाद उनकी ओपन हार्ट सर्जरी होनी है. उन्हीं को देखने के लिए गाजीपुर जा रहा था. शिवगंगा ट्रेन से बनारस उतरा और रोडवेज की बस पकड़ कर गाजीपुर जाने लगा. मौसम भीगा भीगा था. बारिश लगातार हो रही थी. बस चलने लगी. बिना वाइपर की बस धीमी गति से रेंगते हुए बढ़ रही थी. ड्राइवर कुछ ज्यादा ही सजग था क्योंकि लगातार बारिश से बस का शीशा पानीमय हुआ जा रहा था और उसे शीशे के पार सड़क पर देखने के लिए कुछ ज्यादा ही मशक्कत करनी पड़ रही थी.

मजीठिया वेज बोर्ड लागू कराने के लिए की गई सख्ती से घबराए कुछ मीडिया हाउस दिल्ली छोड़कर भागे : गोपाल राय

(दिल्ली सरकार के मंत्री गोपाल राय और भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह) दिल्ली सरकार के श्रम और परिवहन मंत्री गोपाल राय ने भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह से बातचीत में बताया कि मीडियाकर्मियों के वेतन मसले पर मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें लागू कराने की दिल्ली सरकार की सख्ती के चलते कुछ मीडिया हाउस दिल्ली …

एक जनपक्षधर आईपीएस के सामने बौनी साबित हो गई देश के सबसे बड़े सूबे की पूर्ण बहुमत वाली सरकार

इसे कहते हैं जनपक्षधरता की ताकत. लोग कहते हैं कि अगर आप नियम कानून पर चलेंगे, ईमानदारी व सत्य की वकालत करेंगे, आम जन के हितों को देखकर काम करेंगे तो आजकल का भ्रष्ट सिस्टम आपको कहीं का नहीं छोड़ेगा. लेकिन बात जब अमिताभ ठाकुर जैसे आईपीएस की हो तो लगता है कि नहीं, अब भी लड़ने वाले लोग अकेले होकर भी पूरे सिस्टम को अपने सामने झुकने, बौना दिखने के लिए मजबूर कर सकते हैं. उत्तर प्रदेश सरकार के भ्रष्ट मंत्रियों और भ्रष्ट नीतियों की पोल खोलने वाले जनपक्षधर आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को यूपी की पूर्ण बहुमत वाली सपा सरकार लाख कोशिश करके भी अरेस्ट नहीं कर पा रही है.

हे अफसरों! हे कर्मचारियों! इन तस्वीरों को देखिए और सोचिए, क्या आप भी इसी तरह रेंगते हुए जीवन तो नहीं बिता रहे!

कुछ दिनों पहले ये तस्वीरें और इनसे संबंधित खबर इंटरनेट पर देख पढ़ कर शाक्ड रह गया. चीन में टारगेट न पूरा करने पर कर्मचारियों को घुटने के बल रेंगने चलने को कहा गया. यह सब पब्लिकली किया गया. कर्मचारी नौकरी बचाए रखने के चक्कर में न सिर्फ सार्वजनिक तौर पर घुटने पर रेंगे बल्कि लोगों ने जब इसकी तस्वीरें खींची तो प्रतिरोध तक नहीं किया. कई कर्मचारियों के आंसू निकल गए. उन्हें कोई दूसरा कर्मचारी सांत्वना देने लगा. ये सब कुछ तस्वीरों में कैद है. इन तस्वीरों को इंटरनेट पर खबर के साथ ज्यादातर पोर्टलों चैनलों ने प्रसारित प्रकाशित किया.

जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने फेसबुक पर किया भड़ास वाले यशवंत का ‘पोस्टमार्टम’!

Markandey Katju : Had a long talk with Yashwant Singh of Bhadas4media who had invited me to a function in the Press Club of India recently. I told him that he has two great qualities (1) he is honest (2) he is brave. Hardly 10% of Indian educated class are honest and brave. Either they are not honest,which means they have been bought over by the corporates, or they are not brave, which means they do not dare to speak out against oppression and exploitation for fear of endangering their jobs. Yashwant has both these qualities.

भड़ास वाले यशवंत ने दिल्ली को अलविदा कहा

Yashwant Singh : अलविदा दिल्ली। 9 साल का साथ आज ख़त्म। पैकिंग कम्प्लीट। रात में रवानगी। अब पूरा देश मेरा। केरल से लेकर कासगंज तक रहेगा डेरा, बारी बारी। दिल्ली में आज आखिरी दिन विदा देने राहुल पूनम राजीव आदि साथी पहुंचे। सबका आभार। लेकिन हे दिल्ली वालों, ये मत बुझना कि यहाँ से गया तो चला ही गया। आऊंगा, भले ही मेहमान की तरह। दिल्ली में हर राज्य के बने भवन सदन गेस्ट हाउस निवास जो हजारों की संख्या में हैं, सब मेरे हैं। इतने सारे दोस्त साथी मित्र भाई दिल्ली में हैं कि रहने के दिन कम पड़ जाएंगे, जगह नहीं। इसलिए जाने का मतलब ये नहीं कि मूंग दलना बंद होगा या कम होगा। पर अब फिक्स हो कर नहीं बैठेंगे। पूरा भारत दबा के घूमना है। काम जब अपना ऑनलाइन है तो शरीर के मोबाइल रहने में कोई प्रॉब्लम नहीं। और, कई दफे शरीर की सचेत या निष्प्रयोज्य मोबिलिटी आत्मा चेतना को झकझोरने जगाने का काम करता है। कुल मिला कर अज्ञात नए के लिए के लिए तन मन से प्रस्तुत हूँ।

वीरेन दा की कविता ‘इतने भले न बन जाना साथी’ का यशवंत ने किया पाठ, देखिए वीडियो

Yashwant Singh : गुरु, दिल्ली आते ही एक प्रयोग कर दिया मैंने. अपने गुरुवर और प्रिय कवि वीरेन डंगवाल को श्रद्धांजलि देने के लिए उनकी एक कविता का पाठ किया. इस सबको रिकार्ड कराया. ये पहला प्रयोग है. अगर आप लोग सराहेंगे तो आगे वीरेनदा समेत नए पुराने ढेरों कवियों की कविताओं का यूं ही पाठ करके उसका डिजिटलाइजेशन किया जाएगा और बड़े पाठक समूह तक पहुंचाया जाएगा. आप सभी मित्रों का फीडबैक चाहूंगा, इस वीडियो पर. https://goo.gl/sU1gbe

सारा चैट सुरक्षित है, अपने लड़कियापे का नाजायज फायदा न उठाओ : यशवंत सिंह

Yashwant Singh : परसों एक लौंडिया पर शक किया कि उसकी fb id फेक लग रही है तो वो बार बार धमकावे कि unfriend kar dungi. उसकी फेक id की पहचान की प्रक्रिया में उसके परिचय और फोन आदि के बारे में फिर बहाने से तहकीकात की तो वो कहे बार बार कि unfriend kar …